कैंची धाम जाने से पहले 2 मिनट रुकिए; दर्शन का नया नियम जारी, बिना रजिस्ट्रेशन लौटा दिए जाएंगे वापस
विश्व प्रसिद्ध बाबा नीम करोली के पावन आश्रम कैंची धाम में श्रद्धालुओं की लगातार उमड़ रही भारी भीड़, घंटों लग रहे जाम और अव्यवस्था से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब कैंची धाम आने वाले भक्तों के लिए चारधाम यात्रा की तर्ज पर उत्तराखंड पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर अनिवार्य पंजीकरण व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। नैनीताल जिला प्रशासन ने इसका विधिवत प्रस्ताव तैयार कर पर्यटन विकास परिषद और शासन को भेज दिया है। प्रस्ताव के तहत पोर्टल पर कैंची धाम के लिए एक अलग विशेष पंजीकरण विंडो तैयार की जाएगी, जिससे भक्तों की आमद को नियंत्रित और सुगम बनाया जा सके।
हल्द्वानी-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों के भारी दबाव और कैंची धाम क्षेत्र की सीमित भौगोलिक वहन क्षमता को देखते हुए रोजाना 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं को ही दर्शन की अनुमति देने की रूपरेखा तैयार की गई है। जैसे ही किसी निश्चित तारीख का कोटा पूरा होगा, वेबसाइट स्वतः उस दिन की बुकिंग रोक देगी और भक्तों को अगली उपलब्ध तारीख चुनने का विकल्प दिखाएगी। इतना ही नहीं, ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान श्रद्धालुओं को अपने ठहरने (होटल/होमस्टे) और वाहन पार्किंग की पूर्व व्यवस्था की जानकारी भी दर्ज करनी होगी। दरअसल, बीते दिनों रोजाना 45 से 50 हजार भक्तों के अचानक पहुंचने से हाईवे पूरी तरह ठप हो गया था, जिसे पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही हल्द्वानी के व्यापारी सम्मेलन में श्रद्धालुओं की दैनिक सीमा तय करने के स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं।
यातायात प्रबंधन को पुख्ता रखने के लिए बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ऑनलाइन पास की चेकिंग हल्द्वानी की सीमा पर ही बैरियर लगाकर की जाएगी। जिन वाहनों के पास वैध पंजीकरण और पार्किंग का विवरण होगा, उन्हें ही आगे पर्वतीय मार्ग पर जाने दिया जाएगा। अतिरिक्त दबाव की स्थिति में निजी गाड़ियों को हल्द्वानी में बनी विशाल पार्किंग में रोककर श्रद्धालुओं को विशेष शटल बसों से कैंची धाम भेजा जाएगा, ताकि पहाड़ों की ओर जाने वाले स्थानीय यात्रियों की नियमित आवाजाही बाधित न हो। वहीं, स्थानीय निवासियों को इस नई व्यवस्था से पूरी तरह राहत दी गई है; स्थानीय नागरिक अपना आधार कार्ड, वोटर आईडी या कोई भी स्थानीय पहचान पत्र दिखाकर बिना किसी रोक-टोक के नियमित आवागमन और दर्शन कर सकेंगे। शासन की अंतिम मुहर लगते ही इस नई डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था को धरातल पर उतार दिया जाएगा।