जो कभी क्लास नहीं गईं वो छात्राएं कैसे बनीं टॉपर, यूपी यूनिवर्सिटी में स्कूटी बंटते ही खुला 'नकल सिंडिकेट' का राज
राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में परीक्षा प्रणाली और रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना की मेरिट सूची को लेकर विवाद गरमा गया है। राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (रंपुटा) ने विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति प्रो. नरेंद्र बहादुर सिंह की कार्यशैली पर सीधा मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. ओमवीर सिंह ने मंगलवार को प्रेस वार्ता कर दावा किया कि विवि से जुड़े कई कॉलेजों में नकल माफिया पूरी तरह हावी है और विश्वविद्यालय प्रशासन पारदर्शी ढंग से परीक्षाएं आयोजित कराने में विफल साबित हो रहा है।
विवाद की मुख्य जड़ रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत जारी की गई चयन सूची बनी है। जिले भर में कुल 1039 छात्राओं को इस योजना के लिए चिन्हित किया गया है। प्रो. ओमवीर सिंह के अनुसार, इस सूची में प्रतिष्ठित शासकीय डीएस कॉलेज की केवल 4 छात्राएं, टीकाराम महाविद्यालय की 1 और हाथरस के आरडी कॉलेज की 1 छात्रा का नाम शामिल है, जबकि खुद विश्वविद्यालय कैंपस से एक भी छात्रा चयनित नहीं हो सकी। इसके विपरीत, 1033 छात्राएं वित्तपोषित (एडेड) कॉलेजों से चुनी गई हैं।
शिक्षक संघ का कहना है कि जिन कॉलेजों में नियमित कक्षाएं तक नहीं चलतीं और छात्र उपस्थिति बेहद कम रहती है, वहां की छात्राओं ने इतने अधिक अंक कैसे हासिल कर लिए। संघ ने इसे सीधे तौर पर संगठित नकल का नतीजा बताया है। इस विसंगति के विरोध में चलाए गए हस्ताक्षर अभियान में अब तक 4,000 से अधिक छात्राओं ने अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
शिक्षक संघ ने परीक्षा केंद्र निर्धारण में भी पक्षपात के आरोप जड़े हैं। संघ का आरोप है कि विश्वविद्यालय के लगभग 38 चुनिंदा कॉलेजों को नियमों की अनदेखी कर बार-बार परीक्षा केंद्र बनाया जा रहा है, जिससे मिलीभगत का संदेह गहराता है। वहीं, इन आरोपों पर कुलपति प्रो. एनबी सिंह ने स्पष्ट किया है कि आरोप कोई भी लगा सकता है, विश्वविद्यालय पूरी तरह नियमों के तहत कार्य कर रहा है और यदि कहीं कोई प्रशासनिक कमी पाई जाती है तो उसे तत्काल ठीक किया जाएगा।