राजस्थान निकाय चुनाव में बड़ा वोटर लिस्ट विवाद: 30 लाख नामों का भारी अंतर, 26 लाख हटाए गए नाम भी शामिल

राजस्थान निकाय चुनाव में बड़ा वोटर लिस्ट विवाद: 30 लाख नामों का भारी अंतर, 26 लाख हटाए गए नाम भी शामिल

राजस्थान में होने जा रहे स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों की मतदाता सूचियों को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। एक नागरिक अधिकार कार्यकर्ता द्वारा किए गए डेटा विश्लेषण में दावा किया गया है कि स्थानीय निकाय चुनावों के लिए तैयार की गई सूचियों में मौजूद करीब 30 लाख मतदाताओं के नाम भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद आई अंतिम वोटर लिस्ट से गायब हैं। यह भारी अंतर केंद्रीय चुनाव आयोग की अंतिम एसआईआर सूची और राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) द्वारा शहरी निकाय व पंचायत चुनावों के लिए उपयोग की जा रही सूचियों के बीच सामने आया है।

आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में प्रकाशित राजस्थान की अंतिम एसआईआर मतदाता सूची में कुल मतदाताओं की तादाद 5.47 करोड़ से घटकर 5.15 करोड़ रह गई थी। इस राष्ट्रव्यापी पुनरीक्षण अभियान के तहत 44.28 लाख अपात्र या डुप्लीकेट नाम हटाए गए थे, जबकि 12.91 लाख नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े गए थे। दूसरी तरफ, राज्य निर्वाचन आयोग के पास समान 199 विधानसभा क्षेत्रों की स्थानीय निकाय सूचियों में करीब 5.45 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं। दोनों सूचियों की इस सीधी तुलना में लगभग 30 लाख मतदाताओं का बड़ा फासला साफ तौर पर उजागर हुआ है।

इस अंतर पर स्पष्टीकरण देते हुए राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राजेश वर्मा ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों की प्रशासनिक तैयारियां काफी पहले शुरू हो चुकी थीं, जिसके चलते एसआईआर प्रक्रिया से पहले की मतदाता सूची को ही आधार बनाया गया था। यह सूची आखिरी बार एक जनवरी 2025 को अपडेट हुई थी और आयोग परंपरा के अनुसार स्थानीय चुनावों में स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) के तहत अद्यतन सूचियों का उपयोग करता है। वहीं मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने भी पुष्टि की कि राज्य आयोग ने एसआईआर से पूर्व की सूची का सहारा लिया था और राजस्थान में एसआईआर की अंतिम सूची पर कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई थी।

दूसरी ओर, मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) के संस्थापक और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता निखिल डे ने राज्य निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। डे का कहना है कि जब मतदाता सूचियों को लगातार अद्यतन रखने का नियम है, तो आयोग को एसआईआर की अद्यतन अंतिम सूची ही अपनानी चाहिए थी। उनके तुलनात्मक अध्ययन के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जिन 26.63 लाख नामों को केंद्रीय सूची से मृत, स्थानांतरित या अपात्र मानकर हटाया गया था, वे नाम अब भी 2026 के शहरी निकाय और पंचायत चुनावों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं, जो चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।