अजमेर मेयर चुनाव में बड़ा ट्विस्ट! 19 लाख के बकाये पर आपत्ति से गरमाई सियासत
अजमेर नगर निगम में मेयर की कुर्सी के लिए चल रही राजनीतिक जंग अब नामांकन पत्रों की जांच के बीच एक नई आपत्ति से और तेज हो गई है। गुरुवार को भाजपा की मेयर प्रत्याशी अनामिका शर्मा ने कांग्रेस उम्मीदवार किरण गढ़वाल के खिलाफ नगर निगम की बकाया राशि को लेकर आपत्ति दर्ज कराई।
मामला सामने आते ही निगम परिसर में दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को संभालने के लिए निगम कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
किरण गढ़वाल पर 19.18 लाख रुपये बकाये का दावा
भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा की ओर से दाखिल आपत्ति में दावा किया गया कि कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल के गढ़वाल पैलेस पर नगर निगम की 19 लाख 18 हजार 628 रुपये की राशि वर्ष 2018 से बकाया है। भाजपा की ओर से यह भी कहा गया कि इस बकाया रकम को लेकर निगम की तरफ से नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
अनामिका शर्मा की ओर से निगम अधिनियम की धारा 24 का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया कि नामांकन पत्र में बकाया राशि से जुड़ी जानकारी छिपाई गई है। इसी आधार पर भाजपा ने कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई।
सुनवाई के दौरान भाजपा और कांग्रेस समर्थक आमने-सामने
नामांकन पर आपत्ति की सुनवाई नगर निगम परिसर में हुई। इस दौरान भाजपा की तरफ से शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी के साथ पार्टी कार्यकर्ता और अनामिका शर्मा की ओर से अधिवक्ता मौजूद रहे।
रमेश सोनी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रत्याशी पर लाखों रुपये की राशि बकाया होने के बावजूद नगर निगम ने एनओसी जारी कर दी। भाजपा ने इसे नियमों से जुड़ा गंभीर सवाल बताया।
दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल के पति दिलीप गढ़वाल ने भाजपा के आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि नगर निगम ने एनओसी जारी की है। उन्होंने बताया कि एनओसी जारी करने से पहले निगम की ओर से 24 हजार रुपये और 27 हजार रुपये जमा कराने को कहा गया था। दोनों रकम जमा करा दी गई थीं।
दिलीप गढ़वाल ने यह भी कहा कि बकाया राशि से संबंधित मामला स्थगन आदेश के तहत चल रहा है। उनके मुताबिक चुनाव में हार की आशंका के चलते इस मुद्दे को उठाया जा रहा है।
आपत्ति की खबर मिलते ही निगम के बाहर कांग्रेस का धरना
आपत्ति की जानकारी सामने आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता नगर निगम भवन के बाहर पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने धरना दिया और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस ने भाजपा पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
दूसरी तरफ भाजपा समर्थकों ने भी नारेबाजी की। भाजपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी के समर्थन के साथ विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के समर्थन में भी नारे लगाए। दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने निगम परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी।
एडिशनल एसपी समेत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अलग-अलग थानों और पुलिस लाइन से पुलिसकर्मियों को बुलाकर तैनाती की गई। निगम के मुख्य गेट पर बैरिकेडिंग की गई और परिसर में मौजूद लोगों को बाहर भेजा गया।
अंदर बंद कमरे में नामांकन पर चर्चा, बाहर चलता रहा हंगामा
नगर निगम की नई बिल्डिंग के एक कमरे में मेयर पद के दोनों उम्मीदवारों, प्रस्तावकों, विधि सलाहकारों और अधिकारियों के बीच आपत्ति को लेकर चर्चा चलती रही। दूसरी तरफ बाहर राजनीतिक समर्थकों की नारेबाजी और हंगामा जारी रहा।
कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल के पति दिलीप गढ़वाल भी परिवार के सदस्यों के साथ नगर निगम कार्यालय पहुंचे। वह सुनवाई वाले कमरे में भी गए। इस दौरान निगम परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।
कांग्रेस ने किरण गढ़वाल तो भाजपा ने अनामिका शर्मा को उतारा
अजमेर नगर निगम के मेयर पद के चुनाव में कांग्रेस ने वार्ड नंबर 57 की पार्षद किरण गढ़वाल को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा की ओर से वार्ड नंबर 3 की पार्षद अनामिका शर्मा मैदान में हैं।
दोनों प्रत्याशियों ने बुधवार को अपना नामांकन दाखिल किया था। गुरुवार को नामांकन पत्रों की जांच की जा रही थी। इसी प्रक्रिया के दौरान भाजपा की ओर से बकाया राशि को लेकर आपत्ति दर्ज की गई और चुनावी माहौल अचानक गरमा गया।
21 सितंबर को होगा मेयर का चुनाव
अजमेर नगर निगम के मेयर पद के लिए मतदान 21 सितंबर को होगा। पार्षद अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे और इसी दिन चुनाव परिणाम भी घोषित किया जाएगा।
80 वार्ड वाले अजमेर नगर निगम में कांग्रेस के 37 पार्षद हैं। भाजपा के पास 32 पार्षद हैं जबकि 11 पार्षद निर्दलीय हैं। मेयर पद जीतने के लिए 41 वोटों की जरूरत होगी।
मौजूदा संख्या के हिसाब से कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से 4 वोट पीछे है। वहीं भाजपा को बहुमत तक पहुंचने के लिए 9 अतिरिक्त वोट चाहिए। ऐसे में 11 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका चुनाव में अहम हो गई है।
निर्दलीयों पर टिकी नजर, बाड़ेबंदी से बढ़ी चुनावी हलचल
मेयर चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दल अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं। कांग्रेस के पार्षदों को पहले जयपुर और उसके बाद बेंगलुरु ले जाने की जानकारी सामने आई है। भाजपा के पार्षद भी जयपुर में बाड़ेबंदी में रहे हैं।
ऐसे समय में नामांकन जांच के दौरान सामने आई बकाया राशि से जुड़ी आपत्ति ने अजमेर नगर निगम चुनाव की सियासत को और गरमा दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आपत्ति पर संबंधित प्रक्रिया में क्या निर्णय सामने आता है और इसका 21 सितंबर के मेयर चुनाव पर क्या असर पड़ता है।