ज्ञानवापी में सावन जलाभिषेक की इजाजत दें, सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, जानिए पूरा मामला

ज्ञानवापी में सावन जलाभिषेक की इजाजत दें, सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, जानिए पूरा मामला

वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी परिसर (Gyanvapi Case) को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत से इस वक्त की सबसे बड़ी और कानूनी रूप से बेहद संवेदनशील खबर सामने आ रही है। सावन के पवित्र महीने के मद्देनजर हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक विशेष याचिका दायर कर ज्ञानवापी परिसर के भीतर स्थित कथित 'शिवलिंग' (जिसे मुस्लिम पक्ष फव्वारा बताता है) पर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और नियमित पूजा-अर्चना करने की तत्काल इजाजत मांगी गई है। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ आज इस विशेष याचिका पर अंतिम और गंभीर सुनवाई करने जा रही है। सावन मास की शुरुआत के साथ ही इस सुनवाई पर पूरे देश, विशेषकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी और काशी क्षेत्र के शिवभक्तों की निगाहें टिकी हुई हैं।

हिंदू पक्ष की मुख्य दलील: 'सावन में जलाभिषेक हमारा मौलिक अधिकार'

सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी नई याचिका में हिंदू पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया है कि सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए वर्ष का सबसे पवित्र समय होता है। चूंकि ज्ञानवापी परिसर के वजूखाने में मिले उस ढांचे (शिवलिंग) की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता सदियों पुरानी है, इसलिए हिंदुओं को वहां पर शांतिपूर्ण ढंग से पूजा और जलाभिषेक करने का अधिकार मिलना चाहिए। याचिका में भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा गया है कि जब तक पूरे मामले का मुख्य मालिकाना हक तय नहीं हो जाता, तब तक सावन जैसे विशेष अवसरों पर प्रतीकात्मक या सीमित संख्या में जलाभिषेक की अनुमति दी जानी चाहिए।

मुस्लिम पक्ष का कड़ा विरोध: 'यथास्थिति का उल्लंघन होगा'

दूसरी ओर, अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी (Anjuman Intezamia Masjid Committee) ने हिंदू पक्ष की इस नई मांग का कोर्ट में पुरजोर विरोध करने की पूरी कानूनी तैयारी कर ली है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह पूरा परिसर अभी भी कानूनी विवाद के अधीन है और ऐसे में किसी भी नए धार्मिक अनुष्ठान या पूजा की अनुमति देना सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों और परिसर की 'यथास्थिति' (Status Quo) का सीधे तौर पर उल्लंघन होगा। मुस्लिम पक्ष लगातार यह दलील दे रहा है कि 1991 के प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट (Places of Worship Act) के तहत इस धार्मिक स्थल के स्वरूप को बदलने या किसी नए अनुष्ठान को शुरू करने पर पूरी तरह से कानूनी रोक है।

एएसआई (ASI) सर्वे और निचली अदालतों का मौजूदा रुख

  • व्यास जी के तहखाने में पूजा जारी: आपको बता दें कि वाराणसी जिला अदालत के आदेश के बाद ज्ञानवापी परिसर के दक्षिणी छोर पर स्थित 'व्यास जी के तहखाने' में हिंदू पक्ष को नियमित पूजा-अर्चना और आरती करने की अनुमति पहले ही मिल चुकी है, जिसे इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

  • वजूखाना सील होने का मामला: जिस कथित शिवलिंग पर जलाभिषेक की अनुमति मांगी जा रही है, वह हिस्सा सुप्रीम कोर्ट के ही पुराने आदेश के बाद पूरी तरह से सील (Protected Area) किया हुआ है।

  • एएसआई की वैज्ञानिक रिपोर्ट: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की साइंटिफिक सर्वे रिपोर्ट पहले ही सामने आ चुकी है, जिसमें मस्जिद की दीवारों और स्तंभों पर हिंदू धार्मिक प्रतीकों के मिलने का दावा किया गया था, जिसके बाद से हिंदू पक्ष का दावा कानूनी रूप से और मजबूत हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली यह सुनवाई इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि अदालत का फैसला यह तय करेगा कि क्या सावन के महीने में ज्ञानवापी परिसर के विवादित और सील किए गए हिस्से में किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि को हरी झंडी मिल सकती है या फिर अदालत मुख्य मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक यथास्थिति को ही बरकरार रखेगी। वाराणसी प्रशासन और यूपी पुलिस ने इस बड़ी सुनवाई के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को अत्यधिक कड़ा कर दिया है।

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