जयपुर जासूस कांड: बबीता से 'खदीजा' बनने की खौफनाक कहानी, सुसाइड बॉम्बर बनने की थी तैयारी
पिंक सिटी जयपुर में सामने आए एक सनसनीखेज जासूसी मामले में नया मोड़ आ गया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम करने के आरोप में गिरफ्तार बबीता धाकड़ उर्फ 'खदीजा' की न्यायिक हिरासत को जयपुर की सीजेएम-2 कोर्ट ने 15 दिनों के लिए और बढ़ा दिया है। सुरक्षा कारणों के चलते इस बार उसकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की गई। एटीएस की जांच में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने न केवल सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है, बल्कि स्थानीय लोगों में भी दहशत पैदा कर दी है।
कैसे बबीता के मन में पनपा कट्टरपंथ का जहर
जांच में पता चला है कि सवाई माधोपुर की रहने वाली बबीता करीब 14 साल पहले अपने पति से अलग होने के बाद जयपुर में अपने पिता के साथ रह रही थी। इसी दौरान वह ऑनलाइन कट्टरपंथ के संपर्क में आई। एटीएस की रिपोर्ट के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक आतंकी से निकाह करने के लिए उसने अपना धर्म परिवर्तन कर खुद को 'खदीजा' नाम दिया। धर्म बदलने के बाद उसकी विचारधारा पूरी तरह से बदल गई और वह पाकिस्तान स्थित आकाओं के सीधे संपर्क में आ गई।
पाकिस्तान जाकर सुसाइड बॉम्बर बनने का था प्लान
एटीएस की पूछताछ में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि खदीजा केवल जासूसी ही नहीं कर रही थी, बल्कि वह पाकिस्तान जाने की फिराक में थी। उसे वहां जाकर बकायदा फिजिकल ट्रेनिंग लेनी थी, जिसमें 'सुसाइड बॉम्बर' बनने का प्रशिक्षण भी शामिल था। उसने इसके लिए इंटरनेट के जरिए पहले ही काफी कुछ सीख लिया था। 20 जून को गिरफ्तारी के बाद से लगातार जारी पूछताछ में एटीएस को उसके खतरनाक इरादों के बारे में पुख्ता सबूत मिले हैं।
राजस्थान में स्लीपर सेल का नेटवर्क खंगाल रही ATS
अब राजस्थान एटीएस का पूरा फोकस इस बात पर है कि क्या खदीजा अपने नेटवर्क के जरिए राजस्थान में स्लीपर सेल का विस्तार कर रही थी। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या उसने प्रदेश के भीतर कुछ अन्य लोगों को भी अपने इस राष्ट्रविरोधी नेटवर्क से जोड़ा है। एटीएस के अधिकारी बारीकी से उसके कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों को खंगाल रहे हैं ताकि इस पूरे आतंकी मॉड्यूल को जड़ से खत्म किया जा सके।