कौन हैं झारखंड के शिखर मोहन? रणजी और दलीप ट्रॉफी में बल्ले से मचाया धमाल, अब इंडिया A टीम में मिला मौका
भारतीय घरेलू क्रिकेट का ढांचा हमेशा से ऐसी अनमोल प्रतिभाओं की खान रहा है, जो अपनी निरंतर मेहनत, अनुशासन और रनों की भूख से चयनकर्ताओं के दरवाजे खटखटाती रहती हैं। जब-जब चयनकर्ताओं ने प्रतिभा और आंकड़े को तवज्जो दी है, तब-तब किसी न किसी युवा खिलाड़ी का सितारा चमकता हुआ नजर आया है। इसी कड़ी में झारखंड के एक और युवा और आक्रामक सलामी बल्लेबाज शिखर मोहन (Shikhar Mohan) का नाम क्रिकेट गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन चुका है। हाल ही में समाप्त हुए घरेलू सीजन में रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी (Duleep Trophy) में अपने बल्ले से रनों का अंबार लगाने वाले इस युवा खिलाड़ी को बीसीसीआई (BCCI) की चयन समिति ने उनकी मेहनत का सबसे बड़ा इनाम देते हुए इंडिया 'ए' (India A) टीम में शामिल कर लिया है। पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, ईशान किशन और सौरभ तिवारी जैसे दिग्गजों की धरती झारखंड से निकलकर भारतीय क्रिकेट के शीर्ष गलियारे तक पहुंचे शिखर मोहन का यह सफर न केवल बेहद प्रेरणादायक है, बल्कि यह इस बात का सबूत भी है कि अगर आपके खेल में निरंतरता है, तो आपको अपनी पहचान बनाने से कोई नहीं रोक सकता। इस खबर के सामने आते ही झारखंड के क्रिकेट संघ (JSCA) और स्थानीय खेल प्रेमियों में जश्न का माहौल देखा जा रहा है।
बोकारो की गलियों से निकलकर क्रिकेट पिच तक पहुंचने का संघर्ष भरा सफर
झारखंड के औद्योगिक शहर बोकारो में जन्मे शिखर मोहन का बचपन से ही क्रिकेट के प्रति जुनून देखते ही बनता था। जब उन्होंने पहली बार हाथ में बल्ला थामा था, तभी उनके स्थानीय कोचों को यह अहसास हो गया था कि इस लड़के के पास गेंदों को सही से टाइम करने और दबाव में शांत रहने की अद्भुत क्षमता है। सीमित संसाधनों और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच शिखर ने अपनी तकनीक और फिटनेस पर दिन-रात मेहनत की। झारखंड के विभिन्न आयु-वर्ग के टूर्नामेंटों में अंडर-16 और अंडर-19 के स्तर पर लगातार शतक ठोक कर उन्होंने अपनी राज्य टीम का ध्यान खींचा। जब उन्हें पहली बार झारखंड की रणजी टीम की लाल जर्सी और टोपी मिली, तो उन्होंने इस मौके को दोनों हाथों से लपका और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक युवा ओपनर के तौर पर नई लाल गेंद की स्विंग का सामना करना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए सबसे कठिन काम माना जाता है, लेकिन शिखर मोहन ने अपनी ठोस रक्षात्मक तकनीक और खूबसूरत कवर ड्राइव्स से सभी दिग्गजों को हैरान कर दिया।
रणजी और दलीप ट्रॉफी में बल्ले से मचाया तहलका, आंकड़ों ने खोला इंडिया 'ए' का दरवाजा
शिखर मोहन के इंडिया 'ए' टीम में चुने जाने की सबसे बड़ी वजह प्रथम श्रेणी क्रिकेट (First-Class Cricket) में उनका हालिया धमाकेदार प्रदर्शन रहा है। इस रणजी ट्रॉफी सीजन में उन्होंने अपनी टीम झारखंड के लिए कई मैच-जिताऊ पारियां खेलीं। जब विरोधी टीमों के अनुभवी तेज गेंदबाज हावी हो रहे थे, तब शिखर ने क्रीज पर खूंटा गाड़कर धैर्य और आक्रामकता का सही संतुलन दिखाया। रणजी में कई शतक और दोहरे शतकों के करीब पहुंचने वाली पारियों के बल पर उन्हें दलीप ट्रॉफी के लिए भी चुना गया। दलीप ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित और कठिन टूर्नामेंट में, जहां भारत के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी मैदान में होते हैं, वहां शिखर मोहन ने लाल गेंद के खिलाफ लगातार रन बनाकर अपनी मानसिक मजबूती का लोहा मनवाया। चयनकर्ताओं के लिए उनके इन आंकड़ों को नजरअंदाज करना असंभव था, क्योंकि आधुनिक क्रिकेट में सलामी बल्लेबाज के रूप में ऐसी क्लास और निरंतरता बहुत कम खिलाड़ियों में देखने को मिलती है।
लंबी पारियां खेलने की तकनीक और आक्रामक मिजाज का अनोखा संगम
एक बेहतरीन सलामी बल्लेबाज की खूबी यह होती है कि वह केवल अपनी पारी की शुरुआत ही अच्छी न करे, बल्कि उस शुरुआत को एक बड़े शतक में तब्दील करना भी जानता हो। शिखर मोहन की बल्लेबाजी में यही खूबी सबसे ज्यादा निखर कर सामने आती है। वे क्रीज पर आकर गेंदबाजों का मूड भांपते हैं, शुरुआत में नई गेंद की धार को कुंद करते हैं और जैसे ही गेंद थोड़ी पुरानी होती है, मैदान के चारों तरफ बड़े और कलात्मक शॉट्स खेलने लगते हैं। स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उनका फुटवर्क और कदमों का इस्तेमाल बेहद सटीक है, जो उन्हें किसी भी प्रकार की पिच पर एक सफल बल्लेबाज बनाता है। खेल विश्लेषकों का मानना है कि शिखर की बल्लेबाजी शैली आधुनिक क्रिकेट की जरूरतों के बिल्कुल अनुकूल है, जहां एक बल्लेबाज को ठोस तकनीक के साथ-साथ रन गति को तेज बनाए रखने की भी क्षमता चाहिए होती है। उनकी इसी काबिलियत को देखते हुए मुख्य कोच और चयनकर्ताओं ने उन्हें इंडिया 'ए' के दौरे और आगामी अंतरराष्ट्रीय सीरीज के लिए सबसे उपयुक्त दावेदार माना है।
झारखंड क्रिकेट के नए युग की शुरुआत और राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का अगला कदम
महेंद्र सिंह धोनी के अंतरराष्ट्रीय संन्यास के बाद झारखंड क्रिकेट संघ हमेशा इस बात के प्रयास में लगा रहता है कि उनकी नर्सरी से ऐसे युवा खिलाड़ी निकलें जो सीधे राष्ट्रीय टीम यानी 'टीम इंडिया' की सीनियर जर्सी पहन सकें। ईशान किशन के बाद शिखर मोहन का यह उभार इस बात का स्पष्ट संकेत है कि झारखंड में क्रिकेट का ढांचा बेहद मजबूत और पारदर्शी हो चुका है। इंडिया 'ए' टीम में शामिल होना किसी भी खिलाड़ी के लिए सीनियर राष्ट्रीय टीम का दरवाजा खटखटाने जैसा होता है। अब शिखर मोहन के सामने ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या दक्षिण अफ्रीका 'ए' जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती होगी। यदि वे इंडिया 'ए' के लिए अपने इस शानदार प्रदर्शन को दोहराने में सफल रहते हैं, तो बहुत जल्द क्रिकेट फैंस उन्हें भारत की मुख्य टेस्ट या वनडे टीम में सलामी बल्लेबाजी करते हुए देख सकेंगे। पूरे झारखंड को अपने इस होनहार और युवा सितारे पर गर्व है, और हर कोई यही दुआ कर रहा है कि उनका यह विजयी सफर ऐसे ही आगे बढ़ता रहे।