चंडीगढ़ में किसानों का भारी बवाल: बीजेपी दफ्तर का घेराव करने बढ़े सैकड़ों प्रदर्शनकारी, पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोका
केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ (Chandigarh) की सड़कों पर आज एक बार फिर किसानों के भारी विरोध प्रदर्शन के चलते जबर्दस्त तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। अपनी विभिन्न लंबित मांगों और हालिया कृषि नीतियों के विरोध में सैकड़ों की संख्या में किसान एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश कार्यालय का घेराव करने के लिए आगे बढ़े। आंदोलनकारी किसानों के इस आक्रामक मार्च को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए बीजेपी दफ्तर से काफी पहले ही भारी-भरकम बैरिकेड्स (Barricades) लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जिसके बाद पुलिस और किसानों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की देखने को मिली।
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ चंडीगढ़ की सीमा में दाखिल हुए किसान, सुरक्षा बल मुस्तैद
विभिन्न किसान यूनियनों के आह्वान पर पंजाब और हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों से बड़ी संख्या में किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और झंडों के साथ चंडीगढ़ में दाखिल हुए। किसानों का इरादा सीधे भाजपा मुख्यालय पहुंचकर वहां धरना देने का था। खुफिया इनपुट मिलते ही चंडीगढ़ पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया था। रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और दंगा नियंत्रण वाहनों को संवेदनशील चौराहों पर तैनात कर दिया गया था। जैसे ही किसानों का जत्था मुख्य मार्ग से होते हुए आगे बढ़ा, पुलिस ने त्रि-स्तरीय (Three-layer) सुरक्षा घेरा बनाकर उन्हें आगे बढ़ने से पूरी तरह रोक दिया।
बैरिकेड्स पर चढ़े प्रदर्शनकारी, पुलिस ने दी वाटर कैनन के इस्तेमाल की चेतावनी
सड़कों पर भारी टकराव: पुलिस द्वारा रोके जाने से नाराज किसान वहीं सड़क पर बैठ गए और केंद्र सरकार व भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब कुछ उत्तेजित प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के बैरिकेड्स को लांघने और उन्हें तोड़ने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की और साफ चेतावनी दी कि यदि कानून व्यवस्था को हाथ में लेने की कोशिश की गई, तो भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन (Water Cannon) और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
चंडीगढ़ के कई रूट डाइवर्ट, घंटों लगा रहा भीषण ट्रैफिक जाम
इस बड़े किसान आंदोलन के कारण चंडीगढ़ के मध्य और सीमावर्ती मार्गों पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। बीजेपी कार्यालय की ओर जाने वाली सभी प्रमुख सड़कों को आम जनता के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों को परेशानी से बचाने के लिए कई रूट डाइवर्ट किए हैं, लेकिन इसके बावजूद पंचकुला, मोहाली और चंडीगढ़ को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों पर कई किलोमीटर लंबा भीषण जाम लग गया है। दफ्तर जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों को इस जाम के कारण घंटों जूझना पड़ रहा है।
मांगें पूरी होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं किसान संगठन
किसान नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए साफ कर दिया है कि यह प्रदर्शन केवल एक शुरुआत है। उनकी मुख्य मांगों में फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी और पिछले आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए मुकदमों को पूरी तरह वापस लेना शामिल है। किसान संगठनों का आरोप है कि सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है, इसलिए वे अब सीधे सत्तारूढ़ दल के कार्यालयों का घेराव कर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। जब तक उनकी बात उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचती और कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे चंडीगढ़ की सड़कों से पीछे नहीं हटेंगे।