मेडल से महज एक कदम दूर टूटा भारत की इस बेटी का सपना, कजाकिस्तान की पहलवान ने ऐसे चकनाचूर की दीपांशी की उम्मीदें

मेडल से महज एक कदम दूर टूटा भारत की इस बेटी का सपना, कजाकिस्तान की पहलवान ने ऐसे चकनाचूर की दीपांशी की उम्मीदें

भारत की महिला पहलवान दीपांशी के लिए एशियाई खेलों का सफर निराशाजनक नतीजे के साथ खत्म हुआ। 50 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती के कांस्य पदक मुकाबले में उन्हें कजाकिस्तान की जेनेप बायानोवा ने 11-4 से हराया। इस हार के साथ दीपांशी पदक हासिल करने से एक कदम दूर रह गईं।

मुकाबले की शुरुआत दोनों पहलवानों ने सतर्क अंदाज में की। कुछ देर बाद दीपांशी ने शानदार दांव लगाकर बायानोवा को नीचे गिराया और भारत के खाते में 2 अंक जोड़े। हालांकि कजाकिस्तान की पहलवान ने तुरंत जवाब दिया। उन्होंने दीपांशी को पेट के बल गिराकर 2 अंक हासिल कर लिए।

इसके बाद मुकाबले में दीपांशी पर दबाव बढ़ता गया। मैट पर जरूरत से ज्यादा समय तक नीचे रहने के कारण उन्हें पीला कार्ड भी दिखाया गया। बायानोवा ने इस मौके का फायदा उठाया और एक और दांव लगाकर 2 अंक अपने खाते में जोड़ लिए। मुकाबले के दौरान दीपांशी को चिकित्सकीय मदद भी लेनी पड़ी। उपचार के बाद खेल फिर शुरू हुआ।

वापसी की कोशिश लेकिन हाथ से निकल गया मुकाबला

दूसरे हिस्से में बायानोवा ने दीपांशी को मैट की सीमा से बाहर कर 1 अंक और हासिल किया। भारतीय पहलवान ने हार नहीं मानी और 2 अंक की चाल चलकर अंतर को 4-7 तक ला दिया। यहां से वापसी की उम्मीद जगी।

लेकिन कजाकिस्तान की पहलवान ने निर्णायक समय में 4 अंक की बड़ी चाल चल दी। इससे उनका स्कोर 11 तक पहुंच गया। दीपांशी के लिए इसके बाद मुकाबले में वापसी करना संभव नहीं रहा और बायानोवा ने कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।

सुजीत ने मुश्किल स्थिति से निकाली जीत

दीपांशी के नतीजे के उलट पुरुषों की 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारत को शानदार सफलता मिली। सुजीत कलकल ने ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुडिएव को हराकर स्वर्ण पदक जीता।

सुजीत मुकाबले के दौरान एक समय 2-9 से पीछे चल रहे थे। ऐसा लग रहा था कि ताजिक पहलवान मुकाबले पर पकड़ मजबूत कर चुके हैं। लेकिन आखिरी 1 मिनट 40 सेकंड में सुजीत ने लगातार दांव लगाकर मुकाबले का रुख ही बदल दिया।

भारतीय पहलवान ने लगातार टेकडाउन से अंक जुटाए और तेजी से अंतर कम किया। मुकाबला खत्म होने से केवल 11 सेकंड पहले उन्होंने अपनी जीत पक्की कर ली। इस तरह मुश्किल स्थिति से शानदार वापसी करतेश्ती के लिए खास उपलब्धि है। 2018 जकार्ता-पालेमबांग एशियाई खेल हुए सुजीत ने स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाल दिया।