UPSC और RAS की तैयारी छोड़ नहीं, राजनीति में उतरीं दो बेटियां! बाड़मेर में नई मिसाल

UPSC और RAS की तैयारी छोड़ नहीं, राजनीति में उतरीं दो बेटियां! बाड़मेर में नई मिसाल

राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर से स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर एक प्रेरणादायी और बेहद दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रशासनिक सेवा की तैयारी के पारंपरिक दायरे से बाहर निकलकर दो उच्च-शिक्षित युवतियों ने सक्रिय राजनीति के जरिए जनसेवा की राह चुनी है।

यूपीएससी की तैयारी में जुटीं अलीशा देव और आरएएस की परीक्षा दे चुकीं खुशबू आचार्य बाड़मेर नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रही हैं। दोनों युवतियों का स्पष्ट मानना है कि प्रशासनिक तंत्र की तरह राजनीति भी जनता की सेवा का एक सशक्त और प्रभावी माध्यम है।

UPSC एस्पिरेंट अलीशा देव वार्ड 25 से मैदान में, घर-घर जनसंपर्क पर जोर

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहीं 24 वर्षीय अलीशा देव को कांग्रेस ने वार्ड संख्या 25 से अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है। अलीशा के अनुसार, राजनीति जनता के जमीनी मुद्दों को सीधे तौर पर समझने और उनके त्वरित समाधान का सबसे बेहतरीन मंच है। उनके पिता एक विद्यालय में उपप्रधानाचार्य के पद पर सेवारत हैं, जबकि उनके चाचा नरेश देव सारण कांग्रेस के टिकट पर दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और एक बार विधायक भी रहे हैं। अलीशा ने बताया कि उनका मुख्य लक्ष्य घर-घर जाकर नागरिकों की वास्तविक समस्याओं को चिन्हित करना और वार्ड स्तर पर उनका ठोस समाधान निकालना है।

RAS अभ्यर्थी खुशबू आचार्य वार्ड 7 से प्रत्याशी, युवाओं को राजनीति से जुड़ने का दिया संदेश

वहीं दूसरी ओर, राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) की मुख्य परीक्षा दे चुकीं 25 वर्षीय खुशबू आचार्य को कांग्रेस ने वार्ड संख्या 7 से चुनावी समर में उतारा है। खुशबू के पिता पूर्व पार्षद रह चुके हैं और वर्तमान में मोटर पार्ट्स का व्यवसाय करते हैं। खुशबू का कहना है कि वे अपने पिता की राजनीतिक विरासत और जनता से जुड़ाव को आगे बढ़ाते हुए वार्ड का सर्वांगीण विकास करना चाहती हैं। उन्होंने युवाओं से लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए राजनीति में खुलकर आगे आने का आह्वान करते हुए कहा कि केवल मतदान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

किताबों के ज्ञान की अब चुनावी धरातल पर होगी परीक्षा

बाड़मेर नगर परिषद चुनाव में अलीशा और खुशबू की उम्मीदवारी ने पूरे जिले में नई सियासी हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस द्वारा इन युवा और शिक्षित चेहरों पर दांव लगाए जाने से स्थानीय राजनीति में युवाओं की भागीदारी की नई मिसाल कायम हुई है। इन दोनों बेटियों के लिए यह मुकाबला महज एक चुनावी टिकट तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतियोगी किताबों से सीखे नीतिगत ज्ञान को धरातल पर क्रियान्वित कर जनता की सेवा में बदलने की एक बड़ी परीक्षा भी है।