म्यूनिख में गूंजा भारत का डंका: ईशा सिंह ने तोड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड, दिग्गज ओलंपिक चैंपियंस को पछाड़कर जीता गोल्ड मेडल

म्यूनिख में गूंजा भारत का डंका: ईशा सिंह ने तोड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड, दिग्गज ओलंपिक चैंपियंस को पछाड़कर जीता गोल्ड मेडल

म्यूनिख में चल रहे आईएसएसएफ (ISSF) राइफल, पिस्टल और शॉटगन विश्व कप में भारतीय निशानेबाजी का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय लिखा गया है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। भारत की सनसनीखेज शूटर ईशा सिंह ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में न केवल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि एक ऐसा नया विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित कर दिया है जिसे तोड़ पाना किसी भी शूटर के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। महज 21 साल की ईशा ने दुनिया के सबसे दबाव वाले मंच पर अपनी बंदूकों से जो दहाड़ लगाई है, उसकी गूंज दूर तक सुनाई दे रही है।

ओलंपिक चैंपियंस को पछाड़कर रचा इतिहास

फाइनल मुकाबले का मंच बेहद चुनौतीपूर्ण था। ईशा सिंह का सामना मौजूदा ओलंपिक चैंपियन यांग जी-इन और पूर्व विश्व चैंपियन डोरेन वेनेकैंप जैसी दिग्गज खिलाड़ियों से था। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में जहां बड़े-बड़े सूरमाओं के हाथ कांप जाते हैं, वहां ईशा ने गजब के संयम और एकाग्रता का परिचय दिया। उन्होंने फाइनल में 50 में से 43 सटीक निशाने (हिट्स) लगाकर सीनियर और जूनियर दोनों श्रेणियों में एक नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही ईशा ने इस साल के अंत में रोम में होने वाले प्रतिष्ठित आईएसएसएफ विश्व कप फाइनल के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है।

शुरुआत से ही बनाई बढ़त, जर्मनी और बुल्गारिया की चुनौती हुई ध्वस्त

क्वालीफाइंग राउंड में ईशा सिंह ने 587-19x के कुल स्कोर के साथ पांचवें स्थान पर रहकर फाइनल का टिकट कटाया था, जिसमें प्रेसिजन में 293 और रैपिड फायर में 294 अंक शामिल थे। लेकिन असली खेल तो फाइनल में शुरू हुआ। पदक राउंड की शुरुआत करते ही भारतीय निशानेबाज ने लगातार तीन परफेक्ट सीरीज दागकर विपक्षी खिलाड़ियों को बैकफुट पर धकेल दिया। एलिमिनेशन राउंड के आते-आते कई अनुभवी शूटर दबाव में लड़खड़ा गए, लेकिन ईशा की सटीकता लगातार बढ़ती गई।

इस मुकाबले में जर्मनी की स्टार डोरेन वेनेकैंप 38 हिट्स के साथ दूसरे स्थान पर रहीं और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वहीं, बुल्गारिया की मिरोस्लावा मिन्चेवा ने 31 हिट्स के साथ कांस्य पदक हासिल किया। चौंकाने वाली बात यह रही कि क्वालीफाइंग राउंड में 592-28x के स्कोर के साथ टॉप पर रहने वाली ओलंपिक विजेता यांग जी-इन फाइनल में अपनी लय खो बैठीं और पांचवें स्थान पर सिमट गईं।

मौजूदा आईएसएसएफ विश्व कप सीजन में भारत का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण

ईशा सिंह की यह कामयाबी भारतीय खेल जगत के लिए इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि चालू आईएसएसएफ विश्व कप सीजन में राइफल, पिस्टल और शॉटगन श्रेणियों में यह भारत का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक है। ईशा की इस स्वर्णिम सफलता ने भारतीय दल के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

भारतीय निशानेबाजों का दमदार सफर, मनु भाकर को फिर लगी निराशा

इस सीजन के विश्व कप सर्किट में भारतीय निशानेबाजों का प्रदर्शन बेहद उत्साहजनक रहा है। इससे पहले ग्रेनाडा में आयोजित 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में मुकेश नेलावल्ली और पलक गुलिया की जोड़ी ने देश को स्वर्ण पदक दिलाया था। इसके अलावा अल्माटी में विवान कपूर और नीरू ढांडा की जोड़ी ने मिश्रित टीम ट्रैप प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर तिरंगा लहराया था।

हालांकि, इस चमचमाती प्रतियोगिता के बीच भारतीय फैंस के लिए एक मायूस करने वाली खबर भी आई। इसी स्पर्धा में भारत की स्टार ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर क्वालीफाइंग राउंड में 582-19x के स्कोर के साथ 12वें स्थान पर रहीं और बहुत ही कम अंतर से फाइनल की रेस से बाहर हो गईं। वहीं, अनुभवी राही सरनोबत भी लय में नजर नहीं आईं और उन्हें 14वें स्थान से संतोष करना पड़ा। लेकिन ईशा सिंह के इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड ने देश के खेल प्रेमियों को जश्न मनाने का एक बड़ा मौका दे दिया है।

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