नवरात्रि के इन पवित्र दिनों में मुख्य द्वार पर कर लें ये अचूक वास्तु उपाय

नवरात्रि के इन पवित्र दिनों में मुख्य द्वार पर कर लें ये अचूक वास्तु उपाय

पवित्र और ऊर्जा से भरपूर पावन पर्व नवरात्रि (Navratri 2026) का शुभारंभ होने में अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं, और हर तरफ भक्ति का माहौल धीरे-धीरे परवान चढ़ने लगा है. हिंदू धर्म में शारदीय और चैत्र नवरात्रि दोनों का ही अत्यधिक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है, क्योंकि इन नौ दिनों में माता दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इन दिनों में जगत जननी मां शक्ति साक्षात पृथ्वी लोक पर अपने भक्तों के घरों में वास करने के लिए आती हैं और उनके सभी दुखों का नाश कर देती हैं. लेकिन शास्त्रों और वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के जानकारों का यह कहना है कि मां लक्ष्मी और माता दुर्गा का आशीर्वाद उसी घर में प्रवेश करता है, जिस घर का मुख्य द्वार (Main Entrance) पूरी तरह से साफ-सुथरा, सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण और वास्तु के नियमों के अनुसार सजा होता है. वास्तु गुरुओं के अनुसार, मुख्य द्वार को घर का चेहरा कहा जाता है जहां से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की ऊर्जाएं प्रवेश करती हैं. इसलिए नवरात्रि के इन नौ दिनों का पूरा लाभ उठाने और मां लक्ष्मी को अपने घर की ओर आकर्षित करने के लिए मुख्य द्वार से जुड़े कुछ बेहद खास और अचूक वास्तु उपायों को अपनाना बहुत जरूरी माना गया है, जिन्हें करने से घर की तिजोरियां हमेशा धन-धान्य से भरी रहती हैं.

मुख्य द्वार की साफ-सफाई और पवित्रता का रखें विशेष ध्यान

वास्तु शास्त्र में इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है कि घर का मुख्य द्वार कभी भी गंदा या cluttered नहीं होना चाहिए. नवरात्रि के इन नौ पावन दिनों में मां दुर्गा का स्वागत करने से पहले अपने घर के मुख्य दरवाजे की अच्छी तरह से साफ-सफाई करें. ध्यान रखें कि दरवाजे के आसपास जूते-चप्पल बिखरे हुए न हों और न ही वहां किसी प्रकार का कबाड़ या कचरा इकट्ठा हो, क्योंकि गंदगी उन स्थानों पर वास करती है जहां से मां लक्ष्मी हमेशा के लिए रूठकर चली जाती हैं. सुबह सवेरे उठकर मुख्य द्वार को साफ पानी से धोएं और उसमें थोड़ा सा गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र करें. ऐसा करने से घर के भीतर मौजूद तमाम प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं और दैवीय शक्तियों के प्रवेश के लिए मार्ग प्रशस्त होता है.

मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए मुख्य द्वार पर बनाएं सुंदर और शुभ रंगोली

भारतीय संस्कृति में किसी भी शुभ अवसर, त्योहार या पर्व पर घर के द्वार पर रंगोली बनाना और अल्पना सजाना बहुत ही शुभ और मंगलकारी माना जाता है. नवरात्रि के दौरान मां लक्ष्मी को अपने घर में आमंत्रित करने के लिए मुख्य द्वार के दोनों तरफ या चौखट के सामने चावल के आटे, सिंदूर या रंग-बिरंगे फूलों से खूबसूरत रंगोली जरूर बनाएं. रंगोली में स्वास्तिक, ओम या कमल के फूल का चिह्न बनाना अत्यंत फलदायी होता है, क्योंकि कमल का फूल माता लक्ष्मी का सबसे प्रिय आसन माना जाता है. जब सुबह-सुबह माता लक्ष्मी आपके घर के द्वार पर पहुंचती हैं, तो मुख्य द्वार पर बनी यह कलात्मक और जीवंत रंगोली देखकर वे अत्यंत प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं.

आम या अशोक के पत्तों की ताजी बंधनवार से सजाएं घर की चौखट

नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि के दिन घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों की ताजी और हरी बंधनवार (Toran) बांधना बेहद शुभ माना जाता है. वास्तु और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ये पत्ते न केवल घर की शोभा बढ़ाते हैं बल्कि वातावरण में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और नकारात्मक तरंगों को भी अंदर आने से रोकते हैं. बंधनवार हमेशा ताजे पत्तों की ही होनी चाहिए और जब पत्ते सूखने लगें तो उन्हें बदलकर नए पत्ते लगा देना चाहिए. मुख्य द्वार पर हल्दी और कुमकुम से दोनों तरफ शुभ-लाभ और स्वास्तिक का चिह्न बनाएं, जिससे घर में किसी भी प्रकार की बुरी नजर या तांत्रिक बाधा का प्रवेश न हो सके और घर का प्रत्येक सदस्य सुरक्षित रहे.

मुख्य द्वार पर दीपक जलाने और रोशनी के वास्तु नियम

शाम के समय माता रानी की पूजा-अर्चना के दौरान घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना मां लक्ष्मी के आगमन का सबसे बड़ा संकेत माना जाता है. नवरात्रि के इन नौ दिनों में रोज शाम को मुख्य द्वार के दाहिने हाथ की तरफ शुद्ध देसी घी का एक मुखी दीपक जरूर प्रज्वलित करें. आप चाहें तो दीपक में थोड़े से काले तिल या चावल के दाने भी डाल सकते हैं, जिससे घर की आर्थिक तंगी दूर होती है. इस बात का विशेष ध्यान रखें कि नवरात्रि की रातों में कभी भी घर का मुख्य द्वार पूरी तरह से अंधेरे में नहीं रहना चाहिए; दरवाजे पर पर्याप्त रोशनी या एक छोटा सा बल्ब जलता रहना चाहिए, क्योंकि रोशनी सकारात्मकता और प्रकाश का प्रतीक है जो मां लक्ष्मी को अपनी ओर खींचती है.