कर्नाटक में कुर्सी के लिए मची रार! आलाकमान ने विधायकों और संतों को दी दो टूक चेतावनी, कहा- 'धैर्य रखें'

कर्नाटक में कुर्सी के लिए मची रार! आलाकमान ने विधायकों और संतों को दी दो टूक चेतावनी, कहा- 'धैर्य रखें'

बेंगलुरु: कर्नाटक की सियासत में इस समय कैबिनेट विस्तार को लेकर सरगर्मियां चरम पर हैं। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री पद पाने के लिए विधायकों से लेकर विभिन्न समुदायों के धर्मगुरुओं और साधु-संतों ने पूरी ताकत झोंक दी है। अलग-अलग गुटों की तरफ से बढ़ती इसी राजनीतिक पैंतरेबाजी और दबाव की राजनीति को देखते हुए अब कांग्रेस आलाकमान ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पार्टी नेतृत्व ने दो टूक शब्दों में विधायकों, समर्थकों और धार्मिक मठों को चेतावनी जारी करते हुए किसी भी तरह की लॉबिंग से दूर रहने की हिदायत दी है।

दिल्ली से बेंगलुरु तक बढ़े दबाव के सुर

दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों से कर्नाटक सरकार में नए मंत्रियों को शामिल करने की मांग ने तेजी पकड़ ली है। कई जातिगत समुदायों के प्रतिनिधियों और बड़े धार्मिक मठों के संतों ने सार्वजनिक रूप से अपने पसंदीदा विधायकों को कैबिनेट में जगह देने की वकालत शुरू कर दी थी। हद तो तब हो गई जब विधायकों के समर्थक और प्रतिनिधिमंडलों ने बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक डेरा डाल दिया और वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर अपनी मांगें मनवाने का प्रयास किया। इसी बढ़ती हुई सार्वजनिक बयानबाजी के बाद आलाकमान को यह कड़ा फरमान जारी करना पड़ा है।

'सड़क पर प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं', आलाकमान का सख्त मैसेज

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि किसी भी विधायक या उनके समर्थकों को मठों, सामुदायिक संगठनों या सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों के जरिए दबाव बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। आलाकमान ने सभी नेताओं को अनुशासन के दायरे में रहने के निर्देश दिए हैं। नेतृत्व का मानना है कि इस तरह की खुलेआम लॉबिंग से न केवल पार्टी की छवि धूमिल होती है, बल्कि सरकार के भीतर अनावश्यक गुटबाजी को भी बढ़ावा मिलता है।

बल्लारी से लेकर शिवमोगा तक भड़की मंत्री पद की चिंगारी

कैबिनेट विस्तार में देरी को लेकर प्रदेश के कई जिलों में कार्यकर्ताओं का असंतोष भी सामने आया है। न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) की रिपोर्ट के अनुसार, बल्लारी सहित कई अन्य जिलों में हाल ही में समर्थकों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए गए हैं। काम्पली से विधायक जेएन गणेश के समर्थकों ने तो मंत्री पद की मांग को लेकर एक मार्च भी निकाला था। इसके अलावा शिवमोगा, बेलगावी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से भी स्थानीय विधायकों को कैबिनेट में शामिल करने की आवाजें लगातार उठ रही हैं।

दबाव से नहीं, बल्कि इन 3 पैमानों पर तय होंगे नए मंत्री

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी अपने सभी विधायकों की आकांक्षाओं का सम्मान करती है और उनसे भली-भांति वाकिफ है। लेकिन, कैबिनेट में किसे जगह मिलेगी और किसे नहीं, इसका फैसला किसी दबाव में आकर नहीं लिया जाएगा। नए मंत्रियों का चयन मुख्य रूप से तीन पैमानों पर आधारित होगा:

  • क्षेत्रीय संतुलन: राज्य के सभी हिस्सों को सरकार में उचित प्रतिनिधित्व मिले।

  • सामाजिक प्रतिनिधित्व: सभी जातियों और वर्गों का संतुलन बना रहे।

  • परफॉर्मेंस (प्रदर्शन): विधायक का काम और उसकी योग्यता।

जुलाई में संभावित है कैबिनेट का दूसरा चरण

3 जून को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में बनी इस सरकार के गठन के बाद से ही कैबिनेट विस्तार के दूसरे चरण को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। फिलहाल कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर समेत कुल 14 मंत्री शामिल हैं। कई वरिष्ठ विधायक जैसे सलीम अहमद और अब्बय्या प्रसाद इस रेस में खुद को सबसे आगे मान रहे हैं। सूत्रों की मानें तो जुलाई के महीने में इस कैबिनेट का विस्तार किया जा सकता है, हालांकि पार्टी या सरकार की तरफ से अभी तक इसकी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। आलाकमान ने स्पष्ट किया है कि सही समय आने पर मुख्यमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व मिलकर इस पर अंतिम फैसला लेंगे, तब तक सभी को धैर्य बनाए रखना होगा।