10 मेहमानों के लिए 700 माला और 8 महीने में 17 लाख खर्च; जयपुर नगर निगम की खरीद पर उठे सवाल

10 मेहमानों के लिए 700 माला और 8 महीने में 17 लाख खर्च; जयपुर नगर निगम की खरीद पर उठे सवाल

गुलाबी शहर जयपुर अपनी ऐतिहासिक खूबसूरती, मेहमाननवाज़ी और शाही संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन इन दिनों यहां की आबोहवा में राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों से एक अलग ही गर्माहट महसूस हो रही है। जयपुर नगर निगम से जुड़ा एक ऐसा कारनामा सामने आया है जिसे सुनकर आम जनता का सिर चकरा जाए। हाल ही में सामने आए आरटीआई और आधिकारिक वित्तीय दस्तावेजों के खुलासे के अनुसार, निगम के अधिकारियों ने महज 10 विशिष्ट (VIP) मेहमानों के स्वागत और सत्कार के नाम पर एक या दो नहीं बल्कि पूरे 700 फूलों की मालाओं की बंपर खरीद कर डाली। इतना ही नहीं, सिर्फ 8 महीने के भीतर सरकारी खजाने से फूलों और स्वागत-समारोहों के नाम पर 17 लाख रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि पानी की तरह बहा दी गई। जनता के टैक्स के पैसों की इस बेपरवाह और विलासितापूर्ण लीपापोती की खबर जैसे ही सार्वजनिक हुई, वैसे ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक घमासान मच गया है और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं।

सिर्फ 10 वीआईपी मेहमान और 700 मालाओं का अजब गणित: आरटीआई के खुलासे से हिला जयपुर नगर निगम का प्रशासनिक तंत्र

इस पूरे मामले की पोल तब खुली जब एक स्थानीय सतर्क आरटीआई एक्टिविस्ट ने जयपुर नगर निगम से पिछले कुछ महीनों के दौरान हुए आतिथ्य सत्कार (Hospitality and Protocol) खर्चों का ब्योरा मांगा। दस्तावेजों की फाइलों को खंगालने पर जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने देखने वालों के होश उड़ा दिए। दस्तावेजों के मुताबिक, निगम ने कुछ चुनिंदा बैठकों और दौरों के दौरान आने वाले सिर्फ 10 वीआईपी मेहमानों के स्वागत के लिए 700 से ज्यादा महंगी फूलों की मालाओं के बिल पास कराए थे। गणित का यह अनोखा खेल देखकर हर कोई हैरान है कि आखिर 10 लोगों के स्वागत में 700 मालाएं कैसे और कहां इस्तेमाल हो गईं। क्या एक मेहमान के हिस्से में दर्जनों मालाएं आईं या फिर बिलों के जरिए सरकारी तिजोरी को चूना लगाने का यह कोई सुनियोजित खेल खेला गया था? इन तीखे सवालों का जवाब देने में अब नगर निगम के बड़े-बड़े अधिकारी और वित्त विभाग के नुमाइंदे कतराते नजर आ रहे हैं, जिससे इस घोटाले की बू और ज्यादा तेज हो गई है।

8 महीने में 17 लाख का खर्चा और जनता के बुनियादी विकास कार्यों की अनदेखी: पार्षदों और विपक्षी दलों ने खोला मोर्चा

गुलाबी शहर की जनता इस बात से खासी गुस्से में है कि एक तरफ जहां शहर के कई वार्डों में सीवर लाइनें चोक पड़ी हैं, सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हादसों को दावत दे रहे हैं, और स्ट्रीट लाइटें खराब होने के कारण रात में अंधेरा छाया रहता है, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम के अधिकारी फूलों के नाम पर लाखों रुपये के वारे-न्यारे कर रहे हैं। जयपुर नगर निगम के विभिन्न पार्षदों और विपक्षी दलों के नेताओं ने इस मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए उच्च स्तरीय जांच (High-Level Inquiry) की मांग की है। उनका कहना है कि यह जनता के गाढ़ी कमाई के टैक्स के पैसों का सरासर दुरुपयोग है, जिसकी भरपाई लापरवाह अधिकारियों से की जानी चाहिए। बढ़ते राजनीतिक दबाव को देखते हुए अब शहरी विकास विभाग (UDH) और शासन स्तर पर भी इन फाइलों की दोबारा जांच शुरू किए जाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। देखना यह होगा कि इस शाही फिजूलखर्ची के दोषियों पर प्रशासन क्या और कब तक कड़ी कार्रवाई करता है।