नूंह-अलवर हाईवे को फोरलेन बनाने का काम कानूनी पेंच में फंसा: 10 हजार पेड़ों पर अटकी फाइल, 440 करोड़ के प्रोजेक्ट पर लगा ब्रेक
हरियाणा के नूंह मुख्यालय से राजस्थान सीमा तक सफर को रफ्तार देने वाला गुरुग्राम-अलवर नेशनल हाईवे का बहुप्रतीक्षित चौड़ीकरण कार्य सरकारी फाइलों में उलझ गया है। करीब 440 करोड़ रुपये के इस महाप्रोजेक्ट को सरकार से हरी झंडी मिलने और टेंडर जारी होने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो सका है। निर्माण में सबसे बड़ी रुकावट वन विभाग की मंजूरी न मिलना है, जिसके चलते अब लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को मामले के निपटारे के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।
केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत इस परियोजना के तहत 48 किलोमीटर लंबे हिस्से को पहले चरण में फोरलेन में तब्दील किया जाना है। कुल बजट में से 310 करोड़ रुपये हाईवे को चौड़ा करने पर और 130 करोड़ रुपये नूंह से मालब तथा भादस गांव में प्रस्तावित बाईपास निर्माण पर खर्च होने हैं। इस पूरे मार्ग से करीब 50 गांव जुड़ते हैं और स्थानीय ग्रामीणों की सहूलियत व हादसों की रोकथाम के लिए नौ व्हीकल अंडरपास (फ्लाईओवर) बनाए जाने प्रस्तावित हैं।
काम अटकने की मुख्य वजह क्या
परियोजना के अटकने की मुख्य वजह हाईवे के दोनों किनारों पर खड़े करीब दस हजार पेड़ हैं, जिनमें सबसे ज्यादा तादाद सफेदा (यूकेलिप्टस) के पेड़ों की है। निर्माण एजेंसी को काम सौंपने से पहले लोक निर्माण विभाग ने वन विभाग से पेड़ काटने की अनुमति मांगी थी, लेकिन कोर्ट के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए वन विभाग ने अब तक एनओसी जारी नहीं की है। नूंह लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रदीप संधू का कहना है कि पेड़ कटाई की मंजूरी नहीं मिलने के कारण विभाग ने अब अदालत में अर्जी दाखिल कर राहत मांगी है।
स्थानीय स्तर पर इस सड़क को चौड़ा करने की मांग पिछले एक दशक से चल रही है। संकरी दो लेन वाली इस सड़क पर भारी वाहनों के लगातार बढ़ते दबाव के कारण आए दिन भीषण सड़क हादसे होते हैं, जिसके चलते ग्रामीण इसे 'खूनी सड़क' तक कहने लगे हैं। समाजसेवी राजुद्दीन, सूबेदार और रमजान का कहना है कि मेवात और अलवर के बीच व्यापारिक आवाजाही तेज करने और लोगों की जान बचाने के लिए इस हाईवे का जल्द से जल्द चार लेन होना बेहद जरूरी है।
उधर, फरीदाबाद में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के तोड़फोड़ दस्ते ने बड़खल फ्लाईओवर के नीचे मंगलवार को बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी चलाकर करीब 50 अवैध झुग्गियों को ध्वस्त कर सरकारी जमीन खाली कराई गई। एचएसवीपी के कनिष्ठ अभियंता योगेश ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण मुक्त कराई गई इस जगह पर अब दोबारा कब्जे रोकने और पर्यावरण सुधार के लिए सघन पौधरोपण किया जाएगा।