टीम इंडिया में दरार? गौतम गंभीर की कोचिंग स्टाइल पर रविचंद्रन अश्विन का बड़ा बयान, राहुल द्रविड़ से की तुलना
भारतीय क्रिकेट टीम के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चलने की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। मुख्य कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) के मार्गदर्शन में खेल रही टीम इंडिया को लेकर सीनियर ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन (R. Ashwin) का एक हालिया बयान सोशल मीडिया से लेकर खेल गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। अश्विन ने पूर्व मुख्य कोच राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) के कार्यकाल और उनकी कार्यशैली की खुलकर तारीफ करते हुए मौजूदा कोच गंभीर पर परोक्ष रूप से एक तीखा तंज कसा है। अश्विन के इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या गंभीर की सख्त और आक्रामक कोचिंग रणनीति के तहत भारतीय टीम के सीनियर खिलाड़ी खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहे हैं और क्या टीम बिखरने की कगार पर है?
'द्रविड़ के समय स्पष्टता थी...' अश्विन ने याद किया पुराना दौर
एक हालिया इंटरव्यू और अपने यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान रविचंद्रन अश्विन ने राहुल द्रविड़ के कोचिंग एरा (Dravid Era) की जमकर सराहना की। अश्विन ने कहा कि द्रविड़ के रहते हुए टीम के हर खिलाड़ी को अपनी भूमिका (Role Clarity) को लेकर पूरी स्पष्टता थी। ड्रेसिंग रूम का माहौल बेहद शांत और संयमित रहता था, जहां खिलाड़ियों को खुलकर अपने विचार रखने की आजादी थी। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि अश्विन द्वारा द्रविड़ के 'कूल एंड कंपोज्ड' रवैये की इस तरह अचानक तारीफ करना, सीधे तौर पर गौतम गंभीर के 'हाई-प्रेशर' और आक्रामक दृष्टिकोण पर एक परोक्ष हमला है।
गंभीर की सख्त कार्यशैली बनाम द्रविड़ का सौम्य स्वभाव
ड्रेसिंग रूम की इनसाइड स्टोरी: सूत्रों के मुताबिक, जब से गौतम गंभीर ने टीम इंडिया के मुख्य कोच का पद संभाला है, तब से टीम के वर्क कल्चर में एक बड़ा बदलाव आया है। गंभीर हर मैच में शत-प्रतिशत आक्रामकता और परिणाम की उम्मीद रखते हैं। जहां राहुल द्रविड़ बैकस्टेज रहकर खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाते थे, वहीं गंभीर फ्रंटफुट पर आकर कड़े फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। अश्विन का यह बयान दर्शाता है कि टीम के कुछ सीनियर खिलाड़ी शायद इस अचानक हुए बदलाव और गंभीर के कड़े तेवरों के साथ पूरी तरह तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं।
क्या तितर-बितर हो रही है टीम इंडिया? हालिया प्रदर्शनों पर उठे सवाल
गौतम गंभीर की कोचिंग में भारतीय टीम के कुछ हालिया प्रदर्शनों के बाद उन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। रणनीतियों में बार-बार बदलाव, बैटिंग ऑर्डर के साथ लगातार किए जा रहे प्रयोग और सीनियर खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर लिए जा रहे फैसलों ने टीम के भीतर एक असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। अश्विन जैसे कद्दावर और अनुभवी खिलाड़ी द्वारा टीम के माहौल पर टिप्पणी करने के बाद पूर्व क्रिकेटरों ने भी यह कहना शुरू कर दिया है कि गंभीर को अपने कड़े रुख में थोड़ा लचीलापन लाना होगा, अन्यथा टीम के भीतर असंतोष और अधिक बढ़ सकता है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस; गंभीर और द्रविड़ के फैंस आमने-सामने
अश्विन के इस बयान के बाद क्रिकेट प्रेमियों के बीच भी दो गुट बन गए हैं। एक वर्ग का मानना है कि अश्विन ने बिल्कुल सही मुद्दा उठाया है और द्रविड़ का शांत स्वभाव ही भारतीय टीम को एकजुट रखने के लिए सबसे बेहतर था। वहीं, गंभीर के समर्थकों का तर्क है कि टीम इंडिया को विदेशी पिचों पर जीतने और आईसीसी (ICC) ट्रॉफी के सूखे को खत्म करने के लिए गंभीर जैसी आक्रामक मानसिकता वाले मेंटॉर की ही जरूरत है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अश्विन के इस तंज पर मुख्य कोच गौतम गंभीर या बीसीसीआई (BCCI) के आला अधिकारी क्या प्रतिक्रिया देते हैं।