'या तो न्याय दो, या जिंदा जलवा दो!' UP में 5 चिताओं के सामने बैठा पूरा परिवार, मामला जान कांप उठेगा दिल

'या तो न्याय दो, या जिंदा जलवा दो!' UP में 5 चिताओं के सामने बैठा पूरा परिवार, मामला जान कांप उठेगा दिल

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में प्रशासनिक उपेक्षा और जाति प्रमाण पत्र न बनने से आहत एक परिवार का दर्द खौफनाक विरोध प्रदर्शन में तब्दील हो गया है। जेवर तहसील क्षेत्र के कानीगढ़ी गांव में एक मजदूर पिता अपने चार मासूम बेटों के साथ खुद की अर्थियां (चिताएं) सजाकर आमरण अनशन पर बैठ गया है।

पिछले कई सालों से दफ्तरों की चौखट नाप रहे इस परिवार का धैर्य अब जवाब दे चुका है। अनशन स्थल पर एक खाली प्लॉट में उपलों (कंडों) से पांच अलग-अलग चिताएं बनाई गई हैं और पिता अपने चारों बच्चों के साथ एक-एक चिता के आगे बैठा है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही जिले से लेकर शासन तक हड़कंप मच गया है।

कानीगढ़ी गांव के रहने वाले सुंदर सिंह मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सुंदर का कहना है कि वे अगरिया जाति से ताल्लुक रखते हैं और उनके चार बेटे हैं। बच्चों के स्कूल में दाखिले और भविष्य के लिए उन्हें वर्षों से जाति प्रमाण पत्र की सख्त दरकार है। पीड़ित का दावा है कि तहसील स्तर से जांच और औपचारिक निस्तारण के बाद जब उनकी फाइल जिला मुख्यालय पहुंची, तो जिलाधिकारी मेधा रूपम ने उनके आवेदन को सीधे खारिज कर दिया। सुंदर के अनुसार, आवेदन निरस्त करने का आधार यह बताया गया कि गौतमबुद्धनगर जिले में अगरिया जाति के लोग निवास नहीं करते हैं।

प्रशासन के इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए सुंदर सिंह का कहना है कि उनके गांव में उनकी जाति के लोगों के नाम वैध सरकारी पट्टे दर्ज हैं और बिरादरी के कई लोग सरकारी नौकरियों में भी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उनके अस्तित्व और जाति को ही नकार देना पूरी तरह अन्याय है। प्रशासनिक रवैये से तंग आकर सुंदर ने महात्मा गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर से यह आमरण अनशन शुरू किया था। उस दौरान स्थानीय अधिकारियों ने गुरुवार तक प्रमाण पत्र जारी करने का भरोसा दिलाकर मामला शांत कराने की कोशिश की थी, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते उनका अनशन बदस्तूर जारी है।

अनशन स्थल पर लगाए गए पोस्टरों में परिवार का आक्रोश और बेबसी साफ झलक रही है। एक तरफ जहां पोस्टरों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 'भगवान स्वरूप' बताते हुए सीधे न्याय की गुहार लगाई गई है, वहीं दूसरी तरफ जिलाधिकारी मेधा रूपम की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया गया है। पोस्टरों पर स्पष्ट शब्दों में लिखा है—"गौतमबुद्ध नगर डीएम मेधारूपम ने किया तानाशाही, अत्याचार। भगवान स्वरूप मुख्यमंत्री योगी जी से है न्याय की गुहार। योगी से हमें न्याय दिलवाओ या हमें जिंदा जलवाओ। अन्याय रूपी चिता के पास बैठकर आमरण अनशन।" सुंदर का साफ कहना है कि जब तक उनके बच्चों को उनका संवैधानिक हक यानी जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल जाता, वे चिता के सामने से नहीं हटेंगे।