अंधेरे में डूबा नूंह! 3 दिन की हड़ताल ने बिगाड़े हालात, जानें क्या चाहते हैं कर्मचारियों
हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह जिले में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल ने विकराल रूप ले लिया है। गुरुवार से शुरू हुए इस कार्यबहिष्कार का सीधा और सबसे घातक असर नूंह जिले की आम जनता पर पड़ा है, जहां लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को भी बिजली आपूर्ति पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है।
जिले के अधिकांश हिस्सों में 24 घंटे से अधिक समय से ब्लैकआउट जैसे हालात बने हुए हैं। घंटों से बिजली न आने के कारण न केवल घरेलू जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, बल्कि आधुनिक तकनीकी व्यवस्था और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी ताला लगने की नौबत आ गई है। स्थानीय बाज़ारों में नकदी निकालने के लिए एटीएम बंद पड़े हैं, ऑनलाइन सेवाओं वाले साइबर कैफे ठप हैं और दूध की डेयरियों में डीप-फ्रीजर बंद होने से दूध खराब होने का खतरा मंडराने लगा है।
बिजली आपूर्ति में आए इस लंबे व्यवधान ने अब जिले में पानी के भीषण संकट की आहट भी दे दी है। ट्यूबवेल और वाटर सप्लाई पंपिंग स्टेशनों के न चल पाने के कारण कई रिहायशी कॉलोनियों और ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति बुरी तरह लड़खड़ा गई है।
क्या है कर्मचारियों की मांग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर जल्द ही बिजली व्यवस्था को बहाल नहीं किया गया, तो पीने के पानी के लिए त्राहि-त्राहि मच जाएगी और स्थिति बेकाबू हो सकती है। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) द्वारा बिजली वितरण के निजीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों के खिलाफ कर्मचारियों की यह लामबंदी अब सीधे तौर पर प्रशासनिक प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। कर्मचारी जहां निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं, वहीं निजीकरण की नीतियों और कर्मचारी संगठनों के इस टकराव के बीच पिस रही आम जनता अंधेरे में बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करने को मजबूर है।