शिक्षकों ने अपनी बचत से कराई जन्मजात नेत्रहीन छात्र की सर्जरी, लौट आई आंखों की रोशनी

शिक्षकों ने अपनी बचत से कराई जन्मजात नेत्रहीन छात्र की सर्जरी, लौट आई आंखों की रोशनी

शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले से इंसानियत और गुरु-धर्म को निभाने वाली एक ऐसी हृदयस्पर्शी घटना सामने आई है, जिसने सभी की आंखें नम कर दी हैं। भेदिया उच्च विद्यालय के शिक्षकों और प्रभारी प्रधानाध्यापक ने मिलकर एक ऐसे चमत्कार को अंजाम दिया है जिसके बारे में जानकर आपका भी सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा।

जन्म से ही दोनों आंखों की रोशनी से महरूम आठवीं कक्षा के एक गरीब छात्र की जिंदगी में इन शिक्षकों ने अपने पैसों से उम्मीद का ऐसा दिया जलाया कि आज वह बच्चा इस रंगीन दुनिया को अपनी आंखों से देख पा रहा है। गुरु और शिष्य के इस पवित्र रिश्ते की यह कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और हर कोई इन शिक्षकों के जज्बे को सलाम कर रहा है।

तेरह साल की जद्दोजहद और गरीब पिता का बेबस संघर्ष

यह पूरा मामला आउशग्राम-1 ब्लॉक के सुंदरपुर गांव का है, जहां रहने वाले गोपाल टुडू के घर जन्म लेने वाला उनका बेटा रामकृष्ण टुडू अपनी दोनों आंखों से बिल्कुल देख नहीं पाता था। बेटे की इस लाचारी को दूर करने के लिए पिता पिछले तेरह सालों से दर-दर की ठोकरें खा रहे थे। उन्होंने देश के कई अस्पतालों में इलाज करवाया और अपनी गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिए, लेकिन निराशा के अलावा उनके हाथ कुछ नहीं लगा।

जब रामकृष्ण ने भेदिया उच्च विद्यालय में आठवीं कक्षा में दाखिला लिया, तब स्कूल के शिक्षकों को उसकी इस गंभीर समस्या के बारे में पता चला। इसके बाद स्कूल के सभी शिक्षकों ने एक परिवार की तरह यह संकल्प लिया कि वे इस छात्र की आंखों की दुनिया को रोशन करके रहेंगे और पिछले एक साल से लगातार अंदरखाने प्रयास में जुटे रहे।

प्रधानाध्यापक ने आगे बढ़कर उठाया डेढ़ लाख रुपये का खर्च

मामले की गंभीरता को समझते हुए स्कूल के प्रभारी प्रधान शिक्षक नवकुमार घोष ने खुद आगे आकर कमान संभाली। उन्होंने कोलकाता के एक प्रतिष्ठित निजी नर्सिंग होम में रामकृष्ण के सफल इलाज और ऑपरेशन की पूरी जिम्मेदारी उठाई। इस जटिल सर्जरी में कुल डेढ़ लाख रुपये का भारी-भरकम खर्च आया, जिसे किसी से चंदा मांगने के बजाय हेडमास्टर नवकुमार घोष ने अपनी निजी बचत से चुकाया। पिछले सोमवार को जब छात्र की आंख का सफल ऑपरेशन हुआ, तो डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई और रामकृष्ण को एक आंख से साफ-साफ दुनिया दिखने लगी। जन्मों का अंधकार छटने के बाद छात्र और उसके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

शिक्षक दिवस के मंच पर छलके पिता के आंसू, इलाके में हो रही थू-थू नहीं बल्कि तारीफ

बीते शनिवार को जब विद्यालय में शिक्षक दिवस का भव्य समारोह आयोजित किया गया, तो वहां का माहौल बेहद भावुक कर देने वाला था। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में मौजूद छात्र के पिता गोपाल टुडू जब मंच पर पहुंचे, तो वे अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और शिक्षक के चरणों में आभार जताते हुए फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा कि जब वे पूरी तरह हार चुके थे, तब इन फरिश्ते जैसे शिक्षकों ने उनके घर का अंधेरा हमेशा के लिए दूर कर दिया। इस प्रेरणादायक घटना ने साबित कर दिया है कि शिक्षक केवल क्लासरूम में पढ़ाई पूरी कराने वाले इंसान नहीं होते, बल्कि वे जरूरत पड़ने पर भगवान बनकर बच्चों की बिगड़ी तकदीर भी बदल सकते हैं।