राज्यों में कोविड वैक्सीन की कमी के बीच ‘टीका उत्सव’, कैसे बदलेगा माहौल ?

डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कहर के बीच आज से ‘टीका उत्सव’ शुरू हुआ है। यह आयोजन 14 अप्रैल तक चलेगा। ‘टीका उत्सव’ का लक्ष्य देश में अधिकतम लाभार्थियों का टीकाकरण करना है। हालांकि यह ‘टीका उत्सव’ ऐसे समय पर आयोजित किया जा रहा है जब महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश आदि राज्य वैक्सीन की कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में ‘टीका उत्सव’ को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पीएम मोदी ने 8 अप्रैल को मुख्यमंत्रियों के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में कोविड-19 की स्थिति और टीकाकरण अभियान पर चर्चा के दौरान 45 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों का टीकाकरण कराने पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया था। इस दौरान पीएम ने ज्योतिबा फुले की जयंती 11 अप्रैल से 14 अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती तक ‘टीका उत्सव’ के आयोजन की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि इससे टीकाकरण की क्षमता बढ़ने के साथ माहौल को बदलने में मदद मिलेगी।

इस तरह प्रधानमंत्री की अपील पर आज से देशभर में ‘टीका उत्सव’ शुरू हो गया है। इससे पहले देश के अधिकांश राज्यों में कोविड वैक्सीन की कमी की शिकायतें आ रही हैं। कोविड वैक्सीन की कमीं के चलते ही में महाराष्ट्र सरकार ने कई टीकाकरण केंद्रों को बंद कर दिया है। इसी तरह पंजाब में भी कोविड वैक्सीन की बेहद कमीं है। जानकारी के मुताबिक़ पंजाब में प्रतिदिन 85,000 से 90,000 लोगों का टीकाकरण हो रहा है। पंजाब के पास अगले पांच दिनों में कोविड वैक्सीन का अकाल होगा।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर पुष्ट किए गए सप्लाई ऑर्डरों के हिसाब से अगली तिमाही के लिए राज्यों के साथ वैक्सीन की सप्लाई का कार्यक्रम साझा किये जाने की अपील की है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कोविड वैक्सीन की अगली सप्लाई जल्द भेजने की उम्मीद की है।

कोविड वैक्सीन की कमीं के बीच देश में ‘टीका उत्सव’ के आयोजन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है की कोविड वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बजाय केंद्र सरकार ‘टीका उत्सव’ के आयोजनों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अगर राज्यों को समय से पर्याप्त मात्रा में कोविड वैक्सीन की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं होती तो ‘टीका उत्सव’ भी सरकार की कथित उपलब्धियों का प्रचार उत्सव बनकर रह जाएगा।

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