देश के 18 राज्यों में अगले 9 घंटे के भीतर मूसलाधार बारिश का भयंकर अलर्ट

देश के 18 राज्यों में अगले 9 घंटे के भीतर मूसलाधार बारिश का भयंकर अलर्ट

देशभर के मौसम का मिजाज एक बार फिर से पूरी तरह बदलता हुआ नजर आ रहा है और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी (IMD) ने देश के एक बड़े हिस्से के लिए बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के ताजा और बेहद डरावने पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी 20 सितंबर यानी कल देश के लगभग 18 प्रमुख राज्यों में मानसून का एक नया और विनाशकारी दौर सक्रिय होने जा रहा है, जिससे अगले 9 घंटों के भीतर भारी से अति भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने कम दबाव के क्षेत्रों के कारण बादलों का एक विशाल समूह सक्रिय हो गया है, जो मैदानी इलाकों से लेकर पर्वतीय क्षेत्रों तक तबाही मचा सकता है। इस दौरान कई इलाकों में बादलों के गरजने के साथ-साथ 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज और खतरनाक रफ्तार से झक्कड़ हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। सरकार और स्थानीय प्रशासन ने भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अपनी कमर कस ली है और लोगों से पूरी तरह सतर्क रहने की अपील की गई है ताकि किसी भी अनहोनी घटना से बचा जा सके।

इन 18 राज्यों में मंडरा रहा है भारी बारिश और तबाही का खतरा, मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज व रेड अलर्ट

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की नवीनतम सैटेलाइट तस्वीरों और मौसम विश्लेषण के मुताबिक, आगामी 20 सितंबर को जिन 18 राज्यों में मूसलाधार बारिश का सबसे ज्यादा कहर देखने को मिल सकता है, उनमें उत्तर भारत, मध्य भारत, पूर्वी भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कई महत्वपूर्ण राज्य शामिल हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, असम और मेघालय में मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ने की आशंका जताई गई है। इनमें से कई संवेदनशील जिलों में मौसम विभाग ने ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी कर दिया है, जिसका मतलब यह है कि लोगों को बहुत जरूरी होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलना चाहिए। खासकर निचले और बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दे दिए गए हैं क्योंकि लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे शहरी इलाकों में भी जलभराव की गंभीर समस्या पैदा होने का खतरा मंडरा रहा है।

60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं और आकाशीय बिजली का भयंकर प्रकोप

कल यानी 20 सितंबर को केवल मूसलाधार बारिश ही नहीं, बल्कि प्रकृति का एक और भयंकर रूप लोगों को डरा सकता है और वह है तेज आंधी-तूफान के साथ आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं। आईएमडी के अनुसार, जिन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है, वहां आसमान में बादलों की गड़गड़ाहट के बीच 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं। इतनी तेज गति से चलने वाली हवाओं के कारण कच्चे मकानों, टीन शेड, होर्डिंग्स और कमजोर पेड़ों के उखड़ने का भारी खतरा पैदा हो गया है, जिससे सड़क यातायात और बिजली की सप्लाई भी बाधित हो सकती है। मौसम विभाग ने विशेष रूप से किसानों, वाहन चालकों और खुले में काम करने वाले मजदूरों को चेतावनी दी है कि वे खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे बिल्कुल खड़े न हों और पक्के आश्रय स्थलों की तलाश करें। आकाशीय बिजली यानी वज्रपात से बचने के लिए मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है क्योंकि इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं में हर साल बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती है, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

प्रशासनिक तैयारियां और आम जनता के लिए मौसम विभाग की जरूरी एडवाइजरी

देश के 18 राज्यों में कल आने वाले इस भारी मौसम संकट को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की आपदा प्रबंधन एजेंसियों (NDRF और SDRF) को पूरी तरह से हाई अलर्ट मोड पर रख दिया गया है। संवेदनशील जिलों में राहत और बचाव दलों को तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति, जैसे कि बाढ़, भूस्खलन या जलभराव से तुरंत निपटा जा सके। मौसम विभाग ने आम जनता के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों से आग्रह किया है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले अपने गंतव्य और रास्ते के मौसम की स्थिति की पूरी जानकारी जरूर हासिल कर लें। रेलवे और विमानन सेवाओं पर भी इस खराब मौसम का असर पड़ सकता है, इसलिए उड़ानों और ट्रेनों के समय में बदलाव की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। किसानों से भी अपील की गई है कि वे अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर ढंक कर रख लें ताकि बारिश के पानी से उनका भारी नुकसान होने से बच सके। कुल मिलाकर, 20 सितंबर का यह दिन देश के एक बड़े हिस्से के लिए बेहद चुनौती भरा रहने वाला है, जिसमें सतर्कता और समझदारी ही सबसे बड़ा हथियार साबित होगी।