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Up kiran,Digital Desk : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और निर्णायक चरण के मतदान (29 अप्रैल) के दौरान राज्य के गलियारों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की सक्रियता ने राजनीतिक और सुरक्षा गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। चुनाव आयोग (ECI) ने एक अभूतपूर्व फैसला लेते हुए उन सात जिलों में एनआईए की टीमों को तैनात किया है, जहाँ आज वोट डाले जा रहे हैं। यह कदम विशेष रूप से बम विस्फोटों की आशंका और मतदाताओं के मन से डर निकालने के लिए उठाया गया है।

एनआईए की तैनाती: कहाँ और क्यों?

चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, एनआईए की टीमें स्वतंत्र रूप से उन क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं जहाँ चुनावी हिंसा का पुराना इतिहास रहा है। विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर कड़ी नजर रखी जा रही है:

अति-संवेदनशील इलाके: भांगड़, डायमंड हार्बर, बरुईपुर, नदिया और हुगली।

पुलिस कमिश्नरेट: बैरकपुर, कस्बा और बिष्णुपुर।

विशेष अधिकार: एनआईए को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि तलाशी के दौरान कोई भी विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री मिलती है, तो वे तुरंत नए मामले दर्ज कर जांच शुरू कर सकते हैं।

भांगड़ बम कांड ने बढ़ाई चिंता

एनआईए की इस अचानक सक्रियता के पीछे 26 अप्रैल को दक्षिण 24 परगना के भांगड़ (उत्तर काशीपुर) में हुई भारी मात्रा में देसी बमों की बरामदगी है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनआईए ने इस मामले को अपने हाथ में लिया है। चुनाव आयोग ने बंगाल पुलिस को भी अल्टीमेटम दिया था कि 24 घंटे के भीतर बम बनाने वालों पर कार्रवाई की जाए, अन्यथा उन सभी मामलों की जांच एनआईए को सौंप दी जाएगी।

बंगाल की राजनीति में बम और 'जीरो टॉलरेंस'

पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में 'कच्चे बमों' का इस्तेमाल विरोधियों को डराने का एक पुराना जरिया रहा है। इस बार आयोग ने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। विस्फोटक पदार्थ अधिनियम (Explosive Substances Act) के तहत एनआईए को प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए, पहली बार किसी केंद्रीय एजेंसी को मतदान के दिन जिलों में 'सर्च और सीज' के लिए उतारा गया है।

सियासी संग्राम: "आतंकवाद या चुनावी सुरक्षा?"

एनआईए की एंट्री पर बंगाल में राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है:

TMC का विरोध: तृणमूल कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव ने सवाल उठाया कि क्या बंगाल में कोई आतंकी खतरा है जो आतंकवाद विरोधी एजेंसी (NIA) को बुलाना पड़ा? उन्होंने इसे संघीय ढांचे पर हमला बताया।

BJP का समर्थन: भाजपा ने इस कदम का स्वागत किया है। पार्टी प्रवक्ता देबजीत सरकार का कहना है कि दशकों से चली आ रही संगठित चुनावी हिंसा को रोकने के लिए एनआईए जैसी एजेंसी की सख्ती जरूरी है।

न्यायिक हस्तक्षेप और सुरक्षा चक्र

इस चुनाव में एनआईए का दखल तब और बढ़ गया जब 1 अप्रैल को मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद एनआईए ने जांच की और मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया। अब दूसरे चरण के मतदान के दौरान एनआईए की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि आयोग शांतिपूर्ण और भयमुक्त मतदान के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।