पंजाब की सियासत में महा-भूकंप! 6 साल बाद फिर साथ आ रहे हैं BJP और अकाली दल, सुखबीर बादल का बड़ा संकेत
पंजाब में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सूबे के सियासी गलियारों में बहुत बड़ी हलचल शुरू हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए (NDA) में दोबारा शामिल हो सकती है। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात के बाद पत्रकारों से रूबरू हुए पूर्व उप-मुख्यमंत्री ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और विपक्षी कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें पंजाब का 'मुख्य सियासी दुश्मन' करार दिया।
बीजेपी का सीधा नाम लिए बिना बादल ने सधे हुए अंदाज में कहा कि पंजाब के व्यापक हित और खुशहाली के लिए उनकी पार्टी एक जैसी सोच रखने वाले सभी राजनीतिक दलों के साथ हाथ मिलाने को पूरी तरह तैयार है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, अगस्त महीने में सुखबीर बादल की दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई अहम मुलाकात के बाद से ही दोनों पुराने साथियों के फिर से करीब आने की अटकलें लगातार तेज थीं।
गौरतलब है कि भाजपा और अकाली दल का गठबंधन दशकों पुराना और बेहद मजबूत माना जाता था, लेकिन तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में भारी किसान आंदोलन के चलते सितंबर 2020 में अकाली दल ने एनडीए से अपनी राहें अलग कर ली थीं। हालांकि बाद में केंद्र सरकार ने तीनों कानूनों को वापस ले लिया था, फिर भी दोनों दल साथ नहीं आ सके। इसका सीधा खामियाजा दोनों को भुगतना पड़ा; 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में अलग-अलग लड़ते हुए भाजपा महज 2 सीटों पर सिमट गई, जबकि अकाली दल को अपने चुनावी इतिहास के सबसे बुरे दौर का सामना करते हुए सिर्फ 3 सीटें ही नसीब हुईं। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी दोनों ने अकेले दांव आजमाया, जहां अकाली दल सिर्फ बठिंडा की इकलौती सीट बचा सका और भाजपा का पंजाब में खाता तक नहीं खुल पाया। जमीनी हकीकत को देखते हुए अब दोनों दलों के कैडर में फिर से पुराने गठबंधन को जिंदा करने की छटपटाहट साफ दिखने लगी है।
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से हुई इस उच्चस्तरीय बैठक के प्रशासनिक मुद्दों पर बात करते हुए सुखबीर सिंह बादल ने बताया कि यह मुलाकात नशा विरोधी सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के गंभीर मामले को लेकर थी। अकाली दल प्रमुख ने राज्यपाल के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें मुख्यमंत्री भगवंत मान को पद से हटाने और नशे के अवैध कारोबार को संरक्षण देने वाले सत्ताधारी मंत्रियों, विधायकों व भ्रष्ट नौकरशाहों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शामिल है। बादल ने सोशल मीडिया पर मांग उठाते हुए कहा कि नशा विरोधी योद्धा की विधवा बीबी मनप्रीत कौर को क्लास-1 की सरकारी नौकरी और मानवीय आधार पर 2 करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने मामले की सीबीआई जांच का दायरा बढ़ाते हुए तूर बंजारा (दिरबा) के गुलजार सिंह, जिन्होंने दम तोड़ने से पहले वित्त मंत्री हरपाल चीमा का नाम लिया था, और श्री हरगोबिंदपुर साहिब के बिक्रमजीत सिंह की हत्या के मामलों को भी इसमें शामिल करने की पुरजोर मांग की है।