सरकारी गाड़ी छोड़ साइकिल पर निकले सीनियर IPS PM की एक अपील पर जयपुर पुलिस ने शुरू की ये अनोखी मुहिम
राजस्थान की राजधानी जयपुर की सड़कों पर इन दिनों एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है, जिसने आम जनता से लेकर प्रशासनिक हलकों तक सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जो पुलिस अधिकारी आमतौर पर चमचमाती सरकारी गाड़ियों और सुरक्षा काफिले के साथ नजर आते हैं, वे अचानक साइकिल पैडल मारते हुए दफ्तर जाते और गलियों में गश्त करते दिखाई दे रहे हैं। जयपुर पुलिस की यह अनोखी और पर्यावरण-अनुकूल पहल किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ईंधन (फ्यूल) बचाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने की हालिया अपील के सम्मान में शुरू की गई है।
सफर छोटा, सोच बड़ी: IG विकास कुमार ने पेश की सादगी की मिसाल
इस बेहतरीन मुहिम की शुरुआत 2004 बैच के सीनियर आईपीएस (IPS) अधिकारी विकास कुमार ने की है, जो वर्तमान में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) में आईजी (IG) के पद पर तैनात हैं। आईजी विकास कुमार अपने घर से कार्यालय तक का करीब 4 किलोमीटर का सफर सरकारी गाड़ी के बजाय साइकिल से तय कर दफ्तर पहुंचे और काम खत्म कर वापस भी साइकिल से ही लौटे। यह कदम सिर्फ एक दिन की प्रतीकात्मक शुरुआत नहीं है, बल्कि उन्होंने संकल्प लिया है कि वे पूरे एक महीने तक अपनी वीआईपी सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनका यह कदम सादगी, जिम्मेदारी और बड़े बदलाव का एक मजबूत संदेश दे रहा है।
जब पुलिस का पूरा अमला उतरा साइकिल पर, गलियों में की गश्त
आईजी विकास कुमार की इस अनूठी पहल का असर जयपुर पुलिस के अन्य अधिकारियों और जवानों पर भी तत्काल देखने को मिला। जयपुर शहर के नॉर्थ जिले में पुलिस का पूरा अमला साइकिल पर सवार होकर सायंकालीन गश्त (इवनिंग पेट्रोलिंग) के लिए निकला। डीसीपी करण शर्मा, एडिशनल डीसीपी बजरंग सिंह और नीरज पाठक समेत कई थानाधिकारी और पुलिसकर्मी साइकिल से तंग गलियों और मुख्य बाजारों की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते नजर आए। पुलिस को इस नए रूप में देखकर आम जनता न सिर्फ हैरान रह गई, बल्कि इस कदम की जमकर सराहना भी कर रही है।
पीएम की अपील से बना जन अभियान, वीआईपी काफिले भी हुए छोटे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में ईंधन की खपत को घटाने और प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए जो अपील की थी, वह अब राजस्थान में धरातल पर उतरती दिख रही है। खुद प्रधानमंत्री ने इस दिशा में उदाहरण पेश करते हुए अपने काफिले की गाड़ियों में कटौती की थी। इसके बाद राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने भी अपने आधिकारिक काफिले को छोटा किया, जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ईंधन बचाने के संदेश को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (EV) का उपयोग करना शुरू कर दिया है। अब जयपुर पुलिस ने साइकिल चलाकर इस मुहिम को और आगे बढ़ा दिया है।
सेहत, पर्यावरण और जनता से जुड़ाव का 'त्रिवेणी संगम'
हेल्थ और एनवायरमेंट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जयपुर पुलिस की इस साइकिल पैडलिंग मुहिम के तीन सबसे बड़े फायदे देखने को मिल रहे हैं:
-
ईंधन की बचत और कम प्रदूषण: सरकारी गाड़ियों का उपयोग कम होने से रोजाना सैकड़ों लीटर पेट्रोल-डीजल की बचत हो रही है और कार्बन उत्सर्जन कम हो रहा है।
-
पुलिसकर्मियों की फिटनेस: दिन-रात की तनावपूर्ण ड्यूटी करने वाले पुलिस अधिकारियों और जवानों के लिए साइकिल चलाना एक बेहतरीन फिजिकल वर्कआउट साबित हो रहा है।
-
जनता से सीधा जुड़ाव: बड़ी गाड़ियों के बजाय साइकिल से गश्त करने के कारण पुलिस और जनता के बीच की दूरी कम हो रही है। पुलिसकर्मी अब सीधे तौर पर गलियों के दुकानदारों और स्थानीय निवासियों से बात कर पा रहे हैं, जिससे सामुदायिक पुलिसिंग (Community Policing) को मजबूती मिल रही है।