यमुना जल समझौते पर राजस्थान में भारी सियासी घमासान! बीजेपी ने गहलोत को घेरा, कांग्रेस ने उठाए टाइमिंग और बजट पर तीखे सवाल
राजस्थान और हरियाणा के बीच सोमवार को हुए ऐतिहासिक यमुना जल समझौते (MoA) के बाद मरुधरा की सियासत में भूचाल आ गया है. एक तरफ जहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे शेखावाटी के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि बताकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस पर चौतरफा हमला बोल रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस समझौते की नीयत, बजट और धरातल पर क्रियान्वयन को लेकर सरकार के सामने सवालों की लंबी फेहरिस्त खड़ी कर दी है.
बीजेपी का गहलोत पर पलटवार: 'अब पहनाएं भजनलाल शर्मा को फूलों की माला'
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को उनका पुराना वादा याद दिलाया. राठौड़ ने दावा किया कि गहलोत अक्सर कहा करते थे कि हरियाणा से राजस्थान को यमुना का पानी मिलना असंभव है और अगर ऐसा हुआ तो वे खुद सीएम भजनलाल शर्मा का माला पहनाकर स्वागत करेंगे.
राजेंद्र राठौड़ का तीखा हमला: "केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में ऐतिहासिक समझौता साइन हो चुका है. अब अशोक गहलोत को आगे आकर अपना वादा निभाना चाहिए. गहलोत अपने कार्यकाल में सिर्फ दिल्ली अपनी कुर्सी बचाने जाते थे, जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राजस्थान के हक का पानी और सौगातें लेकर आ रहे हैं. वे शेखावाटी के आधुनिक 'भागीरथ' हैं."
राठौड़ ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस दोमुंही राजनीति कर रही है, क्योंकि हरियाणा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में दूसरे राज्यों को पानी न देने की बात कही थी और गहलोत वहां उसी नीति का प्रचार कर रहे थे.
कांग्रेस का पलटवार: 'ढाई साल का इंतजार, कहां है डीपीआर और ₹33,000 करोड़ का बजट?'
दूसरी तरफ, कांग्रेस खेमे से नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मोर्चा संभालते हुए सरकार के दावों की हवा निकालने की कोशिश की. जूली ने समझौते का स्वागत तो किया, लेकिन सरकार की कार्यशैली और नीयत पर गंभीर आरोप लगाए.
टीकाराम जूली द्वारा उठाए गए 3 मुख्य सवाल:
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कागजी खेल या हकीकत?: जूली ने कहा कि सरकार पिछले ढाई साल से सिर्फ एमओयू (MoU) और एमओए (MoA) का कागजी खेल खेल रही है, जबकि जमीन पर एक इंच भी काम शुरू नहीं हुआ है. साल 2024 में 4 महीने के भीतर डीपीआर (DPR) तैयार करने का वादा किया गया था, जो ढाई साल बाद भी जनता के सामने नहीं आई है.
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हरियाणा की शर्त का सस्पेंस: हरियाणा के मुख्यमंत्री के बयान का हवाला देते हुए जूली ने कहा कि हरियाणा सिर्फ यमुना का 'सरप्लस' (अतिरिक्त) पानी देने की बात कह रहा है. सवाल यह है कि जब यमुना में अतिरिक्त पानी होगा ही नहीं, तो राजस्थान के प्यासे क्षेत्रों को क्या मिलेगा?
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फंडिंग का सोर्स गुमनाम: इस पूरी परियोजना की लागत लगभग ₹33,000 करोड़ से अधिक आंकी जा रही है. नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि इतनी भारी-भरकम राशि कहां से आएगी? सरकार ने इसके वित्तीय रोडमैप और फंडिंग सोर्स का अभी तक कोई खुलासा नहीं किया है.
फिलहाल, इस ऐतिहासिक समझौते के बाद जयपुर से लेकर शेखावाटी तक की राजनीति गरमाई हुई है. जहां एक तरफ बीजेपी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के स्वागत और इस उपलब्धि को जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है, वहीं विपक्ष इसे केवल एक चुनावी छलावा साबित करने में जुटा है.