राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की रणभेरी 3 सीटों के लिए भाजपा की महा-रणनीति से कांग्रेस में खलबली
राजस्थान की सियासत में एक बार फिर बड़ा सियासी तूफान आने के संकेत मिल रहे हैं। साल 2026 में प्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों पर होने वाले आगामी द्विवार्षिक चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) ने अपनी-अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है। विधानसभा के मौजूदा संख्या बल और गणित को देखते हुए इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प होने जा रहा है। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के नतीजे राज्य की राजनीति में एक नया और बड़ा उलटफेर ला सकते हैं, जिससे दोनों ही खेमों में भारी बेचैनी देखी जा रही है।
विधानसभा का गणित: भाजपा को सीधी बढ़त, कांग्रेस बैकफुट पर!
राजस्थान विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के समीकरणों पर नजर डालें तो इस चुनाव में भाजपा बेहद मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। कुल 3 खाली हो रही सीटों में से 2 सीटों पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि बचे हुए संख्या बल के आधार पर कांग्रेस के खाते में सिर्फ 1 संभावित सीट जाती दिख रही है। भाजपा इस बार किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग या चूक से बचने के लिए अपने विधायकों की किलेबंदी करने की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस अपनी इकलौती सीट को सुरक्षित रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।
कांग्रेस में 1 सीट के लिए महासंग्राम, दिल्ली दरबार में पैरवी तेज
कांग्रेस के खाते में जाने वाली इस एकमात्र संभावित सीट को लेकर पार्टी के भीतर दावेदारों की एक बहुत लंबी कतार खड़ी हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के कई शीर्ष और कद्दावर नेता इस रेस में शामिल हैं। दिल्ली से लेकर जयपुर तक टिकट के लिए पैरवी का दौर शुरू हो चुका है। चर्चाओं के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा और भंवर जितेंद्र सिंह के नाम इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। इसके साथ ही पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी भी राज्यसभा जाने की दौड़ में अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं।
टिकट वितरण में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर नजर
कांग्रेस आलाकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर असंतोष को रोकना है। यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व इस बार टिकट फाइनल करते समय सामाजिक, जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को विशेष प्राथमिकता दे रहा है। शेखावाटी और मारवाड़ अंचल से आने वाले नेताओं के नामों पर भी विचार किया जा रहा है। रेस में रफीक मंडेलिया और रेहाना रियाज जैसी अल्पसंख्यक और महिला चेहरों के नामों की भी सियासी हलकों में खूब चर्चा हो रही है, ताकि आगामी विधानसभा व अन्य स्थानीय चुनावों के लिए समीकरण साधे जा सकें।
बीजेपी का 'सरप्राइज एलिमेंट' बिगाड़ सकता है खेल
दूसरी तरफ, भाजपा इस बार भी अपने 'सरप्राइज एलिमेंट' (चौंकाने वाले फैसलों) के लिए जानी जाने वाली रणनीति पर काम कर रही है। भाजपा की प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व की नजरें न केवल अपनी 2 सीटों को सुरक्षित रूप से जीतने पर हैं, बल्कि वे कांग्रेस के भीतर मचे आंतरिक घमासान का फायदा उठाने की फिराक में भी हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यदि भाजपा ने किसी निर्दलीय या मजबूत चेहरे को तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारकर दांव खेला, तो राजस्थान में 2022 की तरह एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है।