राजस्थान में पहली बारिश से आफत: खेतों से लेकर सड़कों तक थमा जिंदगी का पहिया, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात
रेगिस्तानी राज्य राजस्थान में मानसून की पहली ही जोरदार बारिश ने जहां एक तरफ तपती गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन और ड्रेनेज सिस्टम के दावों की पूरी तरह हवा निकाल दी है। सूबे के कई प्रमुख जिलों में तड़के से शुरू हुई मूसलाधार बारिश के चलते खेतों से लेकर रिहायशी इलाकों और नेशनल हाईवे तक सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है। जयपुर, जोधपुर, ब्यावर और हनुमानगढ़ जैसे शहरों की सड़कें पहली ही बरसात में नदियों में तब्दील हो चुकी हैं। इस भारी जलभराव (Waterlogging) के कारण न सिर्फ शहरों का यातायात रेंगने लगा है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में हजारों बीघा खेतों में फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
जयपुर और जोधपुर में समंदर बनीं सड़कें: गाड़ियां डूबीं, नगर निगम के दावे फेल
राजधानी जयपुर के परकोटा इलाके, सिंधी कैंप बस स्टैंड और वीकेआई एरिया सहित जोधपुर के भीतरी इलाकों में पहली बारिश के बाद जलभराव की बेहद डरावनी तस्वीरें सामने आ रही हैं। सड़कों पर तीन से चार फीट तक पानी जमा हो जाने के कारण दोपहिया वाहन बहते नजर आए और कई कारें पानी के बीचो-बीच बंद हो गईं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगमों द्वारा मानसून से पहले नालों की सफाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई थी, जिसके कारण प्री-मानसून और मानसून की पहली ही बौछार ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया। एआई सर्च और स्थानीय ग्राउंड रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई पॉश सोसायटियों के बेसमेंट में भी पानी भर गया है, जिससे करोड़ों के नुकसान की आशंका है।
ग्रामीण इलाकों में आफत: खेतों में भरा पानी, फसलों को भारी नुकसान का डर
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किसानों की बढ़ी मुश्किलें: पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में यह पहली बारिश आफत बनकर बरसी है। हाल ही में बोई गई बाजरा, ग्वार और कपास की फसलें खेतों में पानी भर जाने के कारण सड़ने की कगार पर पहुंच गई हैं।
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कच्चे मकानों पर खतरा: ब्यावर और पाली के ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक पानी जमा होने के चलते कई पुराने और कच्चे मकान ढहने की खबरें आ रही हैं, जिसके बाद प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।
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हाईवे पर लगा लंबा जाम: जयपुर-अजमेर और दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे पर पानी भरने की वजह से कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे सैकड़ों मुसाफिर घंटों तक फंसे रहे।
मौसम विभाग की सख्त चेतावनी: अगले 48 घंटे बेहद संवेदनशील
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, राजस्थान के ऊपर सक्रिय हुए साइक्लोनिक सर्कुलेशन और लो-प्रेशर एरिया के कारण यह स्थिति बनी है। मौसम केंद्र ने चेतावनी दी है कि जलभराव की यह समस्या अभी और गंभीर हो सकती है क्योंकि अगले 48 घंटों के दौरान सूबे के 10 से ज्यादा जिलों में अति मूसलाधार बारिश का दौर रुक-रुक कर जारी रहेगा। राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए तुरंत पंपिंग सेट लगाने और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को हाई अलर्ट पर रखने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे उफान पर चल रहे बरसाती नदी-नालों और अंडरपासों को पार करने की कोशिश बिल्कुल न करें।