अमेरिका की मोस्ट-वांटेड लिस्ट में था नाम, पंजाब पुलिस ने भारत में दबोचा बड़ा भगोड़ा
पंजाब पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय भगोड़ों और संगठित अपराध तंत्र पर शिकंजा कसते हुए जालंधर कमिश्नरेट से एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी की है। संयुक्त राज्य अमेरिका के बड़े कल्याणकारी घोटाले में वांछित और यूएस मोस्ट-वांटेड लिस्ट में दर्ज मंजीत सिंह बेदी अब पंजाब पुलिस की गिरफ्त में है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां इस भगोड़े की तलाश में लंबे समय से जुटी थीं, जो कानून को चकमा देकर भारत में छिपने की फिराक में था।
कनाडा बॉर्डर लांघकर भारत भागा था आरोपी: डीजीपी गौरव यादव
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने शुक्रवार को आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि मंजीत सिंह बेदी अमेरिका के प्रसिद्ध सप्लीमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम (SNAP) में लाभ से जुड़ी बड़ी धोखाधड़ी का मुख्य आरोपी है।
अमेरिकी न्याय तंत्र से बचने के लिए बेदी अप्रैल 2026 में सीमा पार कर कनाडा पहुंचा और वहां से फ्लाइट पकड़कर चुपके से भारत आ गया था। जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने सटीक इनपुट पर जाल बिछाकर उसे धर दबोचा। डीजीपी ने सख्त लहजे में स्पष्ट किया कि विदेशों में अपराध कर भारत को पनाहगाह बनाने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा और सीमाएं पार कर न्याय से बचना किसी के लिए मुमकिन नहीं होगा।
एफबीआई की मोस्ट वांटेड लिस्ट में था शामिल, घोषित था 1.5 लाख डॉलर का इनाम
अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) ने मंजीत सिंह बेदी के ऊपर 6,00,000 अमेरिकी डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब 5.66 करोड़ रुपये) के सरकारी गबन का आरोप दर्ज किया था। अपराध की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी संघीय एजेंसी ने बेदी पर 1,50,000 डॉलर का भारी-भरकम नकद इनाम रखा था। किराना स्टोर चलाने वाले भारतीय मूल के इस अमेरिकी नागरिक के खिलाफ वॉशिंगटन में केस दर्ज होते ही वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोस्ट वांटेड बन गया था।
राशन योजना में EBT कार्ड से कैश बांटने का खेल: कौन है मंजीत बेदी?
मूल रूप से भारतीय और वर्तमान में अमेरिकी नागरिकता हासिल कर चुका मंजीत सिंह बेदी अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य के टाकोमा इलाके में 'एशियन ग्रोसरी स्टोर' नाम से किराने का कारोबार करता था। बेदी पर आरोप है कि वह अमेरिकी सरकार के SNAP फूड बेनिफिट प्रोग्राम का गलत फायदा उठा रहा था। नियमानुसार स्टोर पर जरूरतमंदों को इलेक्ट्रॉनिक बेनिफिट ट्रांसफर (EBT) कार्ड से सिर्फ खाने-पीने का राशन दिया जाना था। इसके उलट बेदी कार्डधारकों से मिलीभगत कर उनके कार्ड स्वाइप करता, राशन देने के बजाय नकद रकम देता और 50 फीसदी कमीशन खुद अपनी जेब में रख लेता था। इस तरह 100 डॉलर के सरकारी राशन कार्ड स्वाइप पर वह 50 डॉलर ग्राहक को सौंपता और 50 डॉलर सीधे हड़प जाता था।