निजी कॉलेजों में शिक्षा का मखौल: जोधपुर और जैसलमेर में परीक्षा में नकल का महाखुलासा, रक्षक ही बने भक्षक, वीक्षक खुद बोलकर लिखवा रहे थे जवाब

निजी कॉलेजों में शिक्षा का मखौल: जोधपुर और जैसलमेर में परीक्षा में नकल का महाखुलासा, रक्षक ही बने भक्षक, वीक्षक खुद बोलकर लिखवा रहे थे जवाब

राजस्थान (Rajasthan) के उच्च शिक्षा जगत से एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जोधपुर (Jodhpur) और जैसलमेर (Jaisalmer) जिलों में स्थित कुछ निजी कॉलेजों (Private Colleges) में चल रही विश्वविद्यालय परीक्षाओं के दौरान बड़े पैमाने पर संगठित नकल का भंडाफोड़ हुआ है। इस पूरे खेल में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए तैनात किए गए वीक्षक (Invigilators) ही खुद छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं में जवाब लिखवा रहे थे। गुप्त सूचना के आधार पर विश्वविद्यालय के उड़नदस्ते (Flying Squad) और स्थानीय पुलिस ने जब परीक्षा केंद्रों पर औचक छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। इस महाखुलासे के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

ब्लैकबोर्ड पर लिखे थे प्रश्नों के उत्तर, वीक्षक क्लास में घूम-घूमकर करा रहे थे नकल

विश्वविद्यालय प्रशासन और फ्लाइंग स्क्वाड के अधिकारियों के अनुसार, जैसलमेर और जोधपुर के ग्रामीण इलाकों में स्थित दो निजी डिग्री कॉलेजों में सामूहिक नकल की पुख्ता जानकारी मिली थी। जब टीम ने परीक्षा हॉल में अचानक प्रवेश किया, तो वहां नियमों की धज्जियां उड़ती पाई गईं। परीक्षा कक्ष के ब्लैकबोर्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में प्रश्नों के उत्तर लिखे हुए थे। यही नहीं, ड्यूटी पर तैनात वीक्षक अपनी जेबों में उत्तरों की पर्चियां (चीट शीट) लेकर घूम रहे थे और कमजोर छात्रों की मेज पर जाकर उन्हें आंसर बोल-बोलकर लिखवा रहे थे। टीम को देखते ही कॉलेज प्रशासन और नकल करा रहे स्टाफ के हाथ-पांव फूल गए।

मोबाइल फोन से वॉट्सऐप ग्रुप पर लीक हुआ था पर्चा, परीक्षा केंद्रों पर पुलिस का छापा

संगठित नकल का नेटवर्क: शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि परीक्षा शुरू होने के ठीक 15 मिनट पहले प्रश्नपत्र को मोबाइल के जरिए स्कैन करके एक गुप्त वॉट्सऐप ग्रुप (WhatsApp Group) पर शेयर किया गया था। इस ग्रुप में कॉलेज के कुछ शिक्षक और बाहरी सॉल्वर जुड़े हुए थे, जिन्होंने तुरंत उत्तर तैयार कर परीक्षा केंद्र के भीतर मौजूद वीक्षकों को भेज दिए। पुलिस ने मौके से कई स्मार्टफोन, हल किए गए पर्चे और नकल सामग्री जब्त की है। पुलिस ने परीक्षा केंद्र के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को भी अपने कब्जे में ले लिया है, जिससे साफ दिख रहा है कि वीक्षक खुद कॉपियां लिखवाने में मदद कर रहे थे।

विश्वविद्यालय ने रद्द की परीक्षा, दोनों कॉलेजों की मान्यता रद्द करने की सिफारिश

इस गंभीर कदाचार (Malpractice) पर कड़ा संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति ने संबंधित केंद्रों पर आयोजित हुई उस विषय की परीक्षा को तुरंत प्रभाव से रद्द (Cancel) कर दिया है। इसके साथ ही, आरोपी वीक्षकों और कॉलेज के केंद्र अधीक्षक (Center Superintendent) के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने राज्य सरकार और उच्च शिक्षा निदेशालय को एक गोपनीय रिपोर्ट भेजी है, जिसमें इन दोनों निजी कॉलेजों की संबद्धता और मान्यता को हमेशा के लिए रद्द (De-affiliation) करने की मजबूत सिफारिश की गई है। परीक्षा में शामिल उन छात्रों को भी चिन्हित कर लिया गया है जो वीक्षकों की मदद से उत्तर लिख रहे थे।

होनहार छात्रों में भारी आक्रोश, परीक्षा प्रणाली की शुचिता पर खड़े हुए बड़े सवाल

इस बड़े खुलासे के बाद पूरी लगन से पढ़ाई करने वाले होनहार छात्रों और उनके अभिभावकों में भारी आक्रोश है। छात्रों का कहना है कि एक तरफ वे दिन-रात मेहनत कर परीक्षा की तैयारी करते हैं, वहीं दूसरी तरफ निजी कॉलेज मोटी रकम लेकर बैकडोर से ऐसे छात्रों को पास करा देते हैं जो साल भर कॉलेज भी नहीं आते। शिक्षाविदों का मानना है कि जब तक निजी कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाने की प्रथा पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जाएगी और सरकारी पर्यवेक्षकों की लाइव वेबकास्टिंग के जरिए निगरानी नहीं होगी, तब तक इस तरह के शिक्षा माफियाओं के हौसलों को पस्त करना नामुमकिन होगा।

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