हारा हुआ मैच जीता पाकिस्तान… 154 पर ग‍िर गए थे 9 विकेट, शादाब खान के शतक से म‍िली ऐत‍िहास‍िक जीत

हारा हुआ मैच जीता पाकिस्तान… 154 पर ग‍िर गए थे 9 विकेट, शादाब खान के शतक से म‍िली ऐत‍िहास‍िक जीत

क्रिकेट के खेल को अनिश्चितताओं का महासमर यूं ही नहीं कहा जाता है, क्योंकि यहां कब बाजी पलट जाए और कौन सी टीम हारी हुई बाजी को जीत में बदल दे, इसके बारे में मैदान पर उतरने से पहले कुछ भी अनुमान लगाना नामुमकिन होता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे मुकाबले खेले गए हैं, जिन्हें फैंस कभी नहीं भूल पाते हैं, लेकिन कुछ मुकाबले ऐसे होते हैं जो रोमांच, संघर्ष और चमत्कार की सारी हदें पार कर जाते हैं। पाकिस्तान क्रिकेट टीम के इतिहास में भी एक ऐसा ही महामुकाबला दर्ज है, जिसे याद करके आज भी क्रिकेट प्रेमियों की रोंगटे खड़े हो जाते हैं। एक समय ऐसा था जब स्कोरबोर्ड पर पाकिस्तान के महज 154 रनों के कुल योग पर अपने 9 महत्वपूर्ण बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे और टीम की हार बेहद तय लग रही थी। स्टेडियम में मौजूद दर्शक और टीवी के सामने बैठे फैंस मान चुके थे कि अब इस मैच से वापसी करना किसी असंभव चमत्कार से कम नहीं होगा, क्योंकि क्रीज पर सिर्फ हार का सन्नाटा पसरा हुआ था। लेकिन तभी मैदान पर एक ऐसा तूफान आया जिसने क्रिकेट जगत की परिभाषा ही बदलकर रख दी। उपकप्तान और स्टार ऑलराउंडर शादाब खान ने अपनी बल्लेबाजी से वो करिश्मा कर दिखाया, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। उन्होंने अपनी सूझबूझ, अटूट जज्बे और विस्फोटक अंदाज के बल पर शानदार और ऐतिहासिक शतक जड़ दिया और अपनी टीम को एक ऐसी शर्मनाक हार के मुहाने से खींचकर बाहर निकाला, जो सदियों तक क्रिकेट के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में याद रखी जाएगी।

जब हार की कगार पर खड़ी थी टीम, पवेलियन लौट चुके थे लगभग सभी धुरंधर

यह किसी भी टीम के लिए सबसे डरावना सपना होता है कि उसकी पूरी बल्लेबाजी क्रम ताश के पत्तों की तरह ढह जाए और स्कोरबोर्ड पर रनों की संख्या बेहद कम हो। उस मुकाबले में भी कुछ ऐसा ही दिल दहला देने वाला मंजर देखने को मिला था। जब पाकिस्तान की टीम मैदान पर उतरी थी, तो शुरुआत से ही विपक्षी गेंदबाजों ने ऐसा कहर बरपाया कि पाकिस्तानी बल्लेबाजों के पास उनके पास कोई जवाब नहीं था। एक के बाद एक दिग्गज खिलाड़ी पिच पर आते गए और बिना टिके वापस लौटते चले गए। गेंदबाजों की आंधी के आगे क्रीज पर टिकना नामुमकिन सा प्रतीत हो रहा था। आलम यह हो गया कि देखते ही देखते टीम के 9 खिलाड़ी महज़ 154 के स्कोर पर पवेलियन वापस लौट चुके थे। ड्रेसिंग रूम में मातम छाया हुआ था और खिलाड़ी मैदान पर होने वाले आसन्न पराजय के खौफ से कांप रहे थे। विपक्षी खेमा जश्न मनाने की तैयारी कर चुका था, क्योंकि उन्हें पता था कि अब क्रीज पर केवल एक विकेट बाकी है और कुछ ही गेंदों का खेल शेष है। क्रिकेट के जानकारों ने भी अपनी राय रख दी थी कि अब इस मैच का नतीजा पूरी तरह से तय हो चुका है और पाकिस्तान की हार अब केवल औपचारिकता भर रह गई है। इस गंभीर परिस्थिति में किसी भी चमत्कार की दूर-दूर तक कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी, और पूरी टीम मानसिक रूप से पूरी तरह दबाव में आ चुकी थी।

शादाब खान का ऐतिहासिक शतक: जब एक छोर से लिखी गई करिश्माई वापसी की इबारत

जब चारों तरफ अंधेरा छा गया हो और उम्मीद की कोई किरण नजर न आ रही हो, तब कोई न कोई मसीहा मैदान पर उतरकर इतिहास रच देता है। उस ऐतिहासिक मुकाबले में पाकिस्तान के लिए वह मसीहा बनकर उभरे स्टार ऑलराउंडर शादाब खान। जब 9 विकेट गिर चुके थे और हार की तलवार पूरी तरह से गर्दन पर लटक रही थी, तब शादाब खान क्रीज पर डटे हुए थे। उन्होंने बिना अपना मानसिक संतुलन खोए, बेहद शांत चित्त और गजब के आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी करने का फैसला किया। उन्होंने अच्छी तरह समझ लिया था कि अगर अब उन्होंने जिम्मेदारी नहीं उठाई, तो टीम को एक शर्मनाक हार का सामना करना पड़ेगा। इसके बाद उन्होंने मैदान पर जो खेल दिखाया, उसने देखने वालों की आंखें फटी की फटी रह गईं। शादाब ने शुरुआत में संभलकर खेलते हुए सिंगल-डबल रन जोड़े और फिर धीरे-धीरे अपने शॉट्स खेलने शुरू किए। उन्होंने विपक्षी गेंदबाजों के हर एक आक्रमण का डटकर सामना किया और मैदान के चारों तरफ बेहतरीन स्ट्रोक्स लगाए। क्रीज के दूसरे छोर पर खड़े आखिरी बल्लेबाज का साथ मिलते ही उन्होंने स्कोरबोर्ड को तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया। उनकी इस अद्भुत और साहसिक पारी के दौरान उनके बल्ले से एक ऐसा शानदार और यादगार शतक निकला, जिसने पूरे स्टेडियम में जान फूंक दी। इस शतक को बनाते हुए उन्होंने अपनी तकनीक, मानसिक दृढ़ता और दबाव को झेलने की अद्भुत क्षमता का जो परिचय दिया, वह दुनिया भर के युवा खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल बन गया।

आखिरी विकेट के लिए हुई उस रिकॉर्ड साझेदारी ने पलट दिया पूरा का पूरा मैच

क्रिकेट के खेल में अक्सर कहा जाता है कि जब तक आखिरी गेंद न फेंकी जाए, मैच खत्म नहीं होता और इस बात को शादाब खान और उनके साथी आखिरी बल्लेबाज ने शत-प्रतिशत सच साबित कर दिया। 154 रन पर 9 विकेट गिरने के बाद जो पार्टनरशिप मैदान पर पनपी, उसने क्रिकेट जगत के बड़े-बड़े दिग्गजों को भी हैरान कर दिया। शादाब खान ने आखिरी बल्लेबाज को अपने पास सुरक्षित रखते हुए खुद स्ट्राइक अपने पास रखी और रन बनाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली। उन्होंने ना सिर्फ खुद बेहतरीन शॉट्स खेले, बल्कि दूसरे छोर पर खड़े बल्लेबाज का भी पूरा हौसला बढ़ाया ताकि वह भी गेंदबाज के दबाव को झेल सके। दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई इस रिकॉर्ड तोड़ आखिरी विकेट की साझेदारी ने विरोधी टीम के गेंदबाजों के पसीने छुड़ा दिए। कप्तान और गेंदबाज इस बात से पूरी तरह हैरान थे कि जिस टीम को वे कुछ ही पोंछ देने की सोच रहे थे, वही टीम अचानक उनके लिए काल बनकर खड़ी हो गई है। रन लगातार जुड़ते जा रहे थे और स्कोरबोर्ड आगे बढ़ रहा था। दर्शक दीर्घा में बैठी भीड़ अपनी सांसें रोककर इस रोमांचक मुकाबले को देख रही थी। इस अविश्वसनीय साझेदारी ने मैच के रुख को पूरी तरह से पलट दिया और हारी हुई बाजी को एक यादगार जीत में बदल दिया।

जब जश्न में डूब गया पूरा स्टेडियम, पाकिस्तान क्रिकेट इतिहास का सबसे अनोखा दिन

जैसे ही शादाब खान ने अपने बल्ले से विनिंग रन बनाया या टीम ने लक्ष्य को पार किया, पूरा स्टेडियम खुशी के मारे झूम उठा। मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों की आंखों में खुशी के आंसू थे और वे एक-दूसरे को गले लगाकर इस अद्भुत जीत का जश्न मना रहे थे। जो टीम कुछ ही देर पहले मैदान पर शर्मनाक हार के कगार पर खड़ी थी, वह अचानक से जीत का जश्न मना रही थी। ड्रेसिंग रूम का माहौल पूरी तरह बदल चुका था और सपोर्ट स्टाफ से लेकर कोच तक हर कोई इस चमत्कारिक जीत पर यकीन नहीं कर पा रहा था। सोशल मीडिया पर चारों तरफ शादाब खान के इस ऐतिहासिक शतक और उस करिश्माई पारी की चर्चा होने लगी। खेल विशेषज्ञों ने इसे क्रिकेट इतिहास के सबसे महान कमबैक्स में से एक करार दिया। इस जीत ने न सिर्फ पाकिस्तान टीम का खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लौटाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि खेल के मैदान पर कभी भी हार नहीं माननी चाहिए क्योंकि मेहनत और जज्बे के दम पर नामुमकिन को भी मुमकिन बनाया जा सकता है। यह मैच आज भी पाकिस्तान क्रिकेट के सुनहरे पन्नों में दर्ज है और जब भी रोमांचक मुकाबलों की बात होती है, तो इस मैच का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है।