आप सो रहे थे और अचानक सोनम वांगचुक से मिलने पहुंचे जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह; क्या हुई बड़ी बातचीत?
लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के मोर्चे से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब देश की राजनीति के गलियारों में एक बड़ा घटनाक्रम घटित हुआ। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह अचानक दिल्ली में सोनम वांगचुक से मुलाकात करने पहुंचे। इस औचक और हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद से ही लद्दाख आंदोलन के भविष्य और सरकार के रुख को लेकर कयासों का बाजार गर्म हो गया है।
आधी रात को लद्दाख भवन पहुंचे दोनों बड़े नेता, मच गई हलचल
लद्दाख की मांगों को लेकर दिल्ली के लद्दाख भवन या निर्धारित धरना स्थल पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे सोनम वांगचुक और उनके सहयोगियों को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि सरकार के इतने शीर्ष प्रतिनिधि उनसे सीधे संवाद करने पहुंचेंगे। जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की गाड़ियों का काफिला जैसे ही धरना स्थल पर पहुंचा, वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और कार्यकर्ताओं में हलचल मच गई। सूत्रों के मुताबिक, यह मुलाकात पूरी तरह से गैर-आधिकारिक और सौहार्दपूर्ण माहौल में आयोजित की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य लद्दाख के मौजूदा गतिरोध को बातचीत के जरिए सुलझाना था।
बंद कमरे में लद्दाख के मुद्दों पर हुई गहन चर्चा
सोनम वांगचुक और दोनों केंद्रीय नेताओं के बीच बंद कमरे में काफी देर तक बातचीत चली। इस मुलाकात के दौरान सोनम वांगचुक ने लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी (Ecology), ग्लेशियरों के पिघलने की समस्या, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और लद्दाख की लोकतांत्रिक भागीदारी जैसे संवेदनशील मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने जेपी नड्डा को लद्दाख के लोगों की उन चिंताओं से अवगत कराया, जिसके कारण उन्हें कड़कड़ाती ठंड और विपरीत परिस्थितियों में भी सड़कों पर उतरना पड़ा है। वांगचुक ने साफ किया कि लद्दाख के लोग केवल अपने संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा चाहते हैं।
केंद्र सरकार का रुख: गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय कमेटी का आश्वासन
मुलाकात के बाद बाहर आए सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार का पक्ष रखते हुए सोनम वांगचुक को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार लद्दाख के विकास और वहां की संस्कृति की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति (High-Level Committee) के माध्यम से लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ जल्द ही एक और दौर की औपचारिक वार्ता शुरू करने का आश्वासन दिया गया है। जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लद्दाख के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और हर समस्या का समाधान बातचीत की मेज पर ही निकलेगा।
क्या खत्म होगा आंदोलन? सोनम वांगचुक का अगला कदम
इस अहम मुलाकात के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लद्दाख और केंद्र सरकार के बीच पिछले कई महीनों से चली आ रही तनातनी अब खत्म हो सकती है। हालांकि, सोनम वांगचुक या उनकी कोर कमेटी ने अभी तक आंदोलन को पूरी तरह वापस लेने का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। वांगचुक ने कहा है कि वह सरकार के प्रस्तावों पर लद्दाख के अन्य नेताओं और जनता के साथ चर्चा करेंगे। बहरहाल, आधी रात को हुई जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की इस पहल ने यह साफ कर दिया है कि सरकार अब लद्दाख के मुद्दे को ज्यादा लंबा खींचने के मूड में नहीं है।