कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी, जिन्होंने ममता की TMC को दो गुटों में बांटकर अभिषेक बनर्जी का पत्ता साफ किया

कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी, जिन्होंने ममता की TMC को दो गुटों में बांटकर अभिषेक बनर्जी का पत्ता साफ किया

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त भूचाल आ गया है और एक ऐसा ऐतिहासिक तख्तापलट देखने को मिला है जिसने राजनीतिक पंडितों को भी हैरान कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित किए गए फायरब्रांड विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक गुप्त मुलाकात के बाद बंगाल की सत्ताधारी पार्टी को दो गुटों में बांट दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि टीएमसी के एक बहुत बड़े धड़े ने ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में अपना असली नेता और नेता प्रतिपक्ष स्वीकार कर लिया है, जबकि ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी माने जाने वाले उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को पूरी तरह किनारे (आउट) कर दिया गया है। ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि वे आज भी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ही अपनी पार्टी का असली सलाहकार और मार्गदर्शक मानते हैं, लेकिन वर्तमान नेतृत्व के तौर-तरीकों से नाराज होकर उन्हें यह बड़ा कदम उठाना पड़ा।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर, कभी सीताराम येचुरी के बेहद खास हुआ करते थे ऋतब्रत

बंगाल की सियासत में अचानक महानायक बनकर उभरे ऋतब्रत बनर्जी का राजनीतिक इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। दिवंगत दिग्गज वामपंथी नेता सीताराम येचुरी के बेहद करीबी माने जाने वाले ऋतब्रत बनर्जी ने अपने सफर की शुरुआत साल 2000 के आसपास वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई (SFI) से की थी। अपनी प्रखर वक्तृत्व शैली के दम पर वे बहुत जल्द SFI के राष्ट्रीय महासचिव बन गए। उनकी राजनीतिक प्रतिभा को देखते हुए वामपंथी मोर्चे ने उन्हें महज 34 साल की उम्र में राज्यसभा भेज दिया था। हालांकि, सफलता की सीढ़ियां जितनी तेजी से उन्होंने चढ़ीं, उतनी ही तेजी से साल 2017 में अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत सीपीएम (CPM) ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

सीपीएम से बाहर होने के बाद टीएमसी में बनाई जगह, उलुबेरिया पूर्व से जीता चुनाव

सीपीएम से निकाले जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था। टीएमसी ने उनकी संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए उन्हें अपनी पार्टी के सबसे महत्वपूर्ण ट्रेड यूनियन विंग (INTTUC) का प्रदेश प्रमुख बना दिया। इसके बाद साल 2024 में जब पूर्व सांसद जवाहर सरकार ने राज्यसभा से इस्तीफा दिया, तो टीएमसी ने ऋतब्रत बनर्जी को दोबारा संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में भेजा। हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने उलुबेरिया पूर्व विधानसभा सीट से बंपर वोटों से जीत दर्ज की थी। लेकिन हाल ही में पार्टी के भीतर उनके खिलाफ एक हस्ताक्षर फ्रॉड का मुद्दा उठाया गया, जिसकी जांच अभी चल रही है, और इसी विवाद के बीच उन्होंने बगावत का बिगुल फूंक दिया।

विधानसभा अध्यक्ष ने दी मान्यता: 58 बागी विधायकों के साथ ऋतब्रत बने 'असली टीएमसी'

इस पूरे सियासी ड्रामे में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ बोस ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। स्पीकर ने टीएमसी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 58 विधायकों के समूह को विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल (असली टीएमसी) के रूप में आधिकारिक मान्यता दे दी है। बीते बुधवार को ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में इन 58 विधायकों ने स्पीकर से मुलाकात कर अपना समर्थन पत्र सौंपा था और दावा किया था कि वही असली तृणमूल कांग्रेस हैं। इन सभी बागी विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा मध्य कोलकाता में आयोजित किए गए धरने का पूरी तरह से बहिष्कार किया था।

नए गुट ने चुनी अपनी नई कोर कमेटी, जावेद और संदीपन को मिली बड़ी जिम्मेदारी

अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को धूल चटाते हुए ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले इस नए और शक्तिशाली टीएमसी गुट ने विधानसभा परिसर में एक आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में सर्वसम्मति से नई टीम का गठन किया गया, जिसके तहत जावेद खान, संदीपन साहा और शिउली साहा को सदन में पार्टी का उप-नेता चुना गया है। इसके अलावा, विधायक अखरुज्जमान को पार्टी का नया मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नियुक्त किया गया है। ऋतब्रत बनर्जी की इस ऐतिहासिक बगावत और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ बढ़ती नजदीकियों ने बंगाल में ममता और अभिषेक बनर्जी के एकछत्र राज को हिलाकर रख दिया है।

 

 

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