IPS गौरव यादव बने पंजाब के नए डीजीपी: शरद सत्य चौहान और हरप्रीत सिंह सिद्धू हुए दरकिनार

IPS गौरव यादव बने पंजाब के नए डीजीपी: शरद सत्य चौहान और हरप्रीत सिंह सिद्धू हुए दरकिनार

पंजाब की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Mann) की सरकार ने राज्य में पुलिस प्रशासन की कमान को नए सिरे से दुरुस्त करते हुए एक बहुत बड़ा फेरबदल किया है। वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी गौरव यादव (Gaurav Yadav) को एक बार फिर पंजाब पुलिस का नया पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त कर दिया गया है। इस नियुक्ति के साथ ही राज्य के दो अन्य बेहद वरिष्ठ और कद्दावर आईपीएस अधिकारी शरद सत्य चौहान (Sharad Satya Chauhan) और हरप्रीत सिंह सिद्धू (Harpreet Singh Sidhu) को दौड़ से दरकिनार कर दिया गया है। आम आदमी पार्टी सरकार के इस हाई-प्रोफाइल प्रशासनिक फेरबदल के बाद से पंजाब के राजनीतिक और पुलिस गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है, क्योंकि आने वाले समय में राज्य की सुरक्षा चुनौतियों और संगठित अपराधों से निपटने के लिए सरकार ने पूरी तरह से अपने सबसे भरोसेमंद चेहरे पर दांव खेला है।

आखिर क्यों दरकिनार किए गए शरद सत्य चौहान और हरप्रीत सिंह सिद्धू, क्या है इस बड़े फेरबदल के पीछे की सियासी और प्रशासनिक वजह?

पंजाब पुलिस में डीजीपी पद की दौड़ में कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम लंबे समय से चर्चा में चल रहे थे, जिनमें शरद सत्य चौहान और हरप्रीत सिंह सिद्धू का नाम सबसे आगे माना जा रहा था। अपनी ईमानदारी, बेदाग छवि और कड़क प्रशासनिक पकड़ के लिए जाने जाने वाले इन दोनों अधिकारियों को सरकार द्वारा दरकिनार किए जाने के बाद पुलिस विभाग के भीतर भी अंदरखाने कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भगवंत मान सरकार ने राज्य की मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति, गैंगस्टरों पर लगाम कसने के तरीकों और प्रशासनिक तालमेल को ध्यान में रखते हुए गौरव यादव की कार्यशैली पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया है। पिछले कुछ समय से गौरव यादव के पास कार्यवाहक डीजीपी के रूप में प्रभार था, लेकिन अब सरकार ने उन्हें पूर्ण और रणनीतिक जिम्मेदारी सौंपकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे पुलिस महकमे में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।

गौरव यादव की ताजपोशी से पंजाब पुलिस को मिलेगी नई धार, संगठित अपराध और ड्रग्स के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई

नवनियुक्त डीजीपी गौरव यादव की गिनती पंजाब के सबसे तेज-तर्रार और अनुभवी पुलिस अधिकारियों में होती है। उन्होंने इससे पहले भी कठिन परिस्थितियों में राज्य की कमान संभाली है और असामाजिक तत्वों तथा गैंगस्टरों के खिलाफ कई कड़े अभियान चलाए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उनकी सरकार पंजाब से नशे के खात्मा और अपराध मुक्त प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में गौरव यादव की नियुक्ति को इसी दिशा में उठाया गया सबसे ठोस कदम माना जा रहा है। पुलिस मुख्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नए डीजीपी के कार्यभार संभालते ही राज्यभर के सभी पुलिस कमिश्नरों और जिला प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे जनता की सुरक्षा और कानून के राज को सर्वोपरि रखें।

विपक्ष के निशाने पर मान सरकार का प्रशासनिक मॉडल, नए डीजीपी के सामने होंगी कौन-कौन सी बड़ी चुनौतियां?

इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद राज्य के विपक्षी दलों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि बार-बार पुलिस के शीर्ष पदों पर फेरबदल करने से जमीनी स्तर पर पुलिसिंग प्रभावित होती है। हालांकि, इन राजनीतिक बयानों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए डीजीपी गौरव यादव के सामने आने वाले दिनों में कई बड़ी और जटिल चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। राज्य में सीमा पार से हथियारों और ड्रग्स की तस्करी, कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले संगठित गिरोह और खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत करना उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर होगा। पंजाब की जनता और सरकार दोनों की निगाहें अब गौरव यादव के अगले कदमों पर टिकी हैं, यह देखने के लिए कि वे इन उम्मीदों पर कितने खरे उतरते हैं।