कौन हैं सरेराह थप्पड़ कांड से चर्चा में आईं RPS अंजू यादव
राजस्थान की प्रशासनिक और पुलिस सेवा से इस वक्त एक ऐसी सनसनीखेज और हाई-प्रोफाइल खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे राज्य के सियासी और कानूनी गलियारों में भूचाल ला दिया है। अजमेर जिले में तैनात आरपीएस अधिकारी अंजू यादव हाल ही में एक सार्वजनिक विवाद और कथित तौर पर सरेराह थप्पड़ मारने की घटना के बाद अचानक केंद्र की सुर्खियों में आ गई हैं। इस घटना के तूल पकड़ने के बाद अजमेर के वकीलों और बार एसोसिएशन ने आरपीएस अंजू यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उनके तत्काल निलंबन तथा सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। प्रशासनिक महकमे में अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जानी जाने वाली अंजू यादव का शुरुआती जीवन और यहां तक पहुंचने का सफर काफी संघर्षों से भरा रहा है, लेकिन मौजूदा विवाद ने उनके करियर के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
आखिर क्या है पूरा थप्पड़ कांड और क्यों अजमेर में वकीलों का गुस्सा सातवें आसमान पर है?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अजमेर में प्रशासनिक ड्यूटी के दौरान किसी स्थानीय मामले को लेकर आरपीएस अंजू यादव और वहां के कुछ स्थानीय लोगों तथा वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई थी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोप है कि अधिकारी द्वारा कानून की मर्यादा को ताक पर रखकर सरेराह एक पक्ष के साथ हाथापाई और थप्पड़ कांड जैसी घटना को अंजाम दिया गया। इस घटना का वीडियो और खबरें जैसे ही सोशल मीडिया और स्थानीय वकीलों तक पहुंचीं, वैसे ही बार एसोसिएशन में भारी आक्रोश फैल गया। वकीलों का कहना है कि एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी द्वारा इस तरह का अलोकतांत्रिक और आक्रामक व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसके विरोध में वकीलों ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार करते हुए कलेक्ट्रेट और पुलिस अधीक्षकों के दफ्तर के बाहर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
संघर्षों और विपरीत परिस्थितियों को मात देकर आरपीएस अधिकारी बनीं अंजू यादव की पूरी कहानी
व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन की बात करें तो आरपीएस अंजू यादव की यहां तक पहुंचने की यात्रा आसान नहीं रही है। बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली अंजू यादव ने अपनी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई और करियर की शुरुआत में कड़ा संघर्ष किया है। प्रशासनिक सेवाओं में आने की उनकी ललक और कठिन परिश्रम के दम पर उन्होंने राजस्थान लोक सेवा आयोग की कठिन परीक्षा पास की और पुलिस सेवा में चुनी गईं। फील्ड पोस्टिंग के दौरान उन्होंने कई मौकों पर अपराधियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए और अपनी एक दबंग और सख्त महिला अधिकारी की छवि गढ़ी। उनके करीबियों का कहना है कि वे अपने काम को लेकर बेहद अनुशासित रहती हैं, लेकिन कई बार उनका यही कड़ा रवैया विवादों की वजह भी बन जाता है।
पुलिस प्रशासन पर दबाव और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश, आगे क्या होगा अंजाम?
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने और वकीलों के मुखर होने के बाद राजस्थान पुलिस के आला अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए हैं। डीआईजी और आईजी स्तर के अधिकारी इस बात की तह तक जाने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर विवाद की असली जड़ क्या थी और क्या दोनों पक्षों के बीच इसे सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सकता था या नहीं। फिलहाल अजमेर में वकीलों का आंदोलन जारी है और वे इस बात पर अड़े हैं कि जब तक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होती, उनका संघर्ष थमेगा नहीं। इस हाई-प्रोफाइल विवाद ने एक बार फिर वर्दी के रुतबे और आम नागरिकों तथा वकीलों के अधिकारों के बीच की खींचतान को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।