पैरा एशियन गेम्स में भारत का डबल धमाका: संदीप सिंह मान और हैनी ने वर्ल्ड रिकॉर्ड ध्वस्त कर जीता गोल्ड, मेडल टैली 100 पार

पैरा एशियन गेम्स में भारत का डबल धमाका: संदीप सिंह मान और हैनी ने वर्ल्ड रिकॉर्ड ध्वस्त कर जीता गोल्ड, मेडल टैली 100 पार

जापान के नागोया सिटी स्थित मिज़ुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में जारी पैरा एशियन गेम्स 2026 के ट्रैक एंड फील्ड पर भारतीय पैरा-एथलीटों का दबदबा पूरी दुनिया देख रही है। ऐतिहासिक प्रदर्शन के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए भारत के स्टार धावक संदीप सिंह मान ने पुरुषों की 400 मीटर स्पर्धा में अविश्वसनीय तेजी दिखाते हुए न केवल गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया, बल्कि नया वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम लिख दिया। संयुक्त T44, T42 और T64 क्लासिफिकेशन के इस कड़े मुकाबले में संदीप ने महज 52.28 सेकंड का समय निकालकर फिनिश लाइन पार की।

शुरुआती सेकंडों से ही आक्रामक गति बनाए रखने वाले संदीप को अंतिम लैप में सऊदी अरब के धावक अलसाना नूर से जोरदार चुनौती मिली, लेकिन भारतीय एथलीट ने गजब का संयम और संतुलन दिखाते हुए पहले स्थान पर कब्जा बरकरार रखा। इसी रोमांचक रेस की लेन नंबर 5 में भाग ले रहे एक और भारतीय एथलीट अजय कुमार ने 53.61 सेकंड के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत की दोहरी जीत सुनिश्चित की। इस स्वर्णिम सफलता के साथ ही भारत ने इन खेलों में कुल पदकों का ऐतिहासिक सैकड़ा (100+) भी पार कर लिया।

ट्रैक पर संदीप के करिश्मे के बाद फील्ड स्पर्धा में भी तिरंगा पूरी शान से लहराया। पुरुषों के जैवलिन F37/38 फाइनल में भारत के पैरा-जैवलिन थ्रोअर हैनी ने भाला फेंक में ऐसा तूफान खड़ा किया कि चीन का 18 साल पुराना कीर्तिमान धराशायी हो गया। हैनी ने एक ही प्रतियोगिता के भीतर दो बार विश्व रिकॉर्ड को नया मुकाम दिया। उन्होंने पहले अपने पांचवें प्रयास में 59.72 मीटर की दूरी नापकर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया और फिर ठीक अगले यानी छठे व अंतिम थ्रो में 60.49 मीटर का विशाल थ्रो फेंककर अपना ही रिकॉर्ड चकनाचूर कर दिया। इस महा-रिकॉर्ड के साथ हैनी ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जिससे टूर्नामेंट में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़कर 26 पहुंच गई। इससे पहले यह वैश्विक रिकॉर्ड 57.81 मीटर का था, जिसे 2008 में चीन के शिया डोंग ने स्थापित किया था। हांग्जो पैरा एशियन गेम्स के भी स्वर्ण पदक विजेता रहे हैनी F37 क्लासिफिकेशन के अंतर्गत खेलते हैं, जो मुख्य रूप से हाइपरटोनिया, एटैक्सिया या एथेटोसिस जैसी न्यूरोलॉजिकल स्थितियों से प्रभावित एथलीटों की श्रेणी है। जैवलिन और डिस्कस थ्रो दोनों में महारत रखने वाले हैनी के इस ऐतिहासिक प्रयास ने वैश्विक मंच पर भारत के पैरा-एथलेटिक्स के सुनहरे युग पर मुहर लगा दी है।