पंजाब के 50 नगर निकाय वार्डों के चुनाव रद्द, जानें वजह

पंजाब के 50 नगर निकाय वार्डों के चुनाव रद्द, जानें वजह

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब की स्थानीय राजनीति में चुनावी शुचिता और लोकतंत्र की मर्यादा को लेकर एक नजीर पेश करने वाला सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने पंजाब के पटियाला और मोगा जिलों के कुल 50 नगर निकाय वार्डों में संपन्न हुए चुनावों को पूरी तरह निरस्त करते हुए नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश जारी कर दिया है। यह फैसला नामांकन प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा, पर्चा छीने जाने और प्रशासनिक धांधली की आधिकारिक पुष्टि के बाद आया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ ने साफ किया कि चुनावी प्रक्रिया में ऐसी अराजकता कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

यह पूरा मामला 21 दिसंबर 2024 को पंजाब में हुए स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ा है। उस दौरान विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने में गंभीर बाधाएं उत्पन्न की गई थीं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए 24 मार्च 2025 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया गया था। आयोग ने लंबी पड़ताल के बाद 18 नवंबर 2025 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंपी थी, जिसके आधार पर अब पीठ ने अपना कड़ा रुख अख्तियार किया है।

सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि आयोग की जांच से यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि नामांकन के दौरान सुनियोजित तरीके से बाधा डाली गई। कई स्थानों पर उम्मीदवारों से उनके नामांकन पत्र जबरन छीने गए, फाड़कर नष्ट किए गए, प्रत्याशियों पर जानलेवा हमले हुए और उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखकर या डरा-धमकाकर पर्चा भरने से रोका गया। इस तरह के माहौल में हुआ चुनाव किसी भी सूरत में वैध नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए पटियाला के 28 वार्ड और मोगा के 22 वार्ड के नतीजों को तुरंत प्रभाव से खारिज कर दिया।

अदालत ने राज्य निर्वाचन तंत्र को आदेश दिया है कि इन सभी 50 वार्डों में नए सिरे से चुनावी प्रक्रिया शुरू की जाए और इसे हर हाल में 6 सप्ताह के भीतर मुकम्मल किया जाए। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को अवगत कराया कि सरकार को आयोग की सिफारिशों पर कोई आपत्ति नहीं है। इसके साथ ही पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से आग्रह किया है कि वे दोबारा होने वाली चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कम से कम दो से तीन वरिष्ठ सदस्यों को पर्यवेक्षक नियुक्त करें।

शीर्ष अदालत ने इस बार सुरक्षा और निगरानी के बेहद कड़े प्रोटोकॉल तय किए हैं। पीठ ने निर्देश दिया है कि पर्चा दाखिला, नामांकन पत्रों की जांच, चुनाव चिह्न आवंटन और मतदान के दिन तक की हर गतिविधि की अनिवार्य रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी। यह पूरी रिकॉर्डिंग नियुक्त पर्यवेक्षकों की सीधी निगरानी में होगी और फुटेज को सुरक्षित रखकर निगरानी समिति को सौंपा जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की धांधली की गुंजाइश न रहे।