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Up kiran,Digital Desk : कल्याण-डोंबिवली नगर निगम चुनाव के बाद राजनीति में बड़ा मोड़ देखने को मिला है। आमतौर पर विरोधी मानी जाने वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने शिंदे गुट की शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान किया है। यह निर्णय एमएनएस के पूर्व विधायक प्रमोद (राजू) पाटिल ने पार्टी के पांच पार्षदों की ओर से किया। वहीं, शिवसेना के सभी 53 पार्षद नवी मुंबई स्थित कोंकण संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचकर अपने गुट का औपचारिक पंजीकरण करा चुके हैं।

मनसे के पांच पार्षदों ने भी दी सहमति
शिवसेना और एमएनएस दोनों ही पक्षों ने उसी स्थान पर अपनी प्रक्रिया पूरी की। मनसे के पांच पार्षदों के समर्थन से शिवसेना अब नगर निगम में सत्ता की दिशा में एक मजबूत कदम उठा चुकी है। राजनीतिक विश्लेषक इसे नगर निगम की सत्ता संरचना के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम मान रहे हैं।

केडीएमसी चुनाव परिणाम: स्थिति अभी भी नाजुक
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम के 122 सदस्यीय चुनाव में शिंदे गुट की शिवसेना को 53 सीटें, भाजपा को 50, शिवसेना (यूबीटी) को 11, मनसे को 5, कांग्रेस को 2 और एनसीपी (एसपी) को 1 सीट मिली। नगर निगम में बहुमत के लिए 62 सीटें जरूरी हैं। शिवसेना को मनसे का समर्थन मिलने के बाद संख्या 58 तक पहुंच गई है।

यूबीटी गुट से भी संपर्क में शिवसेना
सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (शिंदे गुट) यूबीटी गुट के कुछ पार्षदों से भी संपर्क में है। अगर इनमें से कुछ का समर्थन मिलता है, तो शिवसेना बहुमत के करीब पहुंच सकती है। कल्याण लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की और कहा कि मनसे ने शहर के विकास को ध्यान में रखते हुए शिवसेना को समर्थन दिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिवसेना और भाजपा ने नगर निगम चुनाव महा-युति के तहत मिलकर लड़ा था।

मेयर पद को लेकर अभी भी अनिश्चितता
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में मेयर पद को लेकर अटकलें तेज हैं। भाजपा की ओर से ढाई-ढाई साल के कार्यकाल की मांग की जा रही है। श्रीकांत शिंदे ने कहा कि मेयर महायुति गठबंधन से ही होगा और इस पर अंतिम निर्णय उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण मिलकर लेंगे।

शिवसेना का अब फोकस यह है कि वह या तो अकेले बहुमत में आए या गठबंधन के जरिए अपनी मोलभाव की स्थिति मजबूत करे।