'ऐसे कैसे जीतेंगे वर्ल्ड कप?' पिछले 5 सालों में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले 3 धाकड़ गेंदबाजों की प्लेइंग XI से नो एंट्री! टीम चयन पर खड़े हुए बड़े सवाल

'ऐसे कैसे जीतेंगे वर्ल्ड कप?' पिछले 5 सालों में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले 3 धाकड़ गेंदबाजों की प्लेइंग XI से नो एंट्री! टीम चयन पर खड़े हुए बड़े सवाल

भारतीय क्रिकेट टीम (Team India) के चयन और रणनीतियों को लेकर एक बार फिर से क्रिकेट गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है। विश्व कप या किसी भी बड़े आईसीसी टूर्नामेंट से पहले अक्सर टीम कॉम्बिनेशन को लेकर चर्चा होती है, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग और हैरान करने वाला है। पिछले पांच सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट झटकने वाले टॉप 3 धाकड़ गेंदबाजों को मौजूदा प्लेइंग इलेवन (Playing XI) से बाहर रखा जा रहा है। सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट एक्सपर्ट्स के बीच यही सवाल गूंज रहा है— "अगर मैच जिताने वाले इतने बड़े विकेट-टेकर ही बाहर बैठेंगे, तो आखिर वर्ल्ड कप कैसे जीतेंगे?"

पिछले 5 सालों के आंकड़े दे रहे हैं गवाही

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के पिछले पांच साल के रिकॉर्ड्स को खंगाला जाए, तो भारत के कुछ गेंदबाजों ने अपनी गेंदबाजी के दम पर अकेले दम पर कई मुकाबले जिताए हैं। इन गेंदबाजों ने लगातार विकेट निकालकर विपक्षी टीमों की कमर तोड़ी है। इसके बावजूद, आधुनिक रणनीतियों, इम्पैक्ट प्लेयर जैसे ट्रेंड्स या टीम कॉम्बिनेशन के नाम पर इन अनुभवी गेंदबाजों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

क्रिकेट पंडितों का मानना है कि किसी भी बड़े टूर्नामेंट को जीतने के लिए अनुभव और विकेट लेने की क्षमता (Wicket-taking ability) सबसे अहम होती है। जब आपके पास ऐसे गेंदबाज मौजूद हैं जिन्होंने ग्लोबल लेवल पर खुद को साबित किया है, तो उनकी प्लेइंग इलेवन से गैरमौजूदगी टीम मैनेजमेंट की प्लानिंग पर बड़े सवालिया निशान खड़े करती है।

क्या टीम मैनेजमेंट का नया फॉर्मूला बन रहा है नासूर?

आधुनिक क्रिकेट में ऑलराउंडर्स की भरमार करने और बैटिंग गहराई (Batting Depth) बढ़ाने के चक्कर में कई बार स्पेशलिस्ट गेंदबाजों की कुर्बानी देनी पड़ रही है। हालांकि, फैंस और पूर्व क्रिकेटर्स का एक बड़ा वर्ग इस बात से बिल्कुल इत्तेफाक नहीं रखता। उनका तर्क है कि भले ही बल्लेबाज मैच में रन बनाते हैं, लेकिन टूर्नामेंट्स हमेशा गेंदबाज ही जिताते हैं।

यदि शुरुआती ओवरों या डेथ ओवर्स में विकेट चटकाने वाले मुख्य गेंदबाज ही बेंच पर बैठे नजर आएंगे, तो विपक्षी टीमों के खिलाफ दबाव बना पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। अब देखना यह होगा कि क्या आगामी मुकाबलों और वर्ल्ड कप के अहम मैचों से पहले टीम मैनेजमेंट अपने इस प्लेइंग इलेवन फॉर्मूले में कोई बदलाव करती है या इन स्टार गेंदबाजों को बाहर बैठकर ही मैच देखना पड़ेगा।

 

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