मलबे में 10 दिन तक दबी रही 60 साल की महिला, परिवार ने किया था अंतिम संस्कार लेकिन लौट आई जिंदगी
पड़ोसी देश नेपाल में प्राकृतिक आपदा ने जो तांडव मचाया है उसने पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस भीषण तबाही में बारह सौ से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग अभी भी लापता हैं।
तबाही के इस खौफनाक मंजर के बीच नुवाकोट जिले से एक ऐसी चमत्कारी घटना सामने आई है जिस पर यकीन करना किसी के लिए भी आसान नहीं है। बाढ़ के मलबे के नीचे पूरे दस दिनों तक दबी रही साठ साल की एक बुजुर्ग महिला को जब जिंदा बाहर निकाला गया तो देखने वाले दंग रह गए।
खास बात तो यह है कि परिवार वाले उन्हें मरा हुआ मान चुके थे और कुछ दिन पहले ही उनका पुतला बनाकर अंतिम संस्कार की रस्में भी पूरी कर दी थीं।
परिवार ने मान लिया था मृत, कुश के पुतले से कर दिया था अंतिम संस्कार
ये हैरान कर देने वाला मामला नेपाल के बिदुर इलाके का है जहां आई भयंकर बाढ़ ने तबाही का ऐसा मंजर दिखाया कि चार मंजिला इमारतें तक जमींदोज हो गईं। इसी इलाके की रहने वाली चौसठ साल की चंडिका श्रेष्ठा छब्बीस अगस्त को अचानक आई बाढ़ और मलबे में अपने चार अन्य परिजनों के साथ गायब हो गई थीं। कई दिनों तक कोई सुराग न मिलने पर रिश्तेदारों को लगा कि वे अब इस दुनिया में नहीं हैं।
जब आठ दिन बीत गए तो परिवार ने उनकी मौत की पुष्टि मान ली और पारंपरिक रीति-रिवाज निभाते हुए कुश की घास से एक पुतला बनाकर उनका अंतिम संस्कार तक कर दिया था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस इंसान को मृत मानकर शोक मनाया जा रहा है, वह मलबे के नीचे सांसें ले रही है।
ग्यारहवें दिन सोशल मीडिया पर वायरल हुआ रेस्क्यू का वीडियो
बाढ़ के प्रकोप के ग्यारहवें दिन यानी शनिवार को अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको चौंका दिया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा जिसमें नुवाकोट के बेत्रावती बाजार क्षेत्र में एक क्षतिग्रस्त मकान के मलबे से एक अत्यंत कमजोर महिला को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा था। जब रेस्क्यू टीम ने छानबीन की तो पता चला कि यह और कोई नहीं बल्कि वही चंडिका श्रेष्ठा हैं जिन्हें परिवार मरा हुआ समझ चुका था।
इतने लंबे समय तक बिना खाए-पिए मलबे की ढे़र के बीच जिंदा बचे रहना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। इस अनोखी घटना के सामने आने के बाद से आपदा पीड़ितों के बीच एक बार फिर उम्मीद की किरण जाग गई है।