यूपी चुनाव में 'वोट चोरी' पर रैलियों की 'बाढ़' लाएगी कांग्रेस, प्रियंका गांधी ने आराधना मिश्रा को मोर्चे पर लगाया

यूपी चुनाव में 'वोट चोरी' पर रैलियों की 'बाढ़' लाएगी कांग्रेस, प्रियंका गांधी ने आराधना मिश्रा को मोर्चे पर लगाया

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक हलचलों और रणनीतिक दांव-पेचों का दौर अब अपने चरम पर पहुंच गया है। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में भारी सरगर्मियां देखने को मिल रही हैं। पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव और प्रमुख रणनीतिकार प्रियंका गांधी वाड्रा ने यूपी में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और निर्वाचन आयोग के खिलाफ एक बहुत बड़ा राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि चुनाव प्रक्रियाओं और मतदाता सूचियों में भारी गड़बड़ी करके 'वोट चोरी' का सुनियोजित खेल खेला जा रहा है, जिसे अब राज्य की जनता के सामने उजागर करना बेहद जरूरी हो गया है। इस पूरे राष्ट्रव्यापी और राज्यव्यापी आंदोलन को धार देने के लिए प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ नेता और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' को अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर दिया है। कांग्रेस की योजना अब राज्य के कोने-कोने में जनसभाओं, विरोध प्रदर्शनों और विशाल रैलियों की ऐसी बाढ़ लाने की है, जिससे सत्ताधारी दल को सीधी चुनौती दी जा सके।

प्रियंका गांधी और शीर्ष नेतृत्व की बैठक में बनी चुनावी रणनीति, आराधना मिश्रा को मिली कमान

हाल ही में नई दिल्ली में प्रियंका गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, प्रदेश प्रभारी और यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' के बीच एक बेहद उच्चस्तरीय और गोपनीय बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार समितियों, घोषणापत्र समितियों के गठन और बूथ स्तर तक के संगठन को फिर से सक्रिय करने पर गहन विचार-विमर्श हुआ। बैठक में सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि 'वोट चोरी' और चुनाव आयोग की कथित पक्षपातपूर्ण कार्यशैली को ही पार्टी का मुख्य चुनावी एजेंडा बनाया जाएगा। प्रियंका गांधी ने इस अभियान की पूरी जिम्मेदारी विधायक व वरिष्ठ नेता आराधना मिश्रा 'मोना' के मजबूत कंधों पर सौंपी है। पार्टी आलाकमान का मानना है कि आराधना मिश्रा की जमीनी पकड़, स्पष्ट वक्ता शैली और ब्रज व अवध क्षेत्र में उनका जनाधार इस जनांदोलन को एक नई राजनीतिक ऊंचाई तक ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा।

'वोट चोरी' और मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर गांव-गांव पहुंचेगी कांग्रेस, जनसभाओं की बनेगी रणनीति

कांग्रेस का यह नया अभियान केवल लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित पार्टी मुख्यालय या बड़े शहरों की सड़कों तक ही सीमित नहीं रहेगा। रणनीति के मुताबिक, प्रदेश भर के प्रत्येक जिले, तहसील और ब्लॉक स्तर पर 'वोट चोरी रोको' रैलियां और अधिकार यात्राएं आयोजित की जाएंगी। आराधना मिश्रा 'मोना' के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश के दूर-दराज के गांवों में जाकर जनता को यह समझाएंगे कि कैसे उनके लोकतांत्रिक अधिकारों और वोटिंग के अधिकार पर डाका डाला जा रहा है। पार्टी नेताओं का दावा है कि हाल के चुनावों के दौरान हजारों की संख्या में गरीब, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब किए गए हैं। इन रैलियों के जरिए जहां एक तरफ आम जनता को जागरूक करने की कोशिश की जाएगी, वहीं दूसरी तरफ हर जिले के कलेक्ट्रेट पर विशाल प्रदर्शन करके ज्ञापन सौंपे जाएंगे ताकि सत्ता पक्ष और चुनाव आयोग पर प्रशासनिक दबाव बनाया जा सके।

INDIA गठबंधन के साथ मिलकर महारैलियों का आयोजन, यूपी की सियासत में हलचल तेज

यूपी चुनाव में 'वोट चोरी' के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर उछालने के लिए कांग्रेस अकेले ही नहीं, बल्कि अपने सहयोगी दलों (INDIA Bloc) के साथ मिलकर भी साझा जनसभाएं और विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रही है। दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए मेगा प्रदर्शन के बाद अब उत्तर प्रदेश के प्रमुख मंडलों जैसे वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर, मेरठ और आगरा में साझा महारैलियां करने की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी द्वारा आराधना मिश्रा को फ्रंट पर लाने और रैलियों की शृंखला शुरू करने के इस फैसले से उत्तर प्रदेश के सपा-कांग्रेस गठबंधन में भी नई ऊर्जा का संचार हुआ है। कांग्रेस का यह आक्रामक रुख भारतीय जनता पार्टी के चुनावी गणित को बिगाड़ने और स्थानीय मुद्दों को केंद्र में लाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम साबित हो सकता है।

निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के नए सियासी अध्याय की धमाकेदार शुरुआत

संक्षेप में कहें तो प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा आराधना मिश्रा 'मोना' पर जताया गया यह भरोसा और 'वोट चोरी' के मुद्दे पर रैलियों का विशाल खाका उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है। रैलियों की इस झड़ी और जमीनी अभियानों के जरिए कांग्रेस न केवल प्रदेश में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने की पुरजोर कोशिश कर रही है, बल्कि सत्ताधारी दल के खिलाफ एक मजबूत और आक्रामक नैरेटिव सेट करने में भी काफी हद तक कामयाब दिख रही है।