देहरादून में अब नियो मेट्रो नहीं, सड़कों के ऊपर दौड़ेगी 24 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस; जानें रूट

देहरादून में अब नियो मेट्रो नहीं, सड़कों के ऊपर दौड़ेगी 24 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस; जानें रूट

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सार्वजनिक परिवहन को विश्वस्तरीय और जाममुक्त बनाने के लिए चल रही वर्षों की कसरत अब एक नए और आधुनिक मोड़ पर पहुंच गई है। शहर में लंबे समय से प्रस्तावित नियो मेट्रो परियोजना की जगह अब अत्याधुनिक ई-बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (e-BRTS) शुरू करने की तैयारी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत शहर की प्रमुख सड़कों के ऊपर 24 मीटर लंबी विशाल इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती नजर आएंगी। एलिवेटेड फ्लाईओवर की तकनीक पर आधारित यह पूरा सिस्टम दून की मुख्य सड़कों के मध्य मौजूद डिवाइडर वाले हिस्से में मजबूत कंक्रीट के पिलर खड़े करके तैयार किया जाएगा, जिससे जमीन पर मौजूद सामान्य ट्रैफिक पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

मेट्रो और नियो मेट्रो के बाद ई-बीआरटीएस पर मुहर, PWD का मिला साथ

देहरादून में सुगम और सुरक्षित सार्वजनिक यातायात सुनिश्चित करने के लिए पहले पारंपरिक मेट्रो और फिर नियो मेट्रो के प्रस्तावों पर गहन मंथन हुआ था। हालांकि भौगोलिक परिस्थितियों और शहर की बसावट को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UKMRC) ने अब ई-बीआरटीएस योजना पर जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया है। चूंकि यह विशाल एलिवेटेड कॉरिडोर शहर की मुख्य सड़कों के ठीक ऊपर आकार लेगा, इसलिए निर्माण और तकनीकी समन्वय के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) का भी पूरा सहयोग लिया जा रहा है ताकि परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।

क्या है ई-बीआरटीएस प्रणाली? प्रदूषण मुक्त सफर और डेडिकेटेड लेन की सुविधा

ई-बीआरटीएस (Electric Bus Rapid Transit System) एक पर्यावरण-अनुकूल और अत्याधुनिक शहरी परिवहन मॉडल है, जो हाई-कैपेसिटी इलेक्ट्रिक बसों और रैपिड ट्रांजिट तकनीक का बेहतरीन संगम है। इस प्रणाली के तहत 24 मीटर लंबी मल्टी-एक्सल इलेक्ट्रिक बसें सामान्य गाड़ियों की भीड़भाड़ से पूरी तरह अलग अपने डेडिकेटेड (आरक्षित) एलिवेटेड लेन में फर्राटा भरेंगी, जिससे यात्रियों को ट्रैफिक जाम से 100% मुक्ति मिलेगी। शत-प्रतिशत बिजली से चलने के कारण यह जीरो-इमिशन आधारित ग्रीन टेक्नोलॉजी है, जिससे शहर में ध्वनि और वायु प्रदूषण नहीं होगा। इसके अलावा, मेट्रो स्टेशनों की तर्ज पर इन बस स्टेशनों पर भी ऑफ-बोर्ड टिकटिंग (स्टेशन के भीतर टिकट पंचिंग) और मुख्य टर्मिनल्स पर अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा।

प्रेमनगर से रायपुर और ISBT से मसूरी डायवर्जन तक बनेंगे दो प्रमुख कॉरिडोर

राजधानी दून में ई-बीआरटीएस नेटवर्क को दो मुख्य जीवनरेखा कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। पहला कॉरिडोर प्रेमनगर से शुरू होकर बल्लूपुर चौक, किशननगर चौक, घंटाघर, आराघर चौक, नेहरू कॉलोनी, अपर नत्थनपुर, ऑर्डिनेंस फैक्टरी और हाथीखाना चौक होते हुए सीधे रायपुर तक जाएगा। वहीं, दूसरा अहम कॉरिडोर आईएसबीटी (ISBT) से शुरू होकर लालपुल, सहारनपुर चौक, रेलवे स्टेशन, घंटाघर, गांधी पार्क और दिलाराम चौक से होते हुए मसूरी डायवर्जन (राजपुर रोड) तक तैयार किया जाएगा। यह नेटवर्क शहर के दोनों छोरों को आपस में सीधे जोड़ेगा।

डेढ़ मीटर चौड़े होंगे पिलर, 570 करोड़ से होगा सड़कों का चौड़ीकरण व भूमि अधिग्रहण

पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता राजेश शर्मा ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन इस परियोजना पर तेजी से कार्य कर रहा है और निर्माण के दौरान या बाद में सड़कों पर यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए पुख्ता रणनीति बनाई गई है। वर्तमान में सड़कों के डिवाइडर लगभग आधा मीटर चौड़े हैं, जबकि ई-बीआरटीएस के एलिवेटेड पिलर करीब डेढ़ मीटर का स्थान घेरेंगे। इस अतिरिक्त स्थान की भरपाई करने, सामान्य ट्रैफिक को सुचारू रखने, आवश्यकतानुसार भूमि अधिग्रहण करने, सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने और आधुनिक फुटपाथ तैयार करने के लिए 570 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रस्ताव तैयार कर मूल परियोजना में शामिल करने हेतु भेजा गया है।