‘मैं चुपचाप बैठकर ताली बजाने लगा था...’ जब ईशान किशन की एंट्री से टूट गए थे संजू सैमसन, फिर पत्नी के फॉर्मूले ने बदली किस्मत
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन की प्रतिभा से हर कोई वाकिफ है, लेकिन उनका इंटरनेशनल करियर हमेशा टीम में अंदर-बाहर होने के उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। हाल ही में संजू सैमसन ने अपने करियर के एक बेहद भावुक और कठिन दौर को लेकर बड़ा खुलासा किया है। सैमसन ने स्वीकार किया कि एक समय ऐसा आया था जब टीम में ईशान किशन की तूफानी एंट्री और लगातार मिल रहे मौकों के बाद उन्होंने भारतीय टीम में दोबारा वापसी की उम्मीद पूरी तरह छोड़ दी थी। उन्होंने मान लिया था कि अब उन्हें सिर्फ बेंच पर बैठकर दूसरों के लिए तालियां ही बजानी होंगी, लेकिन तभी उनकी पत्नी चारुलता का एक खास 'सक्सेस फॉर्मूला' काम कर गया।
जब ईशान की एंट्री से थम सा गया था संजू सैमसन का करियर
एक इंटरव्यू के दौरान संजू सैमसन ने टीम इंडिया के अंदर चलने वाले तगड़े कॉम्पिटिशन पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि जब वह शानदार फॉर्म में होने के बावजूद प्लेइंग इलेवन से बाहर चल रहे थे और ऋषभ पंत के साथ-साथ ईशान किशन जैसे युवा विकेटकीपरों को टीम में लगातार मौके मिल रहे थे, तो वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गए थे। सैमसन ने कहा, "ईशान बेहतरीन खेल रहे थे और मुझे लग रहा था कि अब मेरे लिए सारे दरवाजे बंद हो चुके हैं। मैं बस ड्रेसिंग रूम में चुपचाप बैठकर दूसरों की सफलता पर ताली बजाने लगा था और सोचने लगा था कि शायद मेरा अंतरराष्ट्रीय सफर यहीं तक था।"
नैगेटिविटी के उस दौर में पत्नी चारुलता ने दिया 'जादुई फॉर्मूला'
संजू ने बताया कि जब वह पूरी तरह से निराशा के भंवर में डूब रहे थे, तब उनकी पत्नी चारुलता उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरीं। चारुलता ने उन्हें एक नया नजरिया और फॉर्मूला दिया। उन्होंने संजू से कहा, "तुम्हें इस बात पर ध्यान देना बंद करना होगा कि सिलेक्टर्स क्या कर रहे हैं या टीम मैनेजमेंट किसे मौका दे रहा है। तुम्हारा काम सिर्फ रन बनाना है, चाहे वो डोमेस्टिक क्रिकेट हो, आईपीएल हो या नेट प्रैक्टिस। खुद को इस कदर तैयार करो कि जब भी मौका मिले, तुम उसे चाहकर भी गंवा न सको।"
वाइफ की सलाह मानकर बदला माइंडसेट और मैदान पर मची तबाही
पत्नी के इस फॉर्मूले को संजू सैमसन ने अपने जीवन में उतार लिया। उन्होंने टीम में चयन की चिंता छोड़कर अपनी बैटिंग तकनीकों और फिटनेस पर काम करना शुरू किया। इसका नतीजा यह हुआ कि जब भी उन्हें आईपीएल या भारतीय जर्सी में गिने-चुने मौके मिले, उन्होंने अपने आक्रामक अंदाज से आलोचकों के मुंह बंद कर दिए। हाल के समय में उनके बल्ले से निकले शतकों और मैच जिताऊ पारियों ने यह साबित कर दिया कि चारुलता का वह 'फोकस ऑन योरसेल्फ' वाला फॉर्मूला उनके करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
संजू सैमसन के फैंस के लिए बड़ी सीख
संजू सैमसन की यह कहानी सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अपने कार्यक्षेत्र में कठिन कॉम्पिटिशन और रिजेक्शन का सामना करते हैं। सैमसन ने दिखाया कि निराशा के दौर में अगर आपके पास एक सही सपोर्ट सिस्टम (जैसे उनकी पत्नी) हो और आप बाहरी परिस्थितियों को छोड़कर अपनी मेहनत पर ध्यान केंद्रित करें, तो किस्मत को भी आपके आगे झुकना पड़ता है। आज सैमसन न सिर्फ टीम इंडिया के एक भरोसेमंद बल्लेबाज हैं, बल्कि करोड़ों फैंस के दिलों की धड़कन भी हैं।