दिलजीत के शो पर थी पन्नू की बुरी नजर? SFJ नेटवर्क का खुलासा, खालिस्तानी नारे लिखने वाले 3 अरेस्ट
देश और दुनिया में अपनी सुरीली आवाज और धमाकेदार स्टेज परफॉर्मेंस से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले मशहूर पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ इस समय अपनी कला के साथ-साथ एक बेहद खतरनाक और देशविरोधी साजिश के केंद्र में आ गए हैं। अपनी गायकी से पूरी दुनिया में भारत का डंका बजाने वाले दिलजीत के कॉन्सर्ट्स और लाइव शोज को लेकर प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'सिख्स फॉर जस्टिस' (SFJ) और उसके सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू की बुरी नजर होने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। भारत विरोधी गतिविधियों और खालिस्तानी प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए कुख्यात इस आतंकी नेटवर्क ने दिलजीत के कार्यक्रमों के दौरान देश की शांति व्यवस्था को भंग करने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का घिनौना षड्यंत्र रचा था। हालांकि, सतर्क भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और दिल्ली पुलिस ने समय रहते इस बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है और मेट्रो स्टेशनों व सार्वजनिक दीवारों पर खालिस्तानी नारे लिखने वाले 3 शातिर आरोपियों को धर दबोचा है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से एक बार फिर यह साबित हो गया है कि किस प्रकार विदेशी बैठे देशविरोधी तत्व अपनी नापाक हरकतों के जरिए देश के युवाओं और लोकप्रिय कलाकारों के कार्यक्रमों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
दिलजीत दोसांझ का संगीत आज की युवा पीढ़ी के बीच बेहद लोकप्रिय है और उनके लाइव कॉन्सर्ट्स में भारी संख्या में भीड़ जुटती है। पन्नू जैसे भारत विरोधी आतंकवादी हमेशा से ऐसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों की ताक में रहते हैं जहां वे अपनी प्रोपेगेंडा की रोटियां सेक सकें और दुनिया का ध्यान खींचने के लिए सनसनी फैला सकें। हाल ही में जब दिलजीत के शो से जुड़ी कुछ जगहों पर खालिस्तानी समर्थन वाले और देशविरोधी आपत्तिजनक नारे लिखे हुए पाए गए, तो सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए। पुलिस ने बिना किसी देरी के तुरंत एक्शन लेते हुए तकनीकी सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और खुफिया तंत्र की मदद से उन गुर्गों की पहचान कर ली जिन्हें पाकिस्तान और विदेशों से फंडिंग के जरिए यह गंदा काम सौंपा गया था। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस पूरे मामले के पीछे एसएफजे (SFJ) का क्या जाल था और पुलिस ने किस तरह इस खतरनाक मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है।
गुरपतवंत सिंह पन्नू का पुराना पैंतरा और लोकप्रिय कलाकारों को निशाना बनाने की साजिश
खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू हमेशा से अपनी वीडियो धमकियों और ओछी हरकतों के लिए जाना जाता है। जब भी भारत में कोई बड़ा सांस्कृतिक, खेल या राष्ट्रीय आयोजन होता है, तो यह आतंकी हमेशा अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और डर का माहौल पैदा करने के लिए झूठे दावे और धमकियां जारी करता है। दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रमों को लेकर भी इस आतंकी ने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भड़काने और देश के खिलाफ उकसाने की कई नापाक कोशिशें की थीं। पन्नू का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि वह मशहूर हस्तियों के नाम का इस्तेमाल करके अपनी प्रतिबंधित विचारधारा को सुर्खियों में ला सके।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पन्नू और उसके आकाओं को यह अच्छी तरह पता है कि दिलजीत दोसांझ की फैन फॉलोइंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत बड़ी है। ऐसे में यदि उनके कार्यक्रमों से जुड़ी जगहों पर अशांति फैलाई जाए या खालिस्तानी प्रोपेगेंडा चलाया जाए, तो दुनिया भर की मीडिया का ध्यान आसानी से खींचा जा सकता है। लेकिन पन्नू की यह ओछी चाल एक बार फिर धरी की धरी रह गई क्योंकि भारतीय खुफिया एजेंसियों ने उसके इस स्लीपर सेल नेटवर्क को जमीन पर उतरने से पहले ही कुचल दिया। दिलजीत के चाहने वालों और देश के आम नागरिकों ने भी इन देशविरोधी ताकतों की एक स्वर में निंदा की है और यह साफ कर दिया है कि भारत का युवा ऐसे बहकावे में आने वाला नहीं है।
दिल्ली पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई: मेट्रो स्टेशनों और दीवारों पर नारे लिखने वाले 3 गिरफ्तार
इस पूरे षड्यंत्र की परतें तब खुलीं जब राजधानी दिल्ली के कुछ प्रमुख मेट्रो स्टेशनों और सार्वजनिक दीवारों पर अचानक खालिस्तानी समर्थन में देशविरोधी और आपत्तिजनक नारे लिखे हुए दिखाई दिए। इन नारों के जरिए समाज में नफरत फैलाने और आगामी आयोजनों में बाधा डालने की कोशिश की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और स्थानीय खुफिया इकाइयों ने तुरंत एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया। पुलिस ने मौके के आसपास लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) का विश्लेषण किया, जिससे इन अपराधियों का सुराग मिल गया।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस देशविरोधी कृत्य को अंजाम देने वाले 3 मुख्य आरोपियों को दबोच लिया है। पूछताछ के दौरान इन आरोपियों ने जो खुलासे किए हैं, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इन युवकों को विदेशों से बैठे खालिस्तानी आकाओं द्वारा ऑनलाइन माध्यमों से पैसे (क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के जरिए) ट्रांसफर किए गए थे। इन्हें यह टास्क दिया गया था कि वे रात के अंधेरे में सार्वजनिक स्थानों पर खालिस्तानी नारे लिखें, उसके वीडियो बनाएं और उसे एसएफजे के हैंडलर्स को भेजें ताकि वे इसे मीडिया में फैलाकर यह दिखा सकें कि भारत के भीतर उनका भारी समर्थन मौजूद है। पुलिस अब इन गिरफ्तार आरोपियों के बाकी साथियों और फंडिग के सोर्स की गहराई से छानबीन कर रही है।
कलाकारों और खेल आयोजनों पर मंडराते खतरे और सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर
हाल के वर्षों में यह देखा गया है कि खालिस्तानी चरमपंथी और विदेशी एजेंसियां भारत की आंतरिक शांति को खंडित करने के लिए लगातार ऐसे नापाक हथकंडे अपना रही हैं। वे कभी किसानों के नाम पर, कभी धार्मिक भावनाओं को भड़काकर और कभी बड़े कलाकारों के आयोजनों को विवादों में घसीटकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश करते हैं। हालांकि, भारत सरकार और सुरक्षा बल ऐसे हर एक खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद और सक्षम हैं। दिलजीत दोसांझ के मामले में भी पुलिस और खुफिया तंत्र ने जिस तत्परता का परिचय दिया है, वह इस बात का सबूत है कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
इस घटना के बाद देश भर के विभिन्न राज्यों में होने वाले बड़े सांस्कृतिक और सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद कर दिया गया है। आयोजकों और स्थानीय पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखें ताकि कोई भी बाहरी ताकत देश के माहौल को बिगाड़ने में सफल न हो सके। आम जनता के बीच भी इस बात को लेकर काफी जागरूकता बढ़ रही है और लोग खुद आगे आकर ऐसे देशविरोधी तत्वों की सूचना तुरंत पुलिस को दे रहे हैं, जो एक स्वस्थ और मजबूत लोकतंत्र की निशानी है।
निष्कर्ष: देश की एकता के आगे फेल हुए आतंकवादियों के सभी मंसूबड़े
दिलजीत दोसांझ के शो पर मंडराए इस खालिस्तानी साये और एसएफजे नेटवर्क के पर्दाफाश ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत के खिलाफ रची जाने वाली हर साजिश का अंत असफलता ही है। पन्नू और उसके जैसे अन्य आतंकवादी चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, वे देश की एकता, अखंडता और भाईचारे की नींव को हिला नहीं सकते। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी ने यह दिखा दिया है कि कानून का हाथ बहुत लंबा होता है और देश की सुरक्षा एजेंसियों की बाज जैसी नजरों से कोई भी अपराधी बच नहीं सकता। दिलजीत के प्रशंसक और देश की जनता इस प्रकार की हरकतों का डटकर मुकाबला करने के लिए तैयार है, और यह घटना देशविरोधी ताकतों के मुंह पर एक करारा तमाचा साबित हुई है।