राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले बड़ा उलटफेर, आरक्षण की लॉटरी ने बदल दिया पूरा खेल
राजस्थान में आगामी पंचायतीराज चुनावों की उल्टी गिनती शुरू होते ही ग्रामीण सियासत में सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। पंचायत समिति प्रधानों से लेकर जिला परिषद सदस्यों और पंचायत समिति वार्डों के आरक्षण की स्थिति लॉटरी प्रणाली के जरिए साफ होने लगी है।
प्रदेश की सभी 457 पंचायत समितियों के प्रधान पदों के साथ-साथ 1,403 जिला परिषद सदस्यों और 8,245 पंचायत समिति सदस्यों के लिए आरक्षण तय किया जा रहा है। पंचायतीराज के संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हर वर्ग और श्रेणी में महिलाओं के लिए पूरे 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू रहेगी।
रोटेशन प्रणाली से बदला सीटों का गणित, धरे रह गए दावेदारों के पुराने समीकरण
आरक्षण की लॉटरी निकलते ही प्रदेश के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों का राजनीतिक नक्शा पूरी तरह बदल गया है। रोटेशन व्यवस्था के तहत नए सिरे से आरक्षण निर्धारित होने की वजह से पिछली बार जो सीटें या वार्ड किसी विशिष्ट आरक्षित वर्ग के पास थे, वे अब सामान्य वर्ग के खाते में चले गए हैं, जबकि कई परंपरागत सामान्य सीटें इस बार आरक्षित हो गई हैं। इस बदलाव ने उन स्थानीय नेताओं और भावी प्रत्याशियों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है, जिन्होंने महीनों पहले से अपने-अपने क्षेत्रों में प्रचार अभियान शुरू कर दिया था। अब उन्हें नए आरक्षण फार्मूले के तहत अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा फेरबदल करना होगा।
457 प्रधान पदों का जातिगत ब्योरा: SC को 79, ST को 93 और OBC को 56 पद
प्रदेशभर की 457 पंचायत समितियों के प्रधान पदों के आरक्षण का प्रारूप भी सामने आ चुका है। इसके तहत अनुसूचित जाति (SC) के लिए 79 पद, अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 93 पद और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 56 पद आरक्षित किए गए हैं। कुल आरक्षण सीमा को 50 प्रतिशत के दायरे में संतुलित रखने के लिए ओबीसी श्रेणी के कुछ पदों में तकनीकी फेरबदल की संभावना भी जताई जा रही है। वहीं, लगभग 228 से 229 प्रधान पद सामान्य श्रेणी के लिए निर्धारित रहने का अनुमान है।
जयपुर और उदयपुर में प्रधान पदों की स्थिति
जिलों के स्तर पर आरक्षण के बेहद रोचक आंकड़े सामने आए हैं। जयपुर जिले की कुल 22 पंचायत समितियों में से केवल 4 प्रधान पद अनारक्षित पुरुष (सामान्य) के लिए रखे गए हैं, जबकि 6 पद अनारक्षित महिला श्रेणी के लिए आवंटित किए गए हैं। दूसरी ओर, आदिवासी बहुल उदयपुर जिले की 20 पंचायत समितियों में सिर्फ एक सीट अनारक्षित श्रेणी में गई है, जबकि अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आठ सीटें आरक्षित हुई हैं। आगामी दिनों में ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंच पदों के आरक्षण की लॉटरी भी उपखंड मुख्यालयों पर निकाली जाएगी।
जयपुर जिला परिषद के 57 वार्डों का आरक्षण तय, 28 सीटें महिलाओं के नाम
राजधानी जयपुर में जिला परिषद के सभी 57 वार्डों की आरक्षण सूची को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसमें अनुसूचित जाति के लिए 10, अनुसूचित जनजाति के लिए 8 और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 10 वार्ड आरक्षित किए गए हैं, जबकि शेष 29 वार्ड सामान्य वर्ग के हिस्से में आए हैं। 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के नियम के तहत कुल 57 वार्डों में से 28 वार्ड सीधे तौर पर महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं।
जयपुर जिला परिषद के महिला आरक्षित वार्डों की पूरी सूची
अनुसूचित जाति (SC) महिला आरक्षित वार्डों में वार्ड संख्या 42, 36, 23, 32 और 27 को शामिल किया गया है। अनुसूचित जनजाति (ST) महिला वर्ग के लिए वार्ड संख्या 47, 41, 46 और 44 निर्धारित किए गए हैं। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) महिला श्रेणी में वार्ड संख्या 43, 8, 1, 51 और 10 आरक्षित हुए हैं। सामान्य वर्ग के कुल 29 वार्डों में से 14 वार्ड सामान्य महिलाओं के लिए और 15 वार्ड सामान्य पुरुष प्रत्याशियों के लिए तय किए गए हैं।
जयपुर की 22 पंचायत समितियों में प्रधान पदों का वितरण
जयपुर जिले की 22 पंचायत समितियों के प्रधान पदों का वर्गीकरण भी स्पष्ट हो गया है। इनमें 4 पद अनुसूचित जाति, 3 पद अनुसूचित जनजाति, 4 पद अन्य पिछड़ा वर्ग और 11 पद सामान्य श्रेणी के लिए रखे गए हैं। इन सभी श्रेणियों में भी महिलाओं के 50 प्रतिशत पद अनिवार्य रूप से आरक्षित रहेंगे। आरक्षण की इस नई तस्वीर के बाद अब ग्रामीण इलाकों में चौपालों से लेकर जिला स्तर तक नए चेहरों की तलाश और सियासी जोड़-तोड़ का दौर तेज हो गया है।