हाथल गांव में है 51 फीट का कमल की आकृति का ब्रह्मा मंदिर, 1400 साल पुराना है इसका इतिहास
आम तौर पर यही माना जाता है कि पूरे विश्व में सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा का एकमात्र ऐतिहासिक मंदिर राजस्थान के अजमेर जिले के पुष्कर में स्थित है। लेकिन राजस्थान की पावन धरोहर अपने आंचल में कई ऐसे अद्भूत और रहस्यमयी स्थापत्य समेटे हुए है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। सिरोही जिले के ऐतिहासिक हाथल गांव में स्थित 51 फीट ऊंचा कमल की आकृति (Lotus Shape) का ब्रह्मा मंदिर भारतीय वास्तुकला और प्राचीन सनातन परंपरा का एक असीम प्रतीक है। लगभग 1400 साल पुराना यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अनूठी स्थापत्य शैली के कारण दुनिया भर के इतिहासकारों और पर्यटकों के लिए कौतुहल का विषय बना हुआ है। 51 फीट ऊंचे इस मंदिर को एक विशालकाय खिलते हुए कमल के फूल के आकार में निर्मित किया गया है, जो सीधे तौर पर उस पौराणिक मान्यता को दर्शाता है जिसमें भगवान ब्रह्मा का प्राकट्य भगवान विष्णु की नाभि से निकले कमल पर हुआ था।
51 फीट ऊंचे भव्य कमल रूपी स्थापत्य का विहंगम दृश्य: पत्थरों पर उकेरी गई शिल्प कला की अनूठी कहानी
हाथल गांव के इस प्राचीन मंदिर की वास्तुकला इतनी अद्भुत है कि इसे देखते ही दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। मंदिर का मुख्य शिखर 51 फीट ऊंचा है और इसके आधार से लेकर ऊपरी हिस्से तक कमल की पंखुड़ियों की सुंदर नक्काशी की गई है। इतिहासकारों के अनुसार, 7वीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर के निर्माण में बिना किसी आधुनिक सीमेंट या चूने का इस्तेमाल किए विशालकाय पत्थरों को आपस में इंटरलॉकिंग तकनीक से जोड़ा गया था। सदियों पुराना होने के बावजूद इस मंदिर की संरचना आज भी पूरी भव्यता के साथ खड़ी है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान ब्रह्मा की चतुर्मुखी प्रतिमा विराजमान है, जिनके साथ माता सावित्री की भी अति सुंदर मूर्ति स्थापित है। पत्थरों पर उकेरी गई प्राचीन लिपियां और मूर्तियां इस बात का प्रमाण हैं कि अपने समय में हाथल गांव एक बड़ा व्यापारिक और आध्यात्मिक केंद्र हुआ करता था।
आखिर क्यों कम ही लोग जानते हैं हाथल के इस अनमोल रत्न के बारे में? संरक्षण की दरकार और पर्यटन की संभावनाएं
पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर को जहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपार ख्याति मिली, वहीं सिरोही का यह हाथल गांव स्थित ब्रह्मा मंदिर मुख्यधारा के पर्यटन मानचित्र पर जगह बनाने के लिए संघर्ष करता रहा। स्थानीय ग्रामीणों और इतिहास के जानकारों का कहना है कि प्रचार-प्रसार की कमी और उचित संरक्षण न मिलने के कारण सदियों पुरानी यह ऐतिहासिक इमारत गुमनामी के अंधेरे में सिमटकर रह गई। हालांकि, हाल के वर्षों में सोशल मीडिया, स्थानीय शोधकर्ताओं और पुरातत्व प्रेमियों की पहल के कारण इस मंदिर की भव्यता फिर से लोगों के सामने आ रही है। राजस्थान पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन अब इस 1400 साल पुरानी धरोहर को संरक्षित करने तथा इसे राज्य के प्रमुख टूरिज्म सर्किट से जोड़ने के प्रयासों में जुट गया है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन विकास की नई उम्मीदें जगी हैं।
कैसे पहुंचे हाथल गांव और क्या है धार्मिक महत्व: दूर-दराज से खिंचे चले आते हैं श्रद्धालु
राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित हाथल गांव तक पहुंचना बेहद आसान है। यह स्थान निकटतम रेलवे स्टेशन और हाइवे से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। कार्तिक पूर्णिमा, धार्मिक पर्वों और विशेष अवसरों पर यहां स्थानीय श्रद्धालुओं का तांता लगता है। मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त पुष्कर दर्शन के बाद हाथल गांव के इस 51 फीट ऊंचे कमल रूपी ब्रह्मा मंदिर के दर्शन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में बौद्धिक तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। यदि आप भी प्राचीन भारतीय वास्तुकला, इतिहास और धार्मिक स्थलों के भ्रमण के शौकीन हैं, तो सिरोही का यह 1400 साल पुराना कमल मंदिर आपके लिए एक अवश्य देखने योग्य स्थल (Must-Visit Place) है।