विनोद कांबली के साथ वैभव सूर्यवंशी की तुलना, इस दिग्गज का बयान हुआ वायरल
भारतीय क्रिकेट जगत, खेल प्रेमियों और उभरते हुए युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा को लेकर इस वक्त देश भर के खेल गलियारों में एक बहुत बड़ी और तीखी बहस छिड़ गई है। अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और कम उम्र में ही बड़े रिकॉर्ड बनाकर रातों-रात स्टार बने युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) की तुलना जब पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज विनोद कांबली (Vinod Kambli) के साथ की जाने लगी, तो इस पर देश के महानतम ऑलराउंडर और पूर्व विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव (Kapil Dev) का एक बेहद चौंकाने वाला और आंखें खोल देने वाला बयान सामने आया है। कपिल देव ने बेबाक अंदाज में कहा है कि मौजूदा समय में इस युवा खिलाड़ी के लिए अगले दो साल तक केवल रन बनाना या बड़े स्कोर खड़े करना बिल्कुल भी मायने नहीं रखता है, बल्कि इस उम्र में उसके मानसिक विकास और खेल के प्रति अनुशासन को संभालना सबसे बड़ी चुनौती है। क्रिकेट के जानकारों और पूर्व दिग्गजों के बीच चल रही इस चर्चा ने खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कपिल देव ने वैभव सूर्यवंशी की तुलना और उनके भविष्य को लेकर यह बड़ी बात क्यों कही है और इसके पीछे की पूरी खेल नीति क्या है।
क्या है विनोद कांबली और वैभव सूर्यवंशी की तुलना का पूरा मामला: कम उम्र की स्टारडम और भविष्य की चुनौतियां
जब भी भारतीय क्रिकेट में किसी कम उम्र के प्रतिभाशाली खिलाड़ी का पदार्पण होता है, तो उसकी तुलना अतीत के किसी धुरंधर खिलाड़ी से करने का पुराना चलन रहा है। विनोद कांबली ने भी अपने करियर की शुरुआत में रनों का अंबार लगा दिया था और उनकी आक्रामक शैली की पूरी दुनिया दीवानी हो गई थी, लेकिन बाद के दिनों में मैदान के बाहर की विसंगतियों और दबाव के कारण वे उस उच्च स्तर को लंबे समय तक बरकरार नहीं रख सके। ठीक इसी प्रकार, बेहद कम उम्र में अपनी अद्भुत बल्लेबाजी से सनसनी फैलाने वाले वैभव सूर्यवंशी की तुलना जब कांबली से की जाने लगी, तो क्रिकेट पंडितों के कान खड़े हो गए। आलोचकों और शुभचिंतकों दोनों का यह मानना है कि युवा खिलाड़ियों को शुरुआती दिनों में मिलने वाली अत्यधिक लोकप्रियता और मीडिया का दबाव उनके कच्चे दिमाग पर भारी पड़ सकता है, जिससे उनके करियर का ग्राफ संवरने के बजाय बिखरने का खतरा भी बन जाता है।
कपिल देव की दो टूक सलाह: 'अगले दो साल तक रन मायने नहीं रखते, खिलाड़ी को तराशना असली काम है'
इस पूरी बहस में कूदते हुए भारतीय क्रिकेट के महान कप्तान कपिल देव ने एक निजी इंटरव्यू या कार्यक्रम के दौरान बहुत ही गहरी और व्यावहारिक बात कही है। कपिल देव का यह मानना है कि वैभव सूर्यवंशी जैसे प्रतिभावान खिलाड़ियों को इस समय रनों के दबाव से पूरी तरह मुक्त कर देना चाहिए, क्योंकि इस उम्र में केवल स्कोरबोर्ड पर रन देखना जरूरी नहीं होता। उन्होंने कहा कि अगले दो साल तक उस खिलाड़ी के लिए रन बनाना मायने नहीं रखता, बल्कि यह मायने रखता है कि वह खेल की बारीकियों को कितना सीख रहा है, कोचों की सलाह को कितना आत्मसात कर रहा है और अपनी मानसिक एकाग्रता को कैसे बरकरार रख रहा है। कपिल देव ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड और उनके मेंटर्स की यह जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वे इस कच्चे हीरे को सही दिशा में तराशें ताकि वह जल्दबाजी में चमक खोने के बजाय आने वाले समय में देश के लिए एक लंबा और शानदार करियर बना सके।
भारतीय क्रिकेट में युवा प्रतिभाओं का प्रबंधन: क्या हम कम उम्र के खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा दबाव बना रहे हैं
कपिल देव के इस बयान के बाद देश भर के खेल विशेषज्ञों के बीच यह सवाल फिर से तैरने लगा है कि क्या हम अपनी युवा प्रतिभाओं को बहुत जल्दी आसमान पर चढ़ा देते हैं और फिर जरा सी चूक होने पर उन्हें नीचे गिरा देते हैं। आईपीएल और विभिन्न घरेलू सर्किटों में जिस प्रकार से युवा खिलाड़ियों को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया जाता है, उससे उनके व्यक्तिगत जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की पूरी आशंका रहती है। वैभव सूर्यवंशी के मामले में भी खेल प्रेमियों और दिग्गजों का यही कहना है कि उन्हें मीडिया की चकाचौंध से दूर रखकर केवल उनके खेल और फिटनेस पर ध्यान देना चाहिए। बहरहाल, कपिल देव की यह चेतावनी भारतीय क्रिकेट प्रशासन और खुद उस युवा खिलाड़ी के लिए एक बेहतरीन मार्गदर्शन साबित हो सकती है, जो यह सिखाती है कि प्रतिभा के साथ-साथ अनुशासन और धैर्य ही किसी खिलाड़ी को महान बनाता है।