यमन में बारूदी कोहराम: सेना और हूती विद्रोहियों के बीच खूनी जंग, 81 लड़ाकों की मौत से हिला लाल सागर
पश्चिम एशिया के अशांत देश यमन में सरकारी सेना और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष ने एक बार फिर भयानक हिंसक रूप अख्तियार कर लिया है। दोनों ही गुटों की ओर से एक-दूसरे के ठिकानों पर भारी हथियारों से भीषण जवाबी हमले किए जा रहे हैं।
पिछले महज दो दिनों के भीतर हुए इस खूनी टकराव में अब तक 81 से अधिक लड़ाकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। सैन्य सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, हताहतों में यमन के सरकारी बलों के 39 जवान और हूती समूह के कम से कम 42 हथियारबंद लड़ाके शामिल हैं। लाल सागर (रेड सी) के तटीय इलाकों और रणनीतिक रूप से अहम ताइज प्रांत में हुई इस जबरदस्त झड़प के चलते दोनों पक्षों को जन-धन का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
बाब अल-मंदेब पर कब्जे की जंग ने भड़काई चिंगारी
सामरिक विश्लेषकों के अनुसार, यमन में यह ताजा हिंसक टकराव उस समय और तेज हुआ जब हूती गुट ने लाल सागर के दक्षिणी रणनीतिक प्रवेश द्वार कहे जाने वाले 'बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य' (Bab al-Mandab Strait) के नजदीकी इलाकों पर नियंत्रण जमाने की कोशिशें तेज कर दीं। विश्व व्यापार और समुद्री जहाजों की आवाजाही के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले इस समुद्री गलियारे पर वर्चस्व कायम करने की हूती लड़ाकों की साजिश के बाद सरकारी सेना ने भी पूरी ताकत से मोर्चा संभाल लिया, जिसके चलते दोनों पक्षों की जंग सीधे आमने-सामने की खूनी झड़प में तब्दील हो गई।
रॉकेट और ड्रोन हमलों से दहली तटीय सीमाएं
सैन्य सूत्रों के अनुसार, संघर्ष की मुख्य लपटें ताइज प्रांत के पश्चिमी हिस्सों और लाल सागर के तटीय बेल्ट में फैली हुई हैं। लाल सागर के संवेदनशील तट पर तैनात एक उच्च सैन्य अधिकारी ने बताया कि अकेले तटीय इलाकों में हुई भीषण गोलाबारी में सरकारी बलों के 24 जांबाज जवान शहीद हो गए। 3 सितंबर को हूती विद्रोहियों ने तटीय सुरक्षा चौकियों को निशाना बनाते हुए रॉकेट, मिसाइल और घातक कामिकेज ड्रोन हमलों के साथ-साथ कई मोर्चों से जमीनी आक्रमण शुरू कर दिया था। इसके जवाब में सरकारी सुरक्षाबलों ने भी भारी तोपखाने और सैन्य साजो-सामान के साथ जोरदार पलटवार किया, जिससे पूरा इलाका भीषण तोपों की गूंज से थर्रा उठा।