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'कांग्रेस को बाहर करो, तभी हम रहेंगे...' सहयोगियों ने ही खोल दिया मोर्चा

हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के भीतर की आपसी कलह अब पूरी तरह से सतह पर आ गई है। सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित हुई विपक्षी दिग्गजों की एक बेहद अहम और हाई-प्रोफाइल बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। इस बैठक में गठबंधन के प्रमुख सहयोगियों— डीएमके (DMK), वामपंथी दलों (Left) और वीसीके (VCK) ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति और उसके रवैये को लेकर बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि तमिलनाडु की सत्ता से बेदखल हुई डीएमके ने अब गठबंधन के वजूद को लेकर ही कांग्रेस के सामने एक बेहद सख्त शर्त रख दी है, जिससे विपक्षी एकजुटता बिखरने की कगार पर पहुंच गई है।

डीएमके की दो टूक चेतावनी: 'गठबंधन में कांग्रेस रहेगी, तो हमारा रहना मुमकिन नहीं'

नई दिल्ली की इस बैठक में सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को तमिलनाडु के उसके सबसे भरोसेमंद साथी डीएमके ने दिया। डीएमके के शीर्ष सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, पार्टी ने अब साफ कर दिया है कि वह इंडिया ब्लॉक का हिस्सा तभी बनी रहेगी जब कांग्रेस को इस गठबंधन से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। डीएमके के एक बेहद वरिष्ठ नेता ने अपनी गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए यहां तक कह दिया कि वे देश की चुनाव प्रणाली 'SIR' के संवेदनशील मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भेजे जाने वाले साझा पत्र पर भी अपने हस्ताक्षर नहीं करेंगे। पूरी बैठक के दौरान कांग्रेस द्वारा तमिलनाडु में डीएमके से दूरी बनाने और नए सियासी समीकरण तलाशने का मुद्दा छाया रहा, जिस पर क्षेत्रीय क्षत्रपों ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी।

राहुल गांधी के बयान पर भड़के वामपंथी नेता, पूछा- केरल में हमें 'बीजेपी की बी-टीम' क्यों कहा?

गठबंधन की इस आंतरिक लड़ाई में दूसरा बड़ा मोर्चा केरल के वामपंथी नेताओं ने खोला। सीपीएम (CPM) के कद्दावर नेता जॉन ब्रिटास, सीपीआई (CPI) के संतोष कुमार और भाकपा महासचिव डी. राजा ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के उस चुनावी बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और उनसे सीधे जवाब मांगा, जिसमें राहुल ने केरल चुनाव प्रचार के दौरान वामपंथियों को 'बीजेपी की बी-टीम' करार दिया था। वामपंथी नेताओं ने कांग्रेस पर सीधा आरोप मढ़ते हुए कहा कि तमिलनाडु में डीएमके के गठबंधन छोड़ने के पीछे भी कांग्रेस का ही हाथ है। उनका कहना था कि कांग्रेस ने तमिलनाडु के चुनाव खत्म होते ही बेहद शातिराना तरीके से अभिनेता विजय की नई पार्टी टीवीके (TVK) के पाले में जाकर द्रविड़ राजनीति की अगुआ डीएमके को जानबूझकर उकसाने और कमजोर करने का काम किया है।

कांग्रेस अपनी ही पीठ में छुरा घोंप रही है, सहयोगियों को कमजोर करने की रणनीति आत्मघाती: वीसीके

बैठक के भीतर वीसीके (VCK) के प्रमुख तोल थिरुमावलवन ने भी कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए उसकी राष्ट्रीय रणनीति की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के हालिया फैसलों और अहंकारी रवैये ने उन राज्यों में गठबंधन के मुख्य स्तंभों को ध्वस्त कर दिया है, जहां विपक्ष सबसे मजबूत स्थिति में था। थिरुमावलवन ने खुलकर कहा कि केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में कांग्रेस की नीतियों ने सीधे तौर पर सीपीएम, टीएमसी (TMC) और डीएमके जैसी बड़ी क्षेत्रीय ताकतों को भारी राजनीतिक नुकसान पहुंचाया है। वीसीके प्रमुख ने आगाह किया कि अगर भाजपा के खिलाफ एक बड़ी और मजबूत राष्ट्रीय लड़ाई लड़नी है, तो सहयोगियों की पीठ में छुरा घोंपने वाली कांग्रेस की यह आत्मघाती रणनीति किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हो सकती।

राहुल गांधी की सफाई और ममता बनर्जी की नसीहत: 'एक-दूसरे पर कीचड़ उछालना बंद करो'

बैठक में जब माकपा के राज्यसभा सदस्यों और डी. राजा ने राहुल गांधी के पुराने बयानों को लेकर उन्हें चारों तरफ से घेरा, तो राहुल गांधी ने बीच-बचाव करते हुए अपनी सफाई पेश की। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा कि केरल में जो भी आरोप-प्रत्यारोप हुए, वे दरअसल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की स्थानीय चुनावी रणनीति का हिस्सा थे, इसे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने दखल देते हुए सभी दलों को एक कड़ा सबक दिया। ममता बनर्जी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर 2029 में भाजपा का मुकाबला करना है, तो गठबंधन के सभी घटक दलों को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर एक-दूसरे की सार्वजनिक आलोचना करने से पूरी तरह बचना होगा, तभी यह मोर्चा आगे बढ़ पाएगा।

 

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