भड़ली नवमी 2026: क्या इस दिन बंद रहेंगे शुभ कार्य? जानें अबूझ मुहूर्त का सच और घर में बरकत लाने के खास उपाय

भड़ली नवमी 2026: क्या इस दिन बंद रहेंगे शुभ कार्य? जानें अबूझ मुहूर्त का सच और घर में बरकत लाने के खास उपाय

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को 'भड़ली नवमी' के रूप में मनाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इसे 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, यानी ऐसा दिन जब कोई भी शुभ काम करने के लिए पंडित से मुहूर्त पूछने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन इस साल, 22 जुलाई 2026 को पड़ने वाली भड़ली नवमी कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण शुभ कार्यों के लिए वर्जित मानी जा रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या इस दिन वाकई कोई काम नहीं हो सकता? आइए जानते हैं ज्योतिषीय दृष्टिकोण और उन उपायों के बारे में जो आपके जीवन में 'चांदी' बरसा सकते हैं।

भड़ली नवमी और शुभ कार्यों पर रोक क्यों?

भड़ली नवमी का दिन विवाह, गृह प्रवेश और नई खरीदारी के लिए साल के सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। लेकिन इस बार ग्रहों की स्थिति और पंचांग के कुछ विशेष योगों के कारण इस दिन विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए निषेध बताया जा रहा है। इसका मुख्य कारण कुछ विशिष्ट तिथियों का संयोग और उस दिन के नक्षत्रों की स्थिति है, जो शास्त्रोक्त रूप से विवाह के लिए उपयुक्त नहीं माने जा रहे हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि यह दिन निष्फल है। यह दिन दान-पुण्य और आध्यात्मिक कार्यों के लिए आज भी अत्यंत शक्तिशाली माना गया है।

घर में बरकत और सुख-समृद्धि लाने के अचूक उपाय

भड़ली नवमी का दिन अबूझ मुहूर्त होने के कारण माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। यदि आप भी अपने जीवन में तरक्की और आर्थिक संपन्नता चाहते हैं, तो इस दिन ये उपाय जरूर करें:

  • माता लक्ष्मी की पूजा: भड़ली नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के बाद माता लक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक जलाएं और उन्हें खीर का भोग लगाएं। इससे घर की आर्थिक तंगी दूर होती है।

  • दान का महत्व: इस दिन जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को भोजन कराने और अपनी क्षमतानुसार अनाज, वस्त्र या धन का दान करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है।

  • भगवान विष्णु का अभिषेक: भड़ली नवमी पर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। माना जाता है कि ऐसा करने से बिगड़े हुए काम बनने लगते हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है।

  • पीपल के वृक्ष की सेवा: यदि आप धन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो इस दिन पीपल के वृक्ष के नीचे गाय के घी का दीपक जलाएं। यह उपाय आपकी सोई हुई किस्मत को जगा सकता है।

अबूझ मुहूर्त का आखिरी मौका, शुभ कार्यों की तैयारी

भड़ली नवमी के बाद से चतुर्मास (चातुर्मास) का आरंभ हो जाता है, जिसका अर्थ है कि अगले चार महीनों तक कोई भी विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं होते। इसलिए, भड़ली नवमी को साल का आखिरी 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है। जिन लोगों के विवाह में बाधाएं आ रही हैं, उन्हें इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करनी चाहिए। यह पूजा विवाह के योग बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होती है।

Latest Posts