यूपी, बंगाल और 2029 का चक्रव्यूह! ज्ञानेश को लेकर राहुल गांधी ने चला ऐसा दांव कि हिल गई सत्ता की कुर्सी

यूपी, बंगाल और 2029 का चक्रव्यूह! ज्ञानेश को लेकर राहुल गांधी ने चला ऐसा दांव कि हिल गई सत्ता की कुर्सी

मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में कथित विसंगतियों और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन ने देशव्यापी आर-पार की जंग छेड़ दी है। विपक्षी दलों के सांसद और कार्यकर्ता दिल्ली से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में सड़कों पर उतर आए हैं। इस आंदोलन की सीधी अगुवाई कर रहे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने साफ कर दिया है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक यह विरोध प्रदर्शन थमने वाला नहीं है। बुधवार को जनपथ से जंतर-मंतर की ओर विरोध मार्च निकालते हुए राहुल गांधी को लगातार दूसरे दिन पुलिस ने हिरासत में लिया, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह लड़ाई लोकतंत्र की सबसे पवित्र चीज यानी मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए है। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

राजनीतिक रणनीतिकारों के मुताबिक, मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा सीधे तौर पर देश के हर नागरिक, वर्ग और तबके से जुड़ा हुआ है। विपक्षी खेमे का मानना है कि इस संवेदनशील मुद्दे को उठाकर वे जनता के बीच सीधा भरोसा कायम कर सकते हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिसने सत्तारूढ़ भाजपा को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है और इंडिया गठबंधन की इस साझा ताकत का कोई आसान तोड़ फिलहाल सत्ता पक्ष के पास नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष का मुख्य मकसद मुख्य चुनाव आयुक्त और आयोग पर इतना मजबूत दबाव बनाना है ताकि आगामी विधानसभा चुनावों में किसी भी तरह की मनमानी या गड़बड़ी की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो सके।

यह पूरा सियासी संग्राम 2027 में होने वाले अहम विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल के अलावा उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के चुनाव भाजपा और एनडीए के भविष्य की दिशा तय करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यूपी में एनडीए तीसरी बार सरकार बनाने में लड़खड़ाता है, तो 2029 के आम चुनाव की राह उसके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगी। ऐसे में संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष का यह आक्रामक रुख चुनाव आयोग को निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए विवश कर रहा है।

कांग्रेस और गठबंधन के रणनीतिकारों का मानना है कि एसआईआर (SIR), ईवीएम की विश्वसनीयता और चुनाव प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की यह मुहिम तभी निर्णायक बनेगी जब इसमें आम जनता की सीधी भागीदारी होगी। यही वजह है कि इंडिया गठबंधन ने सिर्फ दिल्ली तक सीमित न रहकर कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में साझा विरोध रैलियों की योजना बनाई है। विपक्षी दल वोट के अधिकार और पारदर्शिता के इस मुद्दे को जन-जन तक ले जाकर 2027 और 2029 की चुनावी जमीन को मजबूत करने की लंबी तैयारी में जुटे हैं।